जेएनयू: छात्रसंघ अध्यक्ष अदिति मिश्रा को नोटिस, अनुशासन समिति के सामने होना होगा पेश, क्या हैं आरोप?
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय ने छात्रसंघ अध्यक्ष अदिति मिश्रा को कथित तौर पर सुरक्षा कर्मियों से दुर्व्यवहार करने और परिसर में संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोप में नोटिस जारी किया है। उन्हें 22 अक्तूबर को अनुशासन समिति के सामने पेश होने को कहा गया है।
विस्तार
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) ने पीएचडी की छात्रा और जेएनयू छात्रसंघ (JNUSU) की अध्यक्ष अदिति मिश्रा को नोटिस जारी किया है। 9 अक्तूबर को जारी नोटिस में उन्हें 22 अक्तूबर को दोपहर 2.30 बजे प्रशासनिक भवन में मुख्य प्रॉक्टर की समिति के सामने पेश होने का निर्देश दिया गया है।
नोटिस के मुताबिक, मुख्य प्रॉक्टर कार्यालय को शिकायत मिली थी कि 8 सितंबर को अदिति मिश्रा ने सुरक्षा कर्मियों के साथ कथित तौर पर दुर्व्यवहार किया और मारपीट की। उन पर इंटर-हॉल प्रशासन (IHA) के मुख्य द्वार के शीशे और एक खिड़की को नुकसान पहुंचाने का आरोप भी है।
पेशी के दौरान क्या करना होगा?
अदिति मिश्रा को अपना पक्ष रखने और बचाव में कोई भी सबूत पेश करने का मौका दिया गया है। नोटिस में कहा गया है कि यदि वह सुनवाई में शामिल नहीं होती हैं, तो उनकी अनुपस्थिति में भी मामले पर फैसला लिया जा सकता है।
नोटिस के अनुसार, 2 फरवरी के कार्यालय आदेश के तहत अदिति मिश्रा को पहले ही विश्वविद्यालय से निष्कासित किया जा चुका है और परिसर में उनके प्रवेश पर रोक लगाई गई है। उन्हें 22 अक्तूबर को दोपहर 2:30 बजे उत्तरी द्वार स्थित सुरक्षा कार्यालय में रिपोर्ट करने को कहा गया है। वहां से सुरक्षा कर्मी उन्हें मुख्य प्रॉक्टर कार्यालय तक लेकर जाएंगे।
क्या अन्य छात्रों को भी नोटिस मिला है?
जेएनयू के छात्रों का दावा है कि 8 सितंबर को हुए विरोध प्रदर्शन के संबंध में कम से कम 10 से 12 अन्य छात्रों को भी इसी तरह के नोटिस मिले हैं। हालांकि, विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई। नोटिस की कुल संख्या की स्वतंत्र रूप से पुष्टि भी नहीं हो सकी है।
छात्रसंघ की भूख हड़ताल क्यों जारी है?
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब जेएनयू छात्रसंघ के सदस्य अपनी कई मांगों को लेकर भूख हड़ताल कर रहे हैं। उनकी प्रमुख मांगों में शामिल हैं:
- छात्रसंघ पदाधिकारियों का निष्कासन रद्द करना
- जेएनयू प्रवेश परीक्षा (JNUEE) दोबारा शुरू करना
- यौन उत्पीड़न के खिलाफ लैंगिक संवेदनशीलता समिति (GSCASH) को बहाल करना
फिलहाल, विश्वविद्यालय की ओर से इस मामले पर आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है।
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