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जम्मू-कश्मीर स्टूडेंट एसोसिएशन ने की ऑनलाइन परीक्षा रद्द करने की मांग
Sat, 12 Dec 2020 05:42 PM IST
Devesh Devesh
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
Published by: Devesh Devesh
Updated Sat, 12 Dec 2020 05:42 PM IST
सार
- केंद्रीय शिक्षा मंत्री से ऑनलाइन प्रॉक्टेड मोड एग्जामिनेशन को रद्द करने का आग्रह किया
- जम्मू-कश्मीर में कई क्षेत्रों में हाई स्पीड इंटरनेट कनेक्टिविटी पर जारी है प्रतिबंध
- जामिया मिल्लिया इस्लामिया की कुलपति नजमा अख्तर को भी लिखा पत्र
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विस्तार
जम्मू-कश्मीर स्टूडेंट एसोसिएशन ने ऑनलाइन एग्जाम रद्द करने की मांग की है। इस सबंध में एसोसिएशन ने शुक्रवार को देहरादून में केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक और जामिया मिल्लिया इस्लामिया की कुलपति नजमा अख्तर को पत्र लिखा है। एसोसिएशन ने पत्र में ऑनलाइन प्रॉक्टेड मोड एग्जामिनेशन का विरोध करते हुए इसको रद्द करने का आग्रह किया है।
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एक बयान के अनुसार, एसोसिएशन के प्रवक्ता नासिर ख्यूहमी ने विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा परीक्षा के ऑनलाइन प्रॉक्टेड मोड का संचालन करने के मनमाने फैसले की निंदा की है। उन्होंने कहा कि ऑनवलाइन परीक्षा का आयोजन छात्रों द्वारा अनुभव की जा रही समसस्याओं के आधार पर असंगत है।
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ख्यूहमी ने बयान में कहा कि ये दिशा-निर्देश हमारी शिक्षा प्रणाली में संभ्रांतता की भावना को दर्शाते हैं। साथ ही ये भेदभाव का अहसास भी कराते हैं, क्योंकि हाशिए पर जी रहे कुछ समुदायों के छात्र लैपटॉप और कंप्यूटर नहीं खरीद सकते हैं। ऑनलाइन परीक्षाओं का यह आदेश शिक्षा को अधिकार के स्थान पर एक विशेषाधिकार बनाता है। जो कि वंचित तबके के छात्रों में अवसाद का कारण बन सकता है।
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उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री पोखरियाल और जामिया मिलिया इस्लामिया की कुलपति अख्तर से अनुरोध किया कि इस समस्या को हल करने के लिए तत्काल कदम उठाए जाएं और परीक्षा के ऑनलाइन प्रॉक्टेड मोड को खत्म किया जाए।
घाटी में 4 जी सेवाओं पर प्रतिबंध :
ख्यूहमी ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में हाई स्पीड इंटरनेट कनेक्टिविटी (4 जी सेवाओं) पर लगातार प्रतिबंध के कारण कश्मीरी छात्र परीक्षा में शामिल नहीं हो पाएंगे। अधिकांश छात्र निम्न वर्ग से आते हैं और उनकी आय का कोई स्रोत नहीं है। उन्होंने कहा कि कश्मीर घाटी में सबसे ज्यादा शिक्षा का क्षेत्र प्रभावित हुआ है। घाटी में भारी बर्फबारी के कारण बिजली कटौती भी आम बात है। वहीं, बिना तेज गति की इंटरनेट सेवाओं के साथ छात्रों के पास परीक्षा में शामिल होने का कोई विकल्प नहीं है।
परीक्षा के अनुचित तरीके करियर बर्बाद कर देंगे :
प्रवक्ता ने आगे कहा कि विश्वविद्यालय के अधिकांश छात्र उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और अन्य दक्षिणी राज्यों के पिछड़े जिलों से संबंधित हैं। साथ ही इस तरह परीक्षा के अनुचित तरीके उनके करियर को बर्बाद कर देंगे। ख्यूहमी ने यह भी कहा कि हाई स्पीड इंटरनेट कनेक्टिविटी की अनुपलब्धता ने कई छात्रों के लिए ऑनलाइन कक्षाओं की प्रक्रिया में बाधा उत्पन्न की थी।
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