America: भारतीय पीएचडी छात्रा ने किया अमेरिका से सेल्फ डिपोर्ट; बोली- माहौल खतरनाक और अस्थिर लग रहा था
America: भारतीय पीएचडी छात्रा रंजनी श्रीनिवासन का अमेरिकी वीजा "हिंसा और आतंकवाद के समर्थन" के आरोप में रद्द कर दिया गया। कोलंबिया यूनिवर्सिटी से निकाले जाने के बाद, उन्होंने कनाडा में शरण ली। वकीलों ने इसे "अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता" पर हमला बताया।
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विस्तार
New York: कोलंबिया विश्वविद्यालय में पढ़ रही भारतीय छात्रा रंजनी श्रीनिवासन ने अपना वीजा रद्द होने के बाद अमेरिका छोड़ने का फैसला किया। उन्होंने बताया कि जब अमेरिकी इमिग्रेशन एजेंट पहली बार उनके अपार्टमेंट के दरवाजे पर पहुंचे, तो वह बेहद डरावना पल था। 37 वर्षीय श्रीनिवासन को हाल ही में पता चला था कि उनका छात्र वीजा रद्द कर दिया गया है।
जब तीन इमिग्रेशन एजेंटों ने उनके दरवाजे पर दस्तक दी, तो उन्होंने दरवाजा नहीं खोला। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अगले दिन जब एजेंट दोबारा आए, तब भी वह वहां नहीं थीं। उन्होंने जल्दी-जल्दी कुछ सामान पैक किया, अपनी बिल्ली को एक दोस्त के पास छोड़ा और न्यूयॉर्क के लागार्डिया हवाई अड्डे से कनाडा के लिए उड़ान भर ली।
जब गुरुवार की रात एजेंट तीसरी बार आए और न्यायिक वारंट के साथ उनके अपार्टमेंट में दाखिल हुए, तब तक वह वहां से जा चुकी थीं। श्रीनिवासन ने न्यूयॉर्क टाइम्स को दिए इंटरव्यू में कहा कि माहौल इतना अस्थिर और खतरनाक लग रहा था कि मैंने तुरंत फैसला लिया।
वीजा रद्द होने का कारण
5 मार्च को अमेरिकी विदेश विभाग ने उनका वीजा रद्द कर दिया था। अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग के मुताबिक, उन्हें 11 मार्च को होमलैंड सिक्योरिटी की कस्टम्स और बॉर्डर प्रोटेक्शन (CBP) होम ऐप के जरिए "स्वयं निर्वासन" करते हुए देखा गया।
अमेरिकी सरकार का आरोप है कि श्रीनिवासन "हिंसा और आतंकवाद का समर्थन करने" और फलस्तीनी उग्रवादी समूह हमास से जुड़े गतिविधियों में शामिल थीं।
गृह सुरक्षा विभाग ने एक बयान में कहा कि श्रीनिवासन कोलंबिया विश्वविद्यालय में शहरी योजना की पीएचडी छात्रा थीं और उन्होंने अमेरिका में छात्र वीजा (F-1) पर प्रवेश किया था। विभाग ने आरोप लगाया कि वह "हमास का समर्थन करने वाली गतिविधियों" में शामिल थीं।
राजनीतिक विरोध और कार्रवाई
श्रीनिवासन, जो एक फुलब्राइट स्कॉलर भी हैं, अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के समर्थकों द्वारा फिलिस्तीन समर्थक प्रदर्शनकारियों पर की जा रही सख्ती की चपेट में आ गईं। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, वह उन कुछ विदेशी नागरिकों में से एक हैं, जिन्हें हाल के दिनों में कोलंबिया विश्वविद्यालय में आव्रजन एजेंसी ने निशाना बनाया।
अपना वीजा रद्द होने और विश्वविद्यालय से नामांकन वापस लिए जाने के बाद, उन्होंने कहा कि वह अब यह भी नहीं जानतीं कि वह अपनी पांच साल की पढ़ाई पूरी कर पाएंगी या नहीं।
श्रीनिवासन ने सीएनएन को दिए एक बयान में कहा, "मेरा वीजा रद्द कर दिया गया, मेरा छात्र दर्जा खत्म कर दिया गया और मेरा भविष्य दांव पर लगा दिया गया – सिर्फ इसलिए कि मैंने अपनी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का प्रयोग किया।"
स्वयं निर्वासन पर अमेरिकी सरकार की प्रतिक्रिया
कोलंबिया विश्वविद्यालय ने इस मामले पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। गृह सुरक्षा मंत्री क्रिस्टी नोएम ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा किया, जिसमें श्रीनिवासन को लागार्डिया हवाई अड्डे पर सूटकेस के साथ देखा जा सकता है। उन्होंने इसे "स्वयं निर्वासन" बताते हुए इसकी सराहना की।
नोएम ने X (पहले ट्विटर) पर लिखा, "अमेरिका में रहना और पढ़ाई करना एक विशेषाधिकार है। जब आप हिंसा और आतंकवाद का समर्थन करते हैं, तो यह विशेषाधिकार आपसे छीन लिया जाना चाहिए।"
वकीलों की प्रतिक्रिया
श्रीनिवासन के वकीलों ने इन आरोपों को सख्ती से खारिज किया है और ट्रंप प्रशासन पर आरोप लगाया है कि उन्होंने "संरक्षित राजनीतिक अभिव्यक्ति" के कारण उनका वीजा रद्द किया। उन्होंने कहा कि श्रीनिवासन को इस फैसले को चुनौती देने के लिए "कोई उचित प्रक्रिया" नहीं दी गई।
वकील नाज अहमद ने कहा, "नोएम की पोस्ट न केवल तथ्यात्मक रूप से गलत है, बल्कि अमेरिका के मूल्यों के खिलाफ भी है। गृह सुरक्षा विभाग ने पूरे सप्ताह यह दिखाने की कोशिश की कि वे उन्हें उनकी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए सजा दे रहे हैं, लेकिन वे इसमें असफल रहे हैं।"
छात्र आंदोलन और ट्रंप प्रशासन की नीति
गृह सुरक्षा विभाग ने दावा किया कि जब श्रीनिवासन ने पिछले साल अपना वीजा नवीनीकरण कराया, तो उन्होंने कोलंबिया विश्वविद्यालय में हुए दो विरोध प्रदर्शनों से जुड़े समन का खुलासा नहीं किया। हालांकि, विभाग ने यह स्पष्ट नहीं किया कि इन समनों से वह आतंकवाद की समर्थक कैसे बन गईं।
श्रीनिवासन ने शुक्रवार को कहा, "अब मुझे डर लग रहा है कि अगर कोई भी राजनीतिक बयान दिया जाए या सोशल मीडिया पर कोई टिप्पणी की जाए, तो सरकार किसी को भी आतंकवाद समर्थक ठहरा सकती है और उसकी जिंदगी बर्बाद कर सकती है।"
न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार, ट्रंप प्रशासन ने विश्वविद्यालय में वीजा धारकों को निशाना बनाकर नए तरीके से निर्वासन की नीति अपनाई है। ट्रंप प्रशासन ने विश्वविद्यालय पर यह आरोप लगाया कि उसने यहूदी छात्रों की सुरक्षा करने में विफलता दिखाई है और इसके कारण विश्वविद्यालय को 400 मिलियन डॉलर के अनुदान से वंचित कर दिया गया।
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