Independence Day 2023: कौन थे गंगू मेहतर? अकेले 200 अंग्रेज सैनिकों को सुला दिया था मौत की नींद!
15 August 2023: गंगू मेहतर को लोग गंगू बाबा के नाम से भी जानते हैं। गंगू बाबा ने 1857 के विद्रोह में अकेले ही 200 से भी ज्यादा ब्रिटिश सैनिकों को मौत की नींद सुला दिया था।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
77th Independence Day 2023: ब्रिटिश राज की बेड़ियों से छुटकारा पाने के लिए भारतीयों में सालों तक संघर्ष किया, तब कहीं जाकर देश आजाद हुआ। आजादी के इस संघर्ष में कई स्वतंत्रता सेनानियों की मजबूत छवि बनी, जिन्हे आज सब जानते हैं; जैसे महात्मा गांधी, चंद्रशेखर आजाद, भगत सिंह, नेताजी सुभाष चंद्र बोस और न जाने ऐसे ही कितने और स्वतंत्रता सेनानियों को आज हम जानते हैं। हालांकि, कई स्वतंत्रता सेनानी ऐसे भी रहे जिन्होंने स्वतंत्रता के संघर्ष में बहुत मूल्यवान आहुति दी, लेकिन इनके बारे में ज्यादातर लोग नहीं जानते हैं। ऐसे ही भारत माता के एक वीर थे- गंगू मेहतर।
कौन थे गंगू मेहतर
गंगू मेहतर को लोग गंगू बाबा के नाम से भी जानते हैं। गंगू बाबा ने 1857 के विद्रोह में अकेले ही 200 से भी ज्यादा ब्रिटिश सैनिकों को मौत की नींद सुला दिया था। उनका कहना था कि भारत की माटी में हमारे पूर्वजों के खून और कुर्बानी की गंध है और एक दिन यह देश (भारत) आजाद जरूर होगा।
गंगू मेहतर का जन्म कानपुर के पास स्थित अकबरपुर में हुआ। उस दौर में जाति को लेकर समाज में कई असमानताएं फैली हुई थीं, जिसका शिकार गंगू भी हुए। चूंकि वो निम्न जाति के थे इसलिए उन्हे पढ़ने-लिखने का अवसर भी नहीं मिल पाया। इस छुआ-छूत की प्रताड़ना से बचने के लिए गंगू परिवार संग कानपुर के चुंगीगंज में बस गए।
पहलवानी का था शौक
गंगू को पहलवानी करना बहुत पसंद था। पहलवानी उन्होंने एक मुस्लिम उस्ताद से सीखी थी। 1857 में देशभर में अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह शुरू हो चुका था। कानपुर भी इसका केंद्र बना। मराठों की हार के बाद अंतिम पेशवा बाजीराव कानपुर के बिठूर आकर बस गए और उन्होंने नाना साहब को गोद ले लिया। बाजीराव के देहांत के बाद अंग्रेजों ने नाना को बाजीराव का वारिस नहीं माना, जिसके जवाब में नाना साहब ने भी अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह की शरुआत कर दी।
200 से ज्यादा अंग्रेजी सैनिकों को मार गिराया था
नाना साहब पेशवा के सैनिक दस्ते में गंगू मेहतर भी थे। वो दस्ते के सबसे बेहतरीन लड़ाकों में से एक थे। उनकी वीरता और पहलवानी की कला को देखकर बाद में उन्हे सूबेदार का पद मिल गया। उन्होंने 1857 की लड़ाई में नाना साहब की ओर से अंग्रेजों से जमकर लोहा लिया और सैंकड़ो सैनिकों को मार गिराया। बताया जाता है कि गंगू ने अकेले ही 200 से भी ज्यादा अंग्रेज सैनिकों को मौत की नींद सुलाया था। उनके इस पराक्रम से अंग्रेजी हुकूमत बुरी तरह सहम गई।
बुलंद था उनका हौसला
ब्रिटिश हुकूमत उन्हे जिंदा पकड़ना चाहती थी, ताकि सबके सामने सजा दे सकें। हालांकि, उन्होंने वीरता से ब्रिटिश सेना का सामना किया, लेकिन आखिरकार उन्हे गिरफ्तार कर लिया गया। उन्हे घोड़े से बांधकर पूरे शहर में घुमाया गया और फिर हथकड़ियां पहनाकर जेल में बंद कर दिया गया। काफी अत्याचार करने के बाद भी अंग्रेज उनके हौसले को तोड़ न सकी। बताया जाता है कि गंगू ने अपने आखिरी समय में भी यही कहा था कि भारत की माटी में हमारे पूर्वजों के खून और कुर्बानी की गंध है और एक दिन यह देश (भारत) आजाद जरूर होगा।
हंसते-हंसते चढ़ गए थे फांसी
कहते हैं गंगू ने अंतिम समय तक ब्रिटिश हुकूमतों को ललकारा और कहा था, भारत की माटी में हमारे पूर्वजों का खून व कुर्बानी की गंध है। एक दिन यह मुल्क आजाद होगा। कानपुर में 8 सितंबर 1859 को गंगू मेहतर ने हंसते-हंसते फांसी के फंदे को चूम लिया।
कमेंट
कमेंट X