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Independence Day 2023: हर किसी को राष्ट्रीय ध्वज बनाने का अधिकार नहीं, सिर्फ इन संस्थानों के पास है ऑथराइजेशन

Mon, 14 Aug 2023 03:01 PM IST
आकाश कुमार एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: आकाश कुमार Updated Mon, 14 Aug 2023 03:01 PM IST
सार

National Flag: साल 2016 तक देश में एक ही ऑथराइज्ड नेशनल फ्लैग मैन्युफैक्चरिंग यूनिट थी। साल 2016 में एक और संस्थान को सर्टिफिकेशन मिलने के साथ ही अब देश में दो संस्थाओं के पास आधिकारिक तौर पर झंडा बनाने का अधिकार है।
 

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Independence Day 2023 ISI tricolors are made in the country only in the center of Hooghly in Karnataka and Gwa
राष्ट्रीय झंडा - फोटो : पीटीआई

विस्तार

77th Independence Day 2023: स्वतंत्रता दिवस के मौके पर सरकार हर घर तिरंगा अभियान चला रही है।  15 अगस्त को लाल किले पर प्रधानमंत्री तिरंगा फहराएंगे। इसके साथ ही स्कूल-कॉलेजों सहित सभी सरकारी दफ्तरों पर भी तिरंगा फहराया जाएगा, लेकिन क्या आप जानते हैं झंडा कहां बनता है? दरअसल, देश में आधिकारिक तौर पर झंडा बनाने का ऑथराइजेशन हर किसी फ्लैग मैन्युफैक्चरिंग संस्थान के पास नहीं है।

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कहां है नेशनल फ्लैग मैन्युफैक्चरिंग यूनिट?

राष्ट्रीय पर्व पर झंडा फहराना लोगों के राष्ट्रप्रेम और राष्ट्राभिमान की भावना का प्रतिबिंब होता है। कुछ सालों पहले तक आपने स्कूल में बच्चों को प्लास्टिक से बना झंडा ले जाते देखा होगा, लेकिन 1 जुलाई से सरकार ने सिंगल यूज प्लास्टिक को भी बैन कर दिया है, जिस वजह से अब प्लास्टिक से बने झंडे देखने में नहीं आएंगे। हालांकि, आधिकारिक तौर पर देश में झंडा एक ही संस्थान बनाया करता था, लेकिन अब झंडा बनाने वाली संस्थाएं दो हो चुकी हैं।

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ये है ऑथराइज्ड मैन्युफैक्चरिंग यूनिट 

खादी और ग्रामाद्योग आयोग की तरफ से कर्नाटक में हुबली शहर के बेंगेरी इलाके में स्थित KKGSS, यानी कर्नाटक खादी ग्रामोद्योग संयुक्त संघ, तिरंगा बनाने की ऑथराइज्ड मैन्युफैक्चरिंग यूनिट है। इस नेशनल फ्लैग मैन्युफैक्चरिंग यूनिट को देश में आधिकारिक रूप से तिरंगा बनाने का अधिकार है। इसे हुबली यूनिट भी कहते हैं। इस संस्थान को ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स (BIS) से सर्टिफिकेशन मिला हुआ है। 

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18 बार चेक होती है क्वालिटी

कर्नाटक खादी ग्रामोद्योग संयुक्त संघ मे बने तिरंगे की गुणवत्ता की जांच BIS करता है। थोड़ी भी गड़बड़ी मिलने पर उस झंडे को रिजेक्ट कर दिया जाता है। प्रोडक्शन में से तकरीबन 10 फीसदी झंडे रिजेक्ट हो जाते हैं। हर सेक्शन पर इनकी 18 बार क्वालिटी टेस्ट होती है। कर्नाटक खादी ग्रामोद्योग संयुक्त संघ में तिरंगे के लिए धागा बनाने से लेकर पैंकिंग तक में करीब 250 लोग काम करते हैं, जिनमें से लगभग 80-90 फीसदी महिलाएं हैं। 

देश की दूसरी नेशनल फ्लैग मैन्युफैक्चरिंग यूनिट 

हुबली के अलावा, एक नेशनल फ्लैग मैन्युफैक्चरिंग यूनिट मध्यप्रदेश के ग्वालियर में भी है। यहां से भी कई सरकारी और गैर-सरकारी विभागों सहित 16 राज्यों में झंडे पहुचाए जाते हैं। गौरतलब है कि आईएसआई तिरंगे देश में कर्नाटक के हुगली और एमपी के ग्वालियर के केंद्र में ही बनाए जाते हैं।  

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