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ये IIT ला रहा है प्रदूषित पानी को उपयोग लायक बनाने की नई तकनीक, यूरोपीय संघ दे रहा मदद

Wed, 21 Aug 2019 01:14 PM IST
रत्नप्रिया रत्नप्रिया एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: रत्नप्रिया रत्नप्रिया Updated Wed, 21 Aug 2019 01:14 PM IST
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IIT Kharagpur to discover technique for water treatment under Saraswati project, EU to help
पानी - फोटो : pixabay

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) खड़गपुर अपशिष्ट जल के उपचार के लिए नई तकनीक विकसित करने जा रहा है। यह तकनीक ऐसी होगी जिसके जरिए प्रदूषित हो चुके पानी को दोबारा प्रयोग के लायक बनाया जा सकेगा। इसके लिए एक परियोजना की शुरुआत की जा रही है। खास बात ये है कि इस परियोजना के लिए यूरोपीय संघ (EU) आईआईटी खड़गपुर को आर्थिक मदद देगा। 

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इस संबंध में संस्थान की ओर से बुधवार को जानकारी साझा की गई। बताया गया कि आईआईटी खड़गपुर पानी के उपचार और दोबारा प्रयोग के लिए कई करोड़ रुपये की लागत से ‘सरस्वती 2.0’ परियोजना की शुरुआत करेगा।
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जानकारी दी गई है कि इस परियोजना के लिए यूरोपीय संघ और भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग और जैव प्रौद्योगिकी विभाग निधि मुहैया कराएंगे।

इस परियोजना का मकसद अपशिष्ट जल के उपचार के लिए उपलब्ध सर्वश्रेष्ठ एवं किफायती तकनीकों की पहचान करना है। साथ ही ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में पानी के प्रयोग की चुनौतियों के लिए समाधान ढूंढना है।

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परियोजना के तहत क्या होगा काम

इस परियोजना के तहत आईआईटी खड़गपुर के परिसर में तीन जल उपचार संयंत्र स्थापित किए जाएंगे। इसकी मदद से अपशिष्ट जल का उपचार किया जा सकेगा और उसे सिंचाई में प्रयोग करने योग्य बनाया जा सकेगा।

संस्थान के ‘आदित्य चौबे सेंटर फॉर री-वॉटर रिसर्च’ के प्रोफेसर मकरंद घांगरेकर ने बताया कि संयंत्र जनवरी 2020 से शुरू हो जाएंगे।

ये भी पढ़ें : CWUR वर्ल्ड रैंकिंग में इस विश्वविद्यालय ने आईआईटी और जेएनयू को पछाड़ा

आईआईटी खड़गपुर के अलावा इस परियोजना के अन्य साझीदार भारतीय संस्थान हैं- आईआईटी मद्रास, आईआईटी भुवनेश्वर, आईआईटी रुड़की, एनआईटीआईई मुंबई, एमएनआईटी जयपुर और टेरी स्कूल ऑफ एडवांस्ड स्टडीज। इन संस्थानों में भी पानी के उपचार के लिए सात ऐसे संयंत्र स्थापित किए जाएंगे।

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