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गुजरात सरकार का बड़ा फैसला : आदिवासी इलाकों में खोले जाएंगे पांच मेडिकल कॉलेज, सीएम रूपाणी ने किया एलान

Mon, 09 Aug 2021 09:10 PM IST
देवेश शर्मा एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: देवेश शर्मा Updated Mon, 09 Aug 2021 09:10 PM IST
सार

मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने सोमवार, 09 अगस्त, 2021 को विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर बड़ी घोषणा करते हुए कहा कि गुजरात सरकार ने राज्य के आदिवासी क्षेत्रों में पांच नए मेडिकल कॉलेज खोलने जा रही है।

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Gujarat government to open 5 medical colleges in tribal areas says CM Rupani
गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी - फोटो : एएनआई

विस्तार

मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने सोमवार, 09 अगस्त, 2021 को विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर बड़ी घोषणा करते हुए कहा कि गुजरात सरकार ने राज्य के आदिवासी क्षेत्रों में पांच नए मेडिकल कॉलेज खोलने जा रही है। रूपाणी ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि उनकी सरकार अगले पांच वर्षों के दौरान आदिवासियों के कल्याण के लिए वनबंधु कल्याण योजना-2 के तहत 1,00,000 करोड़ रुपये खर्च करेगी।

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रूपाणी ने 'बिरसा मुंडा जनजातीय विश्वविद्यालय' के मुख्य परिसर के लिए एक ऑनलाइन शिलान्यास भी किया, जो गुजरात के आदिवासी बहुल नर्मदा जिले में राजपीपला शहर के पास बनेगा। इस मौके पर रूपाणी ने कहा कि मेरी सरकार ने राज्य के आदिवासी क्षेत्रों में पांच नए मेडिकल कॉलेजों की स्थापना को मंजूरी दी है। बिरसा मुंडा ने आदिवासियों के उत्थान के लिए संघर्ष किया।

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रूपाणी ने कहा कि यह बहुत गर्व की बात है कि उनके नाम पर एक विश्वविद्यालय यहां खुल रहा है। 400 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला इस विश्वविद्यालय से आदिवासी युवाओं को अपना करियर बनाने में मदद मिलेगी। 
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39 एकड़ भूमि पर 400 करोड़ से बन रहा विश्वविद्यालय

रूपाणी मुख्यमंत्री के रूप में अपने पांच साल पूरे होने के उपलक्ष्य में नौ दिवसीय कार्यक्रमों के तहत 'विश्व आदिवासी दिवस' मना रहे थे। बिरसा मुंडा जनजातीय विश्वविद्यालय 2017 में अस्तित्व में आया और उसी वर्ष राजपीपला के एक कॉलेज से अपनी शैक्षणिक गतिविधियों की शुरुआत की गई। 

उन्होंने बताया कि 39 एकड़ भूमि पर लगभग 400 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले मुख्य परिसर में 500 छात्र-छात्राओं के रहने के लिए छात्रावास, एक खेल परिसर, सभागार, प्रयोगशालाएं, अनुसंधान केंद्र और स्टाफ क्वार्टर भी होंगे। यह विश्वविद्यालय कला, वाणिज्य, विज्ञान, पारंपरिक कला और कौशल, और हर्बल चिकित्सा में स्नातक, स्नातकोत्तर और यहां तक कि डॉक्टरेट पाठ्यक्रम भी प्रदान करेगा।

2007 में मोदी ने शुरू की थी वनबंधु कल्याण योजना

रूपाणी ने अपने संबोधन में कहा कि उनकी सरकार अगले पांच वर्षों के दौरान वनबंधु कल्याण योजना-2 के तहत 1,00,000 करोड़ रुपये खर्च करेगी। आदिवासियों के कल्याण और विकास के लिए वनबंधु कल्याण योजना की शुरुआत नरेंद्र मोदी ने 2007 में की थी, जब वे गुजरात के मुख्यमंत्री थे। 

उन्होंने आगे कहा कि इस योजना के तहत अब तक उन आदिवासी क्षेत्रों में विभिन्न विकास कार्यों पर 90,000 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य के आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, बुनियादी ढांचे, कृषि और सिंचाई से संबंधित परियोजनाओं पर पैसा खर्च किया गया था।  

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