G7 Summit 2025: सात देशों का सुपर ग्रुप जी7, क्यों बना और क्या करता है; जानें दुनिया पर इसका असर
G7 Summit: दुनिया की सात सबसे ताकतवर अर्थव्यवस्थाओं का समूह जी-7 न सिर्फ वैश्विक नीतियों को आकार देता है, बल्कि सुरक्षा, तकनीक और जलवायु जैसे अहम मुद्दों पर भी निर्णायक भूमिका निभाता है। आइए विस्तार से जानें..
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G7 Summit 2025: जी-7 यानी "Group of Seven" यह केवल सात विकसित देशों का समूह नहीं, बल्कि वैश्विक राजनीति, अर्थव्यवस्था और सुरक्षा से जुड़े फैसलों का एक शक्तिशाली मंच है। वर्ष 2025 में कनाडा की मेजबानी में हुए जी7 सम्मेलन ने एक बार फिर दुनिया को यह दिखा दिया कि यह मंच कितनी गहराई से वैश्विक फैसलों को प्रभावित करता है।
तो चलिए जानते हैं, जी7 क्या है, क्यों बना, कैसे काम करता है और इसका दुनिया पर क्या असर पड़ता है।
जी-7 का गठन और उद्देश्य
जी-7 की शुरुआत 1975 में उस समय हुई जब विश्व 1973–74 की आर्थिक मंदी और तेल संकट (ऑयल शॉक) से जूझ रहा था। तब अमेरिका, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान और ब्रिटेन ने मिलकर G-6 का गठन किया, ताकि वैश्विक आर्थिक नीतियों पर समन्वय हो सके। 1976 में कनाडा के शामिल होने के बाद यह समूह G-7 कहलाया। इसका मुख्य उद्देश्य विकसित देशों के बीच आर्थिक स्थिरता बनाए रखना और वैश्विक चुनौतियों का साझा समाधान तलाशना रहा है।
G-7 क्या करता है? इसके मुख्य कार्य क्या हैं?
G-7 अब केवल आर्थिक मामलों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समूह वैश्विक स्तर पर कई अहम क्षेत्रों में सक्रिय भूमिका निभा रहा है। यह व्यापार, निवेश और वित्तीय नीतियों के जरिए वैश्विक अर्थव्यवस्था को दिशा देता है, जबकि अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के मोर्चे पर युद्ध, आतंकवाद और परमाणु खतरे जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए रणनीति बनाता है।
इसके अलावा, जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण संरक्षण, वैश्विक स्वास्थ्य संकटों (जैसे महामारी) पर त्वरित प्रतिक्रिया, और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी आधुनिक तकनीकों के लिए वैश्विक नियम तय करने में भी G7 की प्रमुख भूमिका रहती है।
दुनिया पर G-7 का क्या असर पड़ता है?
जी-7 के फैसले वैश्विक दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाते हैं, खासकर विकासशील देशों के लिए। इसकी आर्थिक नीतियां वैश्विक बाजार, मुद्रास्फीति और व्यापार पर गहरा असर डालती हैं। सुरक्षा के क्षेत्र में यह समूह युद्ध और अंतरराष्ट्रीय संघर्षों, जैसे यूक्रेन संकट में, सक्रिय भूमिका निभाता है। तकनीकी और पर्यावरणीय मामलों में जी-7 पर्यावरण समझौतों और डिजिटल गवर्नेंस जैसे मुद्दों पर दिशा निर्धारित करता है। साथ ही, यह चीन और रूस जैसी वैश्विक शक्तियों पर राजनीतिक और कूटनीतिक दबाव बनाकर संतुलन बनाने की कोशिश करता है।
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