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Hindi News ›   Education ›   Entrance Exam Reforms: Govt Panel Considers Class 11 Level Tests to Reduce Coaching Dependence

Exam Reform: कोचिंग पर निर्भरता कम करने की तैयारी; 12वीं से पहले एंट्रेंस एग्जाम कराने पर चल रहा विचार

Tue, 13 Jan 2026 08:22 PM IST
आकाश कुमार एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: आकाश कुमार Updated Tue, 13 Jan 2026 08:22 PM IST
सार

Entrance Exam Reforms: केंद्र सरकार की गठित समिति प्रवेश परीक्षाओं में सुधार पर काम कर रही है। पैनल कक्षा 11 में कुछ प्रवेश परीक्षाएं कराने और स्कूल परीक्षाओं को एंट्रेंस एग्जाम के पैटर्न से जोड़ने पर विचार कर रहा है, ताकि छात्रों की कोचिंग पर निर्भरता कम हो सके।
 

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Entrance Exam Reforms: Govt Panel Considers Class 11 Level Tests to Reduce Coaching Dependence
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Adobe Stock

विस्तार

Entrance Exam Reforms: प्रवेश परीक्षाओं में सुधार और छात्रों की कोचिंग संस्थानों पर बढ़ती निर्भरता को कम करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा गठित एक विशेष समिति कई अहम सुझावों पर विचार कर रही है। अधिकारियों के मुताबिक, यह समिति इस संभावना की जांच कर रही है कि कुछ महत्वपूर्ण प्रवेश परीक्षाएं कक्षा 11 में ही कराई जा सकती हैं या फिर इन परीक्षाओं का कठिनाई स्तर कक्षा 11 और 12 की परीक्षाओं के अनुरूप किया जा सकता है।

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समिति यह भी अध्ययन कर रही है कि मौजूदा प्रवेश परीक्षाओं का कठिनाई स्तर कक्षा 12 के पाठ्यक्रम से कितना मेल खाता है, क्योंकि अधिकतर राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षाएं इसी पाठ्यक्रम पर आधारित होती हैं।

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नौ सदस्यीय समिति का गठन

पिछले साल शिक्षा मंत्रालय ने कोचिंग संस्थानों से जुड़े मुद्दों, ‘डमी स्कूलों’ की बढ़ती संख्या और प्रवेश परीक्षाओं की निष्पक्षता और प्रभावशीलता की समीक्षा के लिए नौ सदस्यीय समिति का गठन किया था। इस समिति की अध्यक्षता उच्च शिक्षा सचिव विनीत जोशी कर रहे हैं।

इस समिति का मुख्य उद्देश्य यह सुझाव देना है कि छात्र उच्च शिक्षा में प्रवेश के लिए कोचिंग संस्थानों पर कम निर्भर हों और स्कूल शिक्षा व्यवस्था अधिक मजबूत और उपयोगी बने।

कक्षा 11 स्तर पर प्रवेश परीक्षा की संभावना पर चल रहा काम

समिति की हालिया बैठक में कई हितधारकों ने सुझाव दिया कि यदि कुछ प्रवेश परीक्षाएं कक्षा 11 में आयोजित की जाएं, या कम से कम कक्षा 11 की परीक्षाओं का पैटर्न मल्टीपल चॉइस क्वेश्चन (MCQ) आधारित किया जाए, जैसा कि अधिकतर प्रवेश परीक्षाओं में होता है, तो छात्रों को कोचिंग की जरूरत कम पड़ेगी। इस सुझाव पर गंभीरता से अध्ययन किया जा रहा है।

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स्कूल शिक्षा प्रणाली की कमियों की पहचान

समिति वर्तमान स्कूल शिक्षा प्रणाली की उन कमियों की भी समीक्षा कर रही है, जिनके कारण छात्र कोचिंग संस्थानों की ओर मजबूर होते हैं। इसमें खासतौर पर क्रिटिकल थिंकिंग, लॉजिकल रीजनिंग, एनालिटिकल स्किल्स और नवाचार पर कम ध्यान दिए जाने की बात सामने आई है। इसके अलावा, रटने पर आधारित पढ़ाई की प्रवृत्ति को भी एक बड़ी समस्या माना गया है।

कोचिंग पर नियंत्रण और बोर्ड परीक्षा को महत्व देने का सुझाव

समिति को कई और सुझाव भी मिले हैं, जिनमें कोचिंग संस्थानों के पढ़ाने के समय को सीमित करना, स्कूल के पाठ्यक्रम को प्रतियोगी परीक्षाओं के अनुरूप बनाना और बोर्ड परीक्षाओं के अंकों को उच्च शिक्षा में प्रवेश के लिए अधिक महत्व देना शामिल है।

करियर विकल्पों की जानकारी पर भी जोर

समिति छात्रों और अभिभावकों के बीच करियर विकल्पों को लेकर जागरूकता के स्तर का भी आकलन कर रही है। यह देखा जा रहा है कि सीमित करियर विकल्पों और कुछ चुनिंदा प्रतिष्ठित संस्थानों पर अधिक ध्यान देने के कारण छात्र और परिवार कोचिंग पर अत्यधिक निर्भर हो जाते हैं। इसके साथ ही स्कूलों और कॉलेजों में करियर काउंसलिंग की उपलब्धता और उसकी गुणवत्ता का मूल्यांकन कर, उसे बेहतर बनाने के सुझाव भी दिए जाएंगे।

समिति के सदस्य कौन-कौन हैं

इस समिति में सीबीएसई के चेयरमैन, स्कूल शिक्षा और उच्च शिक्षा विभाग के संयुक्त सचिव, आईआईटी मद्रास, एनआईटी त्रिची, आईआईटी कानपुर और एनसीईआरटी के प्रतिनिधि शामिल हैं। इसके अलावा, केंद्रीय विद्यालय, नवोदय विद्यालय और एक निजी स्कूल के प्रिंसिपल भी समिति का हिस्सा हैं।

बढ़ते विवादों के बीच उठाया गया कदम

देश में कोचिंग संस्थान बीते कुछ समय से कई विवादों के केंद्र में रहे हैं। सरकार को छात्रों की आत्महत्या के बढ़ते मामलों, कोचिंग सेंटरों में आग लगने की घटनाओं, बुनियादी सुविधाओं की कमी और वहां अपनाई जाने वाली शिक्षण पद्धतियों को लेकर लगातार शिकायतें मिल रही थीं। इन्हीं चिंताओं को ध्यान में रखते हुए यह पहल की गई है।

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