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दिल्ली हाईकोर्ट ने सीबीएसई को लगाई फटकार, बताया छात्र विरोधी

Mon, 14 Dec 2020 06:41 PM IST
Devesh Devesh एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: Devesh Devesh Updated Mon, 14 Dec 2020 06:41 PM IST
सार

  • मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल और न्यायमूर्ति प्रतीक जालान की पीठ ने की टिप्पणी 
  • हाईकोर्ट की खंडपीठ ने कहा- छात्रों को दुश्मन मान कोर्ट में घसीट रही सीबीएसई 
  • अगर पुनर्मूल्यांकन सुधार योजना सभी छात्रों पर लागू होती है तो नुकसान क्या है?

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delhi hc slams cbse for treating students as enemies
delhi high court

विस्तार

दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार को कड़ी टिप्पणी करते हुए केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड यानी सीबीएसई (CBSE) को छात्र विरोधी बताया है। न्यायालय ने कहा कि यह कुछ मामलों में सभी छात्रों को सर्वोच्च न्यायालय में घसीट कर उनसे दुश्मन के रूप में व्यवहार कर रहा है। दिल्ली हाईकोर्ट ने इस छात्र विरोधी रवैये के लिए सीबीएसई को फटकार भी लगाई है। 
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दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल और न्यायमूर्ति प्रतीक जालान की पीठ ने एकल न्यायाधीश के आदेश को चुनौती देने वाली बोर्ड की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की। फैसले में कहा गया था कि जिन छात्रों की कोविड-19 के कारण बोर्ड परीक्षा रद्द हो गई, उनके लिए भी सीबीएसई की पुनर्मूल्यांकन सुधार योजना लागू होगी। ऐसे छात्र भी पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन करने के योग्य होंगे। 
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CBSE, Delhi High Court

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CBSE - फोटो : social media
छात्र पढ़ाई करे या अदालत जाए
पीठ ने कहा, हम सीबीएसई के इस छात्र-विरोधी रवैये को पसंद नहीं कर सकते हैं। आप छात्रों को सर्वोच्च न्यायालय में घसीट रहे हैं। क्या उन्हें पढ़ाई करनी चाहिए या अदालत जाना चाहिए? हमें सीबीएसई से मामले की लागत वसूलना शुरू करना चाहिए। पीठ ने कहा, वे छात्रों को दुश्मन मान रहे हैं। पीठ ने आगे कहा कि अगर यह सुधार योजना सभी छात्रों पर लागू होती है, तो इसमें नुकसान क्या है? गौरतलब है कि एकल न्यायाधीश ने 14 अगस्त को कहा था कि कोविड-19 महामारी के आलोक में सीबीएसई परीक्षा रद्द करने के कारण छात्रों का आकलन करने के लिए उच्चतम न्यायालय द्वारा अनुमोदित योजना उन छात्रों पर भी लागू होगी, जो सुधार परीक्षाओं के लिए उपस्थित हुए थे, क्योंकि वे समान रूप से प्रभावित थे।

कोई भूचाल नहीं आने वाला
खंडपीठ ने कहा, आप के पास अदालत में आने के लिए कोई भी भूचाल आने वाली आपात स्थिति नहीं है। एकल न्यायाधीश ने कहा था कि नियमित छात्रों की तरह, जो लोग सुधार परीक्षा के लिए उपस्थित हुए थे, वे भी मूल्यांकन योजना के अनुसार स्कोर प्राप्त करने के लिए हकदार होंगे या जब भी सीबीएसई द्वारा वैकल्पिक परीक्षा आयोजित की जाएगी तो उसमें भाग ले सकेंगे। 

 

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दिल्ली हाईकोर्ट
ये है पूरा मामला
बता दें कि 14 अगस्त का आदेश एक छात्र संयम गुप्ता की याचिका पर आया था, जो फरवरी-मार्च 2018 में आयोजित सीबीएसई कक्षा 12 की परीक्षा में उपस्थित हुए था और 95.25 प्रतिशत अंक हासिल किए थे। इसके बाद, उसने अपने स्कोर में सुधार करने के लिए उसने एक साल ड्रॉप कर 2019 में फिर से अपीयर होने का फैसला किया। इसमें 24 मार्च को बिजनेस स्टडीज का पेपर कोरोना लॉकडाउन के कारण रद्द हो गया था। इस पर छात्र ने उच्च न्यायालय में याचिका लगाकर उच्चतम न्यायालय द्वारा अनुमोदित मूल्यांकन सुधार योजना के तहत आकलन की मांग की थी।

अब 05 फरवरी, 2021 को होगी सुनवाई :
इस पर 14 अगस्त, 2020 को उच्च न्यायालय ने सीबीएसई को छात्र को सही मार्कशीट जारी करने का निर्देश दिया। जिससे उसने दिल्ली विश्वविद्यालय के एक कॉलेज में दाखिला भी ले लिया। लेकिन अब सीबीएसई ने एकल न्यायाधीश के उस फैसले को चुनौती दी है। उच्च न्यायालय ने मामले को 05 फरवरी, 2021 को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है। साथ ही छात्र को नोटिस जारी सीबीएसई की याचिका पर उसका जवाब भी मांगा है। 
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