Visva Bharti Convocation: रक्षा मंत्री राजनाथ ने किया संबोधित, बोले- जल्द टॉप थ्री इकोनॉमी में शामिल होगा भारत
Visva Bharti Convocation:पश्चिम बंगाल में विश्व भारती विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने संबोधित किया।
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Visva Bharti Convocation: पश्चिम बंगाल में विश्व भारती विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शिरकत की। शुक्रवार को दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने विद्यार्थियों को आश्वस्त किया कि वह दिन दूर नहीं जब भारत दुनिया की शीर्ष अर्थव्यवस्थाओं में शामिल होगा। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि आप सभी ने हाल ही की मॉर्गन स्टेनली की रिपोर्ट देखी होगी, इस रिपोर्ट में कहा गया है कि अगले 4-5 साल में हमारे देश की अर्थव्यवस्था, दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी इकोनॉमी होने वाली है।
उन्होंने कहा कि हम इसी तरह से आगे बढ़ते रहे, तो वह दिन दूर नहीं जब हमारा भारत, दुनिया की टॉप इकोनॉमी में से एक होगा। हमारा देश, दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी इकोनॉमी के रूप में लगातार आगे बढ़ रहा है। रक्षा मंत्री ने कहा कि मुझे उम्मीद है कि 2047 तक हमारा देश थर्ड या सेकंड नहीं, बल्कि टॉप इकोनॉमी के रूप में दुनिया के सामने होगा। यह उपलब्धि, गुरुदेव को एक सच्ची श्रद्धांजलि होगी, ऐसा मेरा मानना है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि आज जब हम समाज से जातिगत भेदभाव के उन्मूलन का प्रयास कर रहे हैं, महिला सशक्तीकरण का निरंतर प्रयास कर रहे हैं, किसानों मजदूरों को सशक्त कर रहे हैं, तो यह सब भारतीय समाज और राजनीति दोनों को ही सशक्त करने का प्रयास है, और इसके पीछे गुरुदेवजी की ही प्रेरणा है। राजनाथ ने कहा कि ‘जेथा गृहेर प्राचीर, आपन प्रांगणतले, दिवस-शर्वरी वोशुधारे, राखे नाई खंडो क्षुद्रो कोरि। इसे हमारे यहां ‘वसुधैव कुटुंबकम’ भी कहा गया है; यानी संपूर्ण विश्व एक परिवार है, जहां अपने पराए का कोई भेद नहीं है, और समस्त जीवों में, जड़-चेतन में एक ही तत्व के वास की कल्पना की गई है।
Speaking at the Convocation Ceremony of Visva Bharti University in West Bengal. https://t.co/VWwk8cgqWC
— Rajnath Singh (@rajnathsingh) February 24, 2023
युवा पीढ़ी टैगोर के आदर्शों मूल्यों को अपनाएं
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने विश्व भारती को शिक्षा का मंदिर बताते हुए शुक्रवार को संस्थान के छात्रों से इसके संस्थापक रवींद्रनाथ टैगोर की तरह मानवतावादी बनने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि टैगोर के विचार और दर्शन भारतीय समाज को प्रभावित करते रहे हैं। सिंह ने यह भी कहा कि बंगाल में तीर्थयात्रा के दो केंद्र हैं, एक गंगा सागर और दूसरा विश्व भारती। छात्रों और संकाय सदस्यों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, टैगोर ने हमें दिखाया था कि राष्ट्रवाद क्षेत्रीय नहीं हो सकता। यह हमारी बहुलवादी संस्कृति पर आधारित होना चाहिए। उन्होंने बच्चों में मानवतावाद के मूल्यों को विकसित करने के लिए इस जगह की स्थापना की। उन्होंने छात्रों से जीवन में उल्लेखनीय काम करने और इस बारे में सोचने का आह्वान किया कि इससे देश को कैसे फायदा हो सकता है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि नई शिक्षा नीति 2020 से युवाओं का समग्र विकास होगा। उन्होंने कहा, एक बच्चे का भविष्य उसकी परवरिश पर निर्भर करता है। टैगोर का विश्व भारती हमें दिखाता है कि यह रास्ता कैसे होना चाहिए … जेल जैसे कमरों की सीमाओं से मुक्त, प्रकृति की गोद में। रक्षा मंत्री ने कहा, आप जीवन में जो भी बनें… वैज्ञानिक, इंजीनियर, सुधारवादी, सामाजिक वैज्ञानिक या कलाकार, आपको गुरुदेव के मूल्यों को अपनाना चाहिए। समाज सुधारक गोपाल कृष्ण गोखले के शब्दों ‘बंगाल जो आज सोचता है, भारत वह कल सोचता है’ को याद करते हुए सिंह ने कहा कि इस कथन को फिर से साकार करने की जरूरत है और इसकी जिम्मेदारी युवाओं के ऊपर ही है।
बंगाल में फिर जागृति की आवश्यकता
रक्षा मंत्री ने कहा, मैं समझता हूं आज बंगाल में फिर से जागृति की आवश्यकता है, जिससे यह भूमि एक बार फिर पूरे देश को ज्ञान-विज्ञान और दर्शन के क्षेत्र में नया योगदान दे सके। मुझे पूरा विश्वास है कि आप इस दिशा में पूरी प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि कवि, लेखक, संगीतकार और दार्शनिक टैगोर सामाजिक सुधारों और महिला सशक्तीकरण के माध्यम से परिवर्तन लाने में विश्वास करते थे।
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