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क्रैक NDA 2020 : NDA पुणे के वो वीर जवान जिन्होंने रचा इतिहास

Fri, 07 Aug 2020 03:29 PM IST
Jaya Tripathi एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: Jaya Tripathi Updated Fri, 07 Aug 2020 03:29 PM IST
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Crack NDA 2020: NDA Pune, the brave soldiers who created history
NDA - फोटो : अमर उजाला

भारतीय सेना दुनिया की चौथी सबसे बड़ी सेना है। भारतीय सैनिक बहादुरी और देशभक्ति की असल परिभाषा हैं। भारतीय सेना में कई ऐसे बहादुर जवान हुए हैं जिन्होंने देश का नाम रौशन किया है। जिन्हें देश के गौरव के रूप में याद किया जाता है। जिन्होंने हमारे देश की रक्षा के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए। NDA पुणे से भी कई ऐसे वीर जवान हुए जिन्होनें देश के युवाओं के लिए एक प्रेरणा का काम किया है। आज हम NDA पुणे से ट्रेनिंग लिए कुछ ऐसे ही सैनिकों की बात करेंगे। 

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1. मेजर सोमनाथ शर्मा 

  • मेजर सोमनाथ शर्मा को "बड़गाम की लड़ाई" में बहादुरी के लिए जाना जाता है। सोमनाथ शर्मा भारतीय सेना की कुमाऊं रेजिमेंट की चौथी बटालियन की डेल्टा कंपनी के कंपनी-कमांडर थे। जिन्होंने अक्टूबर-नवंबर, 1947 के भारत-पाक संघर्ष में अपनी वीरता से शत्रु के छक्के छुड़ा दिए थे। मेजर सोमनाथ शर्मा शहीद होने से पहले अपने बटालियन के जवानों के नाम प्रेरणादायक सन्देश छोड़ गए थे। 
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  • उन्होंने कहा था कि, दुश्मन हम से केवल 50 गज की दूरी पर हैं। हम गंभीर रूप से पीड़ित हैं। हम विनाशकारी आग के नीचे हैं। मैं एक इंच पीछे नहीं हटूंगा, अंतिम सांस तक लड़ूंगा!
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  • उन्हें भारत सरकार ने मरणोपरान्त परमवीर चक्र से सम्मानित किया। परमवीर चक्र पाने वाले वह प्रथम व्यक्ति हैं। 

2. कैप्टेन विक्रम बत्रा 

  • कैप्टेन विक्रम बत्रा 1999 के कारगिल युद्ध में अपनी वीरता के लिए जाने जाते हैं। कैप्टन विक्रम बत्रा को मरणोपरांत भारत के सर्वोच्च पुरस्कार परम वीर चक्र से सम्मानित किया गया। उनका जन्म 9 सितंबर 1974 को हुआ था। कैप्टेन विक्रम बत्रा साल 1999 के कारगिल युद्ध में देश के लिए शहीद हुए। उन्हें जम्मू-कश्मीर राइफल्स (13 JAK RIF) के 13 वीं बटालियन में लेफ्टिनेंट के रूप में नियुक्त किया गया था। एक बार जब वे अपने घर में होली की छुट्टियां मनाने आये थे तभी कारगिल के युद्ध के लिए उन्हें वापस बुला लिया गया था। वापस जाते वक़्त उन्होंने अपने परिवार से कहा था कि, "या तो मैं इस भारतीय तिरंगे को जीता कर आऊंगा या खुद इसमें लिपट कर आऊंगा। लेकिन मैं निश्चित रूप से वापस आऊंगा।" कैप्टेन विक्रम बत्रा को "शेर शाह" के नाम से भी जाना जाता है।
  • उन्होंने दुश्मन सेनाओं से लड़ाई लड़ी और भारत ने "टाइगर हिल्स" जीता। टाइगर हिल्स पर जीत दर्ज करते समय उन्होंने कहा था "ये दिल मांगे मोर!" जिसका अर्थ होता है ये दिल और ज्यादा चाहता है। हालांकि, उन्होंने अपने पीक पॉइंट 4875 पर कब्जा करते हुए जान का बलिदान कर दिया। देश के इस असली नायक के बिना कारगिल युद्ध नहीं जीता जा सकता था। 

3. मेजर संदीप उन्नीकृष्णन

  • मेजर संदीप उन्नीकृष्णन ने साल 1995 में NDA पुणे ज्वाइन किया था। उन्हें बिहार रेजिमेंट की 7 वीं बटालियन में लेफ्टिनेंट के रूप में नियुक्त किया गया था। उन्होंने नेशनल सेक्युरिटी गार्ड के स्पेशल टास्क फोर्स में काम किया था। मेजर संदीप उन्नीकृष्णन ने 2008 के मुंबई ताज होटल हमले में आतंकियों से लड़ते हुए अपने साहस का परिचय दिया था। ताज होटल के अंदर मौजूद आतंकवादियों से लड़ने के लिए कमांडो ऑपरेशन शुरू किया। इस दौरान उन्होंने 14 बंधकों को बचाया। साथ ही अपने टीम के एक  साथी की भी जान बचाई जो बुरी तरह से घायल हो गया था। 2008 के मुंबई हमलों के दौरान मेजर संदीप उन्नीकृष्णन ने जीवन का बलिदान दिया। उनके अंतिम शब्द थे, "ऊपर मत आओ, मैं उन्हें संभालूंगा।" उन्हें मरणोपरांत सर्वोच्च वीरता पुरस्कार अशोक चक्र से सम्मानित किया गया।

4. फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ 

  • फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ स्वतंत्र भारत के 8वें सेनाध्यक्ष थे। उन्हें IMA के पहले बैच में चुना गया। उनके बैच को "पायनियर्स" कहा जाता था क्योंकि उन्होंने तीन आर्मी चीफ़ की नियुक्ति की थी। उन्होंने 1971 के भारत-पाक युद्ध में सेना प्रमुख के रूप में नेतृत्व किया था।
  • फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ को 1971 में प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने युद्ध के बारे में बताया।  वह एक दूरदर्शी व्यक्ति थे इस दौरान उन्होंने कड़े शब्दों में कहा था, “अगर हमें अभी युद्ध करना है, तो मैं आपको 100% हार की गारंटी दे सकता हूं। क्या मैं अपने इस्तीफे में हस्ताक्षर करूं?" युद्ध के बाद उन्हें फील्ड मार्शल के पद पर पदोन्नत किया गया था। वे भारत के पहले फील्ड मार्शल थे। उन्हें पद्म भूषण, पद्म विभूषण, सामान्य सेवा पदक, भारतीय सेवा पदक और भारतीय स्वतंत्रता पदक जैसे कई सम्मानों से सम्मानित किया गया। 

5. विंग कमांडर अभिनंदन

  • विंग कमांडर अभिनंदन का जन्म 21 जून 1983 को तमिलनाडू के थिरुपनामूर में हुआ था। विंग कमांडर अभिनंदन एक भारतीय फाइटर पायलट हैं। उनका नाम पाकिस्तान पर 2019 एयर स्ट्राइक के दौरान सामने आया था। पाकिस्तान में उन्हें बंदी बनाया गया था। उनके वीडियो और चित्र व्हाट्सएप और विभिन्न अन्य सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर शेयर किए गए थे। उन्हें ढ़ाई दिन के लिए पाकिस्तान में बंदी बना लिया गया था। हालांकि, जिनेवा कन्वेंशन के तहत उन्हें जल्द ही रिहा कर दिया गया था। विंग कमांडर अभिनंदन को वीरता पुरस्कार वीर चक्र से सम्मानित किया गया था।
  • भारतीय सेना का इतिहास साहस और संकल्प से भरा हुआ है। हमारी मातृभूमि के वीर सपूतों ने भारत की लड़ाई लड़ते हुए कई कीर्तिमान स्थापित किये हैं।

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