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संविधान दिवस: 70 साल पहले बीआर आंबेडकर ने दी थी तीन चेतावनी

Tue, 26 Nov 2019 08:24 AM IST
रत्नप्रिया रत्नप्रिया एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: रत्नप्रिया रत्नप्रिया Updated Tue, 26 Nov 2019 08:24 AM IST
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Constitution Day 2019, Know warnings by BR Ambedkar 70 years ago on Samvidhan Diwas 2019
बीआर आंबेडकर (फाइल फोटो) - फोटो : PTI

भारत के संविधान (Constitution of India) को अंगीकृत हुए आज 70 साल पूरे हो गए हैं। 26 नवंबर 1949 को देश के संविधान को संविधान सभा द्वारा स्वीकार किया गया था। हालांकि ये संविधान स्वीकृति के दो महीने बाद 26 जनवरी 1950 को लागू किया गया था, जिसे गणतंत्र दिवस (Republic Day) के रूप में मनाया जाता है।

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संविधान की स्वीकृति और इसके क्रियान्वयन के बीच दो महीने का समय इसके अंग्रेजी से हिन्दी अनुवाद और अच्छी तरह पढ़ने के लिए लिया गया था।

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भारतीय संविधान की स्वीकृति से एक दिन पहले 25 नवंबर 1949 को.. जब संविधान सभा अपनी कार्यवाही पूरी कर रही थी, तब बीआर आंबेडकर ने एक भाषण दिया था। इस भाषण के अंत में उन्होंने भविष्य के लिए तीन चेतावनी दी थी।

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क्या थी वो तीन चेतावनी?

पहली चेतावनी

यह लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन के संबंध में थी। उन्होंने कहा था कि 'अगर हमें सिर्फ नियम के लिए नहीं, वास्तविकता में लोकतंत्र को बनाए रखना है, तो हमें विरोध के सभी तरीके छोड़ने होंगे। फिर चाहे वो सविनय अवज्ञा, असहयोग या सत्याग्रह के ही तरीके क्यों न हों। जहां सामाजिक और आर्थिक उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए सांवैधानिक तरीके मौजूद हों, वहां असंवैधानिक तरीकों की जरूरत नहीं। ये तरीके सिर्फ अराजकता के व्याकरण हैं और जितनी जल्दी हम इन्हें छोड़ दें, हमारे लिए उतना ही बेहतर होगा।'

दूसरी चेतावनी

यह भक्ति के संबंध में थी। आंबेडकर ने कहा था कि 'कोई महान व्यक्ति जिसने देश के लिए अपना जीवन समर्पित किया हो, देश की लंबे समय तक सेवा की हो, उसका आभारी होने में कुछ गलत नहीं है। लेकिन आभार की भी सीमा होती है। भारत में ये भक्ति (Hero Worship) राजनीति के क्षेत्र में इतना मजबूत खेल खेलती है जितना दुनिया के किसी और देश में नहीं है। धर्म में भक्ति आत्मा को मोक्ष दिलाने का मार्ग हो सकती है। लेकिन राजनीति में भक्ति तानाशाही और दुर्दशा की ओर ले जाती है।'

तीसरी चेतावनी

ये समानता के संबंध में थी। बीआर आंबेडकर ने कहा था कि '26 जनवरी 1950 को हम अंतर्विरोध के जीवन में प्रवेश करने जा रहे हैं। राजनीति में हमारे पास समानता होगी, लेकिन सामाजिक और आर्थिक जीवन में असमानता होगी। राजनीति में हम एक शख्स एक मत और एक मत एक मूल्य के सिद्धांत का अनुसरण करेंगे। लेकिन सामाजिक और आर्थिक संरचना में एक शख्स एक मूल्य को नकारेंगे। इस तरह अंतर्विरोध का जीवन कब तक जी पाएंगे?अगर हम सामाजिक और आर्थिक जीवन में समानता को लंबे समय तक नकारते रहे, तो ऐसा राजनीतिक लोकतंत्र को खतरे में डालकर ही होगा। इसलिए हमें जल्द से जल्द इस अंतर्विरोध को खत्म करना होगा। नहीं तो राजनीतिक लोकतंत्र की संरचना खत्म हो जाएगी।'

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