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Children's Day: नई पीढ़ी 'अक्षम' और दिल से गरीब बन रही है, तीन चीजों से इसे बदल सकते हैं

Thu, 14 Nov 2019 10:42 AM IST
रत्नप्रिया रत्नप्रिया सोनम वांगचुक, सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षाविद्
सोनम वांगचुक, सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षाविद् Published by: रत्नप्रिया रत्नप्रिया Updated Thu, 14 Nov 2019 10:42 AM IST
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Children's Day Special story Sonam Wangchuk write up on current and traditional education system
सोनम वांगचुक - फोटो : Social Media

आज बाल दिवस है। इस मौके पर प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षाविद् सोनम वांगचुक ने अमर उजाला के लिए लिखा। अपने लेख के जरिए देश-दुनिया को शिक्षा के सही मायनों के बारे में बताया है। सोनम वांगचुक वही शख्स हैं जिनसे प्रेरित होकर आमिर खान की फिल्म थ्री इडियट्स बनी थी। आगे पढ़ें, उन्होंने शिक्षा के बारे क्या-क्या कहा...

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ऐसा कहना गलत होगा कि जो भी परंपरागत है, वह सही नहीं है। हमारी परंपरागत पढ़ाई गुरुकुल आधारित थी जो हर दृष्टि से उत्कृष्ट थी। लेकिन फिर बीच में हम कहीं भटक गए। अभी जो स्कूल वगैरह चल रहे हैं, उनमें हर चीज किताबी है। शिक्षा किताबी है, डिग्रीयां किताबी हैं और इनसे मिलने वाली जो समझ है, वह भी किताबी है। हमारी शिक्षा पद्धतियों के साथ सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि इससे दिमाग का हुनर नहीं मिलता। 

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हमारे यहां बोलने वालों की कमी नहीं। खूब बोलते हैं, लेकिन करते कुछ भी नहीं। यह हमारी शिक्षा व्यवस्था की कमी है कि यह हमें कुछ नया व रचनात्मक करने योग्य नहीं बनाती। 

किन तीन चीजों में बदलनी चाहिए शिक्षा

हमारी परंपरागत शिक्षा तीन बिंदुओं - रीडिंग, राइटिंग और अर्थमैटिक पर आधारित है। इसमें पढ़ने, लिखने और कुछ गणितीय योग्यताओं पर जोर दिया जाता है। इसे तीन एच (हेड, हैंड्स, हार्ट) में बदलने की जरूरत है। शिक्षा ऐसी होनी चाहिए जो समझ बढ़ाए। कौशलयुक्त बनाए और दिल से अमीर बनाए।

वर्तमान शिक्षा से जो पीढ़ी निकल रही है, वह सही मायनों में रचनात्मक न होकर 'अक्षम' है। लोग दिल से गरीब हैं। केवल एक-दूसरे पर हावी होने की कोशिश कर रहे हैं। इसे ही वे स्वस्थ प्रतिस्पर्धा कहते हैं। लेकिन स्वस्थ समाज का निर्माण प्रतिस्पर्धा से नहीं, बल्कि सामूहिक सहयोग से संभव है। हमारे देश को कौशलयुक्त लोगों की जरूरत है। शिक्षा की इसमें बड़ी भूमिका है।

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कैसी होनी चाहिए शिक्षा

शिक्षा ऐसी होनी चाहिए जो लोगों को कुशल व खुले दिल वाला बनाए। मैं ऐसी शिक्षा पद्धति को 'एजुकेशन ऑफ हार्ट' कहूंगा। हमें ऐसे समाज की जरूरत है, जहां लोग एक-दूसरे के प्रति सहानुभूति रखते हों। अगर आप आंत्रप्रेन्योर हैं या फिर अपना बिजनेस करना चाहते हैं, तो पैसा कमाने के लिए मत कीजिए। किसी समस्या का समाधान बनने की कोशिश कीजिए। किसी खाली जगह को भरने की कोशिश कीजिए।

इसके लिए लोगों को अपनी सोच बदलनी पड़ेगी। भेड़चाल को नकारना होगा। जनता की सोच बदलेगी तभी सरकार की नीतियों में जरूरी बदलाव आ सकेंगे।  

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