आज के दौर में शिक्षा का मतलब केवल किताबों की दुनिया तक ही सीमित रह जाना नहीं है। दुनियाभर में जिस तरह से मानवीय गतिविधियों में बदलाव आए हैं, उन्हें देखते हुए हमारी नई पीढ़ी को कुछ नए तरीके से शिक्षा प्रदान करने की जरूरत है। ताकि वे व्यवहारिकता के साथ अपनी समझ विकसित कर सकें और नए विचारों व आविष्कारों को जन्म दे सकें। हमारे देश में भी कुछ शिक्षण संस्थानों ने नवाचार का बीड़ा उठाया है।
Children's Day: इन स्कूलों में बेहद दिलचस्प है पढ़ाई का तरीका, छुट्टियों पर भी पहुंच जाते हैं बच्चे
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
लामतापूत उच्च प्राथमिक विद्यालय, ओडिशा
इस स्कूल के शिक्षक प्रफुल्ल कुमार पाथी का नाम न केवल बच्चों में लोकप्रिय है, बल्कि पूरे देश में भी चर्चित रहा है। उन्होंने स्कूल में बच्चों को पढ़ाने का नायाब तरीका निकाला। वे बच्चों को डांस करते हुए पढ़ाते हैं। इससे बच्चों की भी रुचि बनी रहती है। इस कारण बच्चे तुरंत सीखते हैं और अगले चैप्टर को तैयार करने में भी रुचि लेते हैं।
उनके इस नायाब तरीके का वीडियो वायरल होने के बाद स्कूल का नाम भी पूरे देश को पता चला। इस कारण स्कूल आने वाले बच्चों की संख्या में इजाफा हुआ है और स्कूल छोड़ने वाले बच्चों की संख्या कम हुई है।
हमालयन पब्लिक स्कूल, रोहडू
शिमला स्थित हिमालयन पब्लिक स्कूल में बच्चों को पढ़ाने के लिए रोबोट का इस्तेमाल किया जा रहा है। बच्चे क्लास में सवाल पूछते हैं और रोबोट झटपट उनके सही-सही जवाब दे देता है।
भारत सरकार द्वारा नीति आयोग के सहयोग से स्कूल में एक रोबोटिक प्रयोगशाला स्थापित की जा रही है। ऐशा पहली बार है कि रोबोट के सहयोग से हिमालयन पब्लिक स्कूल में पढ़ाई शुरू की गई है। प्रोजेक्ट इस बार को ध्यान में रखकर शुरू किया गया है कि बच्चों के सीखने की क्षमता पर रोबोट तकनीक का कितना प्रभाव होता है। अगर यह कारगर रहा तो स्कूल की सभी कक्षाओं को रोबोटिक तकनीक से लैस किया जाएगा।
प्राथमिक विद्यालय, चित्रकूट
इस स्कूल में पढ़ाई को लेकर लोग इतने संजीदे हैं कि यहां देर शाम तक एक्स्ट्रा क्लास भी चलाई जाती है। अबी स्कूल में एक प्राचार्य, एक सहायक शिक्षक और एक शिक्षा मित्र हैं। 100 से ज्यादा बच्चे पंजीकृत हैं। शायद ही कोई दिन ऐसा हो जब यहां बच्चों की उपस्थिति 100 से नीचे जाती हो। यह स्कूल नयापुरवा शहर से हटकर देवांगना घाटी के ऊपर छोटे से गांव दादरी में स्थित है।
आविष्कार सेंटर ऑफ साइंस, पालमपुर
हमाचल प्रदेश के पालमपुर स्थित इस स्कूल के बच्चे छुट्टी वाले दिन का इंतजार खेलने या मस्ती करने के लिए नहीं, बल्कि कुछ खास करने के लिए करते हैं। दरअसल, इस स्कूल में बच्चों को वीकेंड में विज्ञान की पढ़ाई कराई जाती है। वह भी रचनात्मक तरीके से।
दो खास शिक्षकों की बात करते हैं - संध्या और शरत। ये दोनों पीएचडी होल्डर हैं और 20 साल तक अमेरिका में रहकर आए हैं। यहां के हालात ठीक करने के लिए उन्होंने अपनी छह साल की बेटी को पहल सरकारी स्कूल में दाखिला दिलाया। फिर खुद भी आविष्कार सेंटर मैथ्स एंड टेक्नोलॉजी में बच्चों को मॉडल्स के जरिए पढ़ाते हैं। इसन्हें देककर कई विदेशी भी आविष्कार से जुड़ रहे हैं।
ये भी पढ़ें : करोड़पति शख्स ने मांजे बर्तन, आनंद महिंद्रा ने अपनी कंपनी में दिया ऑफर
कमेंट
कमेंट X