Tezpur University: तेजपुर यूनिवर्सिटी का बड़ा फैसला, प्रोफेसर अमरेंद्र दास को नियुक्त किया प्रो-वाइस चांसलर
Tezpur University: केंद्र सरकार ने तेजपुर विश्वविद्यालय संकट की जांच के लिए उच्चस्तरीय समिति गठित की है। इस बीच प्रो अमरेंद्र कुमार दास को प्रो-वाइस चांसलर नियुक्त किया गया है। कुलपति को जांच पूरी होने तक अवकाश पर भेजा गया है।
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Tezpur University: केंद्र सरकार ने असम के तेजपुर विश्वविद्यालय में जारी संकट को लेकर बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। शिक्षा मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग द्वारा जारी आधिकारिक आदेश के अनुसार प्रो अमरेंद्र कुमार दास को तेजपुर विश्वविद्यालय का प्रो-वाइस चांसलर नियुक्त किया गया है। वह अगले आदेश तक इस पद का कार्यभार संभालेंगे। यह नियुक्ति सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति से की गई है।
आदेश में स्पष्ट किया गया है कि प्रो अमरेंद्र कुमार दास की सेवा की शर्तें तेजपुर विश्वविद्यालय अधिनियम, उसके स्टैच्यूट और ऑर्डिनेंस के अनुसार संचालित होंगी। यह आदेश 31 दिसंबर 2025 को जारी किया गया है, जिसकी प्रतियां विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार, आईआईटी गुवाहाटी, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC), एसोसिएशन ऑफ इंडियन यूनिवर्सिटीज (AIU) सहित संबंधित प्राधिकरणों को भेजी गई हैं। केंद्र सरकार का मानना है कि इस नियुक्ति से पूर्वोत्तर की प्रमुख केंद्रीय विश्वविद्यालयों में शामिल तेजपुर विश्वविद्यालय में शैक्षणिक और प्रशासनिक नेतृत्व को मजबूती मिलेगी।
विश्वविद्यालय संकट की जांच के लिए उच्चस्तरीय समिति गठित
इसी बीच केंद्र सरकार ने तेजपुर विश्वविद्यालय में उत्पन्न हालात और लगाए गए आरोपों की जांच के लिए तीन सदस्यीय उच्चस्तरीय जांच समिति का गठन किया है। यह निर्णय तेजपुर विश्वविद्यालय अधिनियम, 1993 की धारा 9 के तहत लिया गया है। शिक्षा मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग द्वारा जारी कार्यालय ज्ञापन में इस समिति की जानकारी दी गई है।
कुलपति को तत्काल प्रभाव से अवकाश पर भेजा गया
आदेश के तहत तेजपुर विश्वविद्यालय के कुलपति शंभुनाथ सिंह को सभी आधिकारिक दायित्वों से स्वयं को अलग करने और तत्काल प्रभाव से अवकाश पर जाने का निर्देश दिया गया है। वह जांच प्रक्रिया पूरी होने तक अवकाश पर ही रहेंगे।
जांच समिति को पहले चांसलर कार्यालय को सौंपी गई फैक्ट फाइंडिंग कमेटी की रिपोर्ट के निष्कर्षों और सिफारिशों की विस्तृत जांच करने की जिम्मेदारी दी गई है। इसके साथ ही समिति उन परिस्थितियों की भी समीक्षा करेगी, जिनके चलते विश्वविद्यालय में वर्तमान संकट उत्पन्न हुआ, जिसमें विभिन्न पदाधिकारियों के इस्तीफे और प्रभार परिवर्तन जैसे मुद्दे शामिल हैं।
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