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भारत सरकार के समर्थन से बर्मिघम विश्वविद्यालय में गुरु नानक पीठ की हुई शुरुआत
Sun, 03 Nov 2019 04:31 AM IST
Mohit Mudgal
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
Published by: Mohit Mudgal
Updated Sun, 03 Nov 2019 04:31 AM IST
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हरदीप सिंह पुरी, केंद्रीय मंत्री
- फोटो : File Photo
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केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने बर्मिंघम विश्वविद्यालय में नई गुरु नानक पीठ की शुरुआत की। इसका मकसद सिख धर्म के संस्थापक गुरू नानक से जुड़ी शिक्षाओं को लेकर शोध को बढ़ावा देने का है। भारत सरकार के समर्थन से स्थापित इस पीठ की शुरूआत की घोषणा हरदीप पुरी ने गुरु नानक देव की 550वीं जयंती के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में की है।
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केंद्रीय मंत्री बर्मिंघम विश्वविद्यालय में गुरु नानक की शिक्षाओं की समकालीन प्रासंगिकता पर एक वार्षिक व्याख्यान देने पहुंचे थे। विश्वविद्यालय के भारतीय संस्थान ने शुक्रवार को इस कार्यक्रम का आयोजन किया था। कार्यक्रमको संबोधित करते हुए हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि अकादमिक पाठ्यक्रमों के लिए गुरु नानक की शिक्षाओं के अनुसंधान और प्रसार का समर्थन करने के उद्देश्य से बर्मिंघम विश्वविद्यालय में भारत सरकार समर्थित गुरु नानक पीठ की शुरुआत की औपचारिक घोषणा करते हुए मुझे बहुत खुशी हो रही है।
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उन्होंने कहा कि मुझे विश्वास है कि गुरु नानक पीठ आगे और शोध करेगी कि कैसे गुरु नानक के संदेश को ब्रिटेन और उसके बाहर साझा किया जा सकता है और इस संदेश से मानव जाति को कैसे फायदा पहुंच सकता है, जिसमें हमारे विश्व को बेहतर स्थान बनाने के शाश्वत मूल्य है।
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केंद्रीय नागरिक उड्डयन राज्यमंत्री पुरी ने कहा कि उन्हें विश्वास था कि नए अध्यक्ष गुरु नानक की शिक्षाओं के प्रसार में व्यापक रूप से मदद करेंगे। उन्होंने कहा कि गुरु नानक ने सिख धर्म के मूल सिद्धांतों की स्थापना की और प्रभावी ढंग से सार्वभौमिक शांति और भाईचारे का संदेश फैलाने में मदद की।
यह पीठ गुरु नानक की 550 वीं जयंती को चिह्नित करने के लिए बर्मिंघम विश्वविद्यालय में होने वाले कार्यक्रमों की एक श्रृंखला का हिस्सा है। विश्वविद्यालय के कुलपति, भारतीय मूल के सहकर्मी भगवान करण बिलिमोरिया और बर्मिंघम के महावाणिज्य दूत डॉ. अमन के बीच वार्ता के बाद इसे अंतिम रूप दिया गया है। इस साल 12 नवम्बर को गुरु नानक की 550वीं जयंती है, जिसके मद्देनजर उनके सम्मान में विश्व भर में कई समारोह आयोजित किए जा रहे हैं।
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