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सीबीएसई कक्षा 10 : अंक गणना पर दिल्ली हाईकोर्ट में नौ जुलाई को होगी सुनवाई

Mon, 05 Jul 2021 07:28 PM IST
देवेश शर्मा एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: देवेश शर्मा Updated Mon, 05 Jul 2021 07:28 PM IST
सार

दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार को सीबीएसई से संबद्ध स्कूलों के 10वीं कक्षा के छात्रों के अंकों की गणना से संबंधित एक याचिका पर नौ जुलाई को सुनवाई के लिए सहमति जता दी है।

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CBSE Result : Delhi HC Agrees To Hear On July 9 Plea On Calculation Of Class 10 CBSE Marks
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विस्तार

दिल्ली उच्च न्यायालय सोमवार को सीबीएसई से संबद्ध स्कूलों के 10वीं कक्षा के छात्रों के अंकों की गणना से संबंधित एक याचिका पर नौ जुलाई को सुनवाई के लिए सहमत हो गया। इस मामले में सुनवाई की तारीख 28 अगस्त तय थी, लेकिन एनजीओ, जस्टिस फॉर ऑल ने जल्द सुनवाई के लिए एक आवेदन दिया था। इस पर उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस डीएन पटेल और जस्टिस ज्योति सिंह की खंडपीठ ने इसे जल्द सुनवाई के लिए नौ जुलाई को निर्धारित कर दिया है। 

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एनजीओ की ओर से याचिका में सीबीएसई के 10वीं कक्षा के छात्रों के लिए मार्किंग स्कीम में ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को सबसे बड़े कारक के रूप में इस्तेमाल करने का एक गंभीर मुद्दा उठाया गया था। अधिवक्ता खगेश झा ने अदालत से कहा कि मेरे अंक इस बात पर निर्भर करेंगे कि मेरे वरिष्ठों ने कैसा प्रदर्शन किया है। एनजीओ ने यह भी कहा कि एक बार छात्रों के अंक अपलोड करने और परिणाम तैयार करने की प्रक्रिया समाप्त हो जाने के बाद याचिका बेकार हो जाएगी। 
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इसके साथ ही, अदालत नौ जुलाई को निजी स्कूलों की एक पंजीकृत सोसाइटी, एनआईएसए एजुकेशन की याचिका पर भी सुनवाई करेगी। इस याचिका सीबीएसई के 10वीं कक्षा के छात्रों के मूल्यांकन के लिए एक परिणाम समिति के गठन को लेकर है। सोसाइटी ने चिंता जताई थी कि चूंकि परिणाम समिति के सदस्यों और स्कूल के अन्य संकाय और कर्मचारियों को विचार-विमर्श के लिए शारीरिक रूप से उपस्थित होने की आवश्यकता होगी, इसलिए कोविड-19 महामारी के कारण स्वास्थ्य के लिए एक वास्तविक खतरा पैदा हो सकता है। सोसाइटी के वकील रवि प्रकाश गुप्ता ने तर्क दिया कि यदि परिणाम घोषित होने से पहले याचिका पर सुनवाई नहीं की गई तो यह अर्थहीन हो जाएगी।

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वहीं, सीबीएसई के वकील रूपेश कुमार ने अदालत को बताया कि सोसाइटी की याचिका में कुछ भी नहीं बचा है, क्योंकि अधिकांश स्कूलों ने अपने छात्रों के अंक पहले ही अपलोड कर दिए हैं। कुमार ने कहा, उनका मामला लॉकडाउन के मद्देनजर है, परिणाम समिति का गठन नहीं किया जा सकता है। 21,000 स्कूल हैं। सिर्फ 62 स्कूल के अंक अपलोड करने के लिए शेष हैं। याचिका अर्थहीन है। 
 

इससे पहले, उच्च न्यायालय ने 02 जून को एनजीओ की याचिका पर केंद्र, दिल्ली सरकार और सीबीएसई से जवाब मांगा था, जिसमें दावा किया गया था कि स्कूलों द्वारा आंतरिक मूल्यांकन के आधार पर कक्षा 10वीं के छात्रों के अंकों की गणना के लिए बोर्ड की नीति असंवैधानिक थी और इसे संशोधित करने की आवश्यकता थी। अपनी याचिका में, एनजीओ ने कहा है कि स्कूल के पिछले औसत परिणाम के प्रदर्शन के आधार पर स्कूल द्वारा मूल्यांकन किए गए औसत अंकों को स्कूल के सर्वश्रेष्ठ समग्र प्रदर्शन के संदर्भ में मॉडरेट करने की नीति अन्याय होगी। स्कूल के पिछले औसत परिणाम प्रदर्शन से, इस बार छात्रों के औसत परिणाम का किसी भी तरह से संबंध नहीं होना चाहिए। एनजीओ ने आरोप लगाया है कि इससे अंकों में हेराफेरी और छात्रों और अभिभावकों का शोषण, रंगदारी भी हो सकती है।

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