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Hindi News ›   Education ›   CBSE: Class 10 Exams Twice a Year May Extend Session to 14 Months, Parents May Face Fee Burden

CBSE: दसवीं की परीक्षाएं दो बार होने पर 14 माह का हो जाएगा सत्र, अभिभावकों पर बढ़ेगा फीस का बोझ

Sun, 02 Mar 2025 08:44 AM IST
शाहीन परवीन एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: शाहीन परवीन Updated Sun, 02 Mar 2025 08:44 AM IST
सार

CBSE Board: सीबीएसई दसवीं कक्षा की परीक्षाएं साल में दो बार कराई जाती हैं, तो इससे शैक्षणिक सत्र की कुल अवधि बढ़कर 14 महीने हो जाएगा। इससे अभिभावकों को फीस देने में परेशानी हो सकती है।

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CBSE: Class 10 Exams Twice a Year May Extend Session to 14 Months, Parents May Face Fee Burden
CBSE Rule Change - फोटो : CBSE

विस्तार

CBSE Board: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) अगले साल से दसवीं की परीक्षाएं दो बार कराने पर विचार कर रहा है। बोर्ड की ओर से इसके लिए मसौदा तैयार कर फीडबैक के लिए जारी कर दिया गया है। इस पर स्कूल अपने-अपने सुझाव दे रहे हैं। स्कूलों के अनुसार, दो बार परीक्षाएं होने से न केवल एक शैक्षणिक सत्र लंबा हो जाएगा, बल्कि स्कूलों व शिक्षकों पर भी दबाव बढ़ जाएगा। वहीं सत्र लंबा होने पर अभिभावकों को फीस देने में परेशानी होगी।

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कई स्कूल दो बार परीक्षाओं की बजाय सेमेस्टर परीक्षाओं की वकालत कर रहे हैं। इससे ही छात्रों के सिर से तनाव कम हो सकता है। सेमेस्टर परीक्षाओं में भी पाठ्यक्रम आधा-आधा होना चाहिए, जबकि अभी जो मसौदा तैयार किया गया है उसमें दोनों बार परीक्षाओं में पूरे-पूरे पाठ्यक्रम से प्रश्न पूछे जाएंगे।

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रोहिणी स्थित माउंट आबू स्कूल की प्रिंसिपल ज्योति अरोड़ा ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 से जोड़ते हुए दसवीं की परीक्षाएं दो बार आयोजित करने का फैसला सही है, क्योंकि छात्रों के दबाव को कम करने के लिए कोई न कोई तरीका निकाला जाना जरूरी है, लेकिन इस व्यवस्था में परीक्षाओं की प्रक्रिया को आसान करना पड़ेगा, क्योंकि इस व्यवस्था से एक शैक्षणिक सत्र 14 माह का हो जाएगा। सीबीएसई की ओर से जारी ड्राफ्ट में पहले परीक्षाएं फरवरी व मार्च व दूसरी मई में आयोजित करने की बात कही गई है। इससे सत्र लंबा हो जाएगा।

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ज्योति अरोड़ा के अनुसार, इस व्यवस्था में स्कूल व शिक्षक काफी व्यस्त रहेंगे। इससे दूसरी कक्षाओं के दाखिले व परीक्षाओं पर असर पड़ेगा। इससे शिक्षकों को मिलने वाली छुट्टियां भी कम हो जाएंगी। हमारा मानना है कि स्किल सब्जेक्ट के लिए प्रैक्टिकल भाग को ज्यादा किया जाए। उन्होंने कहा कि मसौदे पर नौ मार्च तक सुझाव देने हैं, जल्द स्कूल की तरफ से सुझाव भेज दिए जाएंगे।

अभिभावकों को फीस देने में होगी परेशानी

मयूर विहार स्थित विद्या बाल भवन स्कूल के प्राचार्य डॉ. सतवीर शर्मा ने कहा कि सीबीएसई ने जो दो बार परीक्षाएं कराने की बात रखी है, वह छात्रों के हिसाब से सेमेस्टर परीक्षाओं के रूप में होनी चाहिए।

सेमेस्टर परीक्षाओं में आधा-आधा पाठ्यक्रम होगा तो छात्रों का तनाव कम होगा। कोविड के दौरान यह व्यवस्था अपनाई गई थी। पूरे साल पढ़ने के बाद भी छात्रों पर फरवरी तक दबाव हावी रहता है और मई में दोबारा परीक्षाएं होंगी तो वह दो महीने में कैसे सालभर की पढ़ाई को पूरा कर लेंगे। यदि वह पहले प्रयास में पास नहीं होते तो दूसरी बार में पूरे पाठ्यक्रम के साथ उनका तनाव बढ़ जाएगा।

डॉ. शर्मा के अनुसार फरवरी में बोर्ड परीक्षाओं के लिए एडमिट कार्ड जारी होने के बाद छात्रों का संपर्क स्कूल से छूट जाता है। ऐसे में यदि स्कूल छात्रों को मई की परीक्षाओं की तैयारी के लिए बुलाएंगे तो वह पाठ्यक्रम पूरा करने के लिए नहीं आएंगे। इस दौरान की फीस स्कूल लेंगे तो अभिभावक लंबे सत्र की फीस देने में हिचकिचाएंगे। बोर्ड को चाहिए कि वह जो भी फैसला ले, वह छात्रों के हित में हो। उनके अनुसार इस व्यवस्था से 10वीं में स्कूल छोड़ने वाले छात्रों की संख्या बढ़ सकती हैं। उन्होंने बोर्ड के मसौदे पर अपने सुझाव भेज दिए हैं। इससे शिक्षकों पर काम का बोझ बढ़ जाएगा। 

शिक्षकों को फरवरी में बोर्ड की कॉपियों का मूल्यांकन करना होगा, फिर वह मार्च में बाकी कक्षाओं की वार्षिक परीक्षाएं आयोजित करेंगे और उत्तर पुस्तिकाओं की जांच करेंगे, फिर मई में दूसरी बार बोर्ड परीक्षाओं को देखना होगा। इससे परीक्षा प्रणाली लंबी हो जाएगी। एक अन्य स्कूल के प्रिंसिपल ने कहा कि दसवीं परीक्षा का मसौदा छात्र-छात्राओं के तनाव को कम करने वाला है। इसमें कई विकल्प है, जिससे परीक्षाओं का दबाव कम होगा।

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