जी-हुजूरी बड़े काम की चीज है। नौकरी हो या आम जिंदगी, जी-हुजूरी कर के आप बहुत से काम निकाल सकते हैं। तरक्की पा सकते हैं। पैसे कमा सकते हैं। दफ्तरों में ज्यादातर लोग इस नुस्खे पर अमल करते हैं। बॉस या सीनियर की बात पर फौरन हामी भर कर लोग मुकाबले में आगे निकल जाते हैं। हां-हुजूरी करने वालों के मुकाबले वो लोग जो बागी कहलाते हैं, जो हर बात पर हामी नहीं भरते। बॉस की राय से हमेशा इत्तेफाक नहीं रखते वो दफ्तर में अक्सर हाशिए पर पड़े होते हैं।
दम है तो चापलूसी छोड़ बागी हो जाइए, इस वजह से 155 लोगों की जान बचाने में कामयाब हुआ एक शख्स
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फ्रांसेस्का गिनो कहती हैं कि दफ्तर में आप भेड़ों यानि जी-हुजूरी करने वालों की भीड़ का हिस्सा मत बनिए। आप में काबिलियत है तो धारा के विपरीत तैरने में भी लुत्फ है। भीड़ से अलग दिखना भी तरक्की का एक तरीका हो सकता है। फ्रांसेस्का का कहना है कि जब हम हर बात पर हामी भरते हैं तो सत्ताधारी जमात का हिस्सा बन जाते हैं।
ऐसा लगता है कि हमारी हस्ती को मंजूरी मिल गई है। इससे अच्छा महसूस होता है। लेकिन इसका दूसरा पहलू ये भी है कि इससे बहुत जल्द बोरियत भी हो जाती है। आप धीरे-धीरे कटा हुआ सा महसूस करते हैं। बहती हवा के साथ अपना रुख मोड़ना आसान है। मगर इससे आप को सारा माहौल बनावटी लगने लगता है।
अगर आप ये समझते हैं कि आप के अंदर प्रतिभा है, तो बागी हो जाइए। जी-हुजूरी करने वालों की जमात से अलग होकर कुछ कीजिए। फ्रांसेस्का सेलेब्रिटी शेह मासिमो बोतुरा की मिसाल देती हैं। वो कहती हैं कि मासिमो जब काम करने के लिए रेस्तरां पहुंचते हैं तो शेफ का लिबास पहनने के बाद झाड़ू उठाते हैं। वो बाहर निकल कर झाड़ू देने लगते हैं। देखने वालों पर इसका गहरा मनोवैज्ञानिक असर पड़ता है। जो लोग शेफ बोतुरा को झाड़ू लगाते देखते हैं उनके जहन में दो सवाल उठते हैं। पहला तो ये कि आखिर शेफ झाड़ू क्यों लगा रहा है? दूसरा सवाल देखने वाले खुद से करते हैं कि अगर शेफ साफ-सफाई कर सकता है, तो वो क्यों नहीं कर रहे ये काम?
अगर आपके अंदर एक बागी बसता है, तो आप उसकी मदद से हमेशा एक नया नज़रिया बनाने की कोशिश करें। लीक पर चलने के बजाय अलग करने की सोचें। फ्रांसेस्का इसकी मिसाल के तौर पर कैप्टन सली सलेनबर्गर का नाम लेती हैं। सलेनबर्ग न्यूयॉर्क की हडसन नदी में विमान उतार कर चर्चा में आए थे। जब जहाज का इंजन फेल हुआ और हालात बेकाबू हुए, तो सलेनबर्ग ने लीक से अलग हटकर चलने की ठानी और विमान को पानी में उतार दिया।
चिंता और तनाव के माहौल में भी कैप्टन सलेबर्ग ने अपने अंदर के बागी से काम लिया और वो किया जो आम तौर पर कोई पायलट नहीं करता लेकिन अलग करने की वजह से कैप्टन सलेनबर्ग विमान में सवार सभी 155 मुसाफिरों की जान बचाने में कामयाब हुए। बागियों के बारे में अक्सर ये सोच रहती है कि वो दफ्तर के काम-काज और माहौल के लिए ठीक नहीं हैं लेकिन, फ्रांसेस्का कहती हैं कि बागियों की मौजूदगी दफ्तर को जिंदादिल बनाती है। उनका खिलंदड़पन, दूसरे लोगों से बात-चीत के बाद उनमें उत्साह भरता है। ऑफिस में अगर आप भी अब तक जी-हुजूरी गैंग में रहे हैं, तो शायद ये बिल्कुल सही वक्त है खुद को बागी बनाकर हुजूम से अलहदा खड़ा करने का।
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