बीएचयू: कोर्स और हॉस्टल में दाखिले के नियम अलग, कंपोजिट मेरिट से आवंटित होगा; जानें खास
हॉस्टल आवंटन को लेकर ओवदक मेरिट का इंतजार कर रहे हैं। इस बार राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (एनटीए) की ओर से आयोजित सीयूईटी में मिले स्कोर का ध्यान रखा जाएगा।
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Varanasi News: बीएचयू में विभागीय कोर्स और हॉस्टल में दाखिले के नियम अलग हैं। इनके लिए दो अलग-अलग मेरिट व्यवस्था है। 10 से 15 दिनों के बाद कंपोजिट विधा के आधार पर हॉस्टल आवंटन की मेरिट निकाली जाएगी।
इसमें एनटीए की ओर से आयोजित सीयूईटी में मिले स्कोर के साथ ही उनके घर से दूरी का भी मूल्यांकन किया जाएगा। जिनका घर 100 किमी से ज्यादा दूर होगा, उन्हें इस मेरिट में स्थान दिया जाएगा। जिनके घर की जितनी ज्यादा दूरी होगी, उन्हें हॉस्टल मिलने की संभावना उतनी ज्यादा होगी।
बृहस्पतिवार को स्नातक में प्रवेश पाने वालों का फिजिकल वेरिफिकेशन शुरू हो गया। वेरिफिकेशन एक सितंबर तक चलेगा। इस बीच बाकी चार दिनों को मिलाकर 10 हजार से ज्यादा छात्र-छात्राएं वेरिफिकेशन के लिए संकाय में पहुंचेंगे। दस्तावेजों के सत्यापन तक उन्हें शहर में ही रहना होगा। वहीं, हॉस्टल आवंटन के लिए छात्र-छात्राओं को दोबारा आना होगा।
कई छात्रों का कहना है कि आईआईटी बीएचयू की तर्ज पर बीएचयू में भी फिजिकल वेरिफिकेशन के पहले ही दिन हॉस्टल आवंटित किया जा सकता है। लेकिन, यहां पर कंपोजिट मेरिट निकालने में थोड़ा वक्त लग जाता है। छात्रों का कहना है कि विवि के पास सभी डेटा होते हैं। स्कोर भी और छात्र-छात्राओं के घर का पता भी। ऐसे में हॉस्टल में कमरे उसी के अनुसार बुक कर दिया जाना चाहिए।
पोर्टल पर आवंटित हो हॉस्टल
बीएचयू के शोध छात्र अभय प्रताप सिंह ने कहा कि हॉस्टल एलॉटमेंट में देरी होना बड़ी मुसीबत है। जिस दिन दाखिले की फीस जमा होती है, उसी दिन उसी पोर्टल पर हॉस्टल भी आवंटित कर देना चाहिए। अब फिजिकल वेरिफिकेशन के लिए आएंगे तो छात्र कहां रुकेंगे। मजबूरी में महंगे चार्ज पर शहर में रहने को मजबूर होंगे।
कला संकाय में 10 से ज्यादा हेल्प डेस्क
फिजिकल वेरिफिकेशन में जाने वाले छात्रों की मदद के लिए बीएचयू के हर संकाय में जगह-जगह हेल्प डेस्क बनाए गए हैं। सबसे ज्यादा कला संकाय में 10 हेल्प डेस्क हैं। एबीवीपी के इकाई अध्यक्ष प्रशांत राय ने कहा कि सुबह 10 बजे से दोपहर दो बजे तक बड़ी संख्या में आए अभ्यर्थियों ने अपना फिजिकल वेरिफिकेशन करा लिया। जबकि जिनके पास दस्तावेज नहीं था उन्हें अंडर टेकिंग के बारे में समझाया गया। उन्होंने भी विभागों में जमा कर बाद में दस्तावेज जमा करने की बात कही।
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