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Hindi News ›   Education ›   Annual IC3 Conference and Expo 2024 Report on student suicide; Its rate is higher than population growth

IC3 Report: देश में जनसंख्या वृद्धि से अधिक है छात्र आत्महत्या की दर, रिपोर्ट में हुआ चिंताजनक खुलासा

Wed, 28 Aug 2024 06:49 PM IST
आकाश कुमार एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: आकाश कुमार Updated Wed, 28 Aug 2024 06:49 PM IST
सार

IC3 Report On Student Suicide: देश में जिस दर से जन्संख्या बढ़ रही है, उससे अधिक तेजी से छात्र आत्महत्या कर रहें हैं। यह चिंताजनक खुलासा एक नई रिपोर्ट में हुआ है। 2021 और 2022 के बीच, पुरुष छात्रों की आत्महत्या में कमी आई, जबकि महिला छात्रों की आत्महत्या में वृद्धि हुई।
 

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Annual IC3 Conference and Expo 2024 Report on student suicide; Its rate is higher than population growth
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक

विस्तार

Suicide: भारत में छात्रों की आत्महत्या की घटनाएं बढ़ रही हैं, जोकि एक चिंता का विषय है। इस संबंध में एक नई रिपोर्ट ने इस विषय पर एक और चिंताजनक खुलासा किया है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत में छात्रों की आत्महत्या करने की दर, जनसंख्या वृद्धि दर से भी अधिक है। यही नहीं, यह दर कुल आत्महत्या की दर से भी अधिक हो गई है।

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राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़ों के आधार पर, "छात्र आत्महत्या: भारत में महामारी" रिपोर्ट बुधवार को वार्षिक आईसी 3 सम्मेलन और एक्सपो 2024 में लॉन्च की गई।

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छात्र आत्महत्या में 4 प्रतिशत की वृद्धि

रिपोर्ट में बताया गया है कि जहां कुल आत्महत्या की संख्या में सालाना 2 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, वहीं छात्र आत्महत्या के मामलों में 4 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जबकि छात्र आत्महत्या के मामलों की "कम रिपोर्टिंग" की संभावना है।

आईसी 3 संस्थान द्वारा संकलित रिपोर्ट में कहा गया है, "पिछले दो दशकों में, छात्रों की आत्महत्या की दर 4 प्रतिशत की खतरनाक वार्षिक दर से बढ़ी है, जो राष्ट्रीय औसत से दोगुनी है। 2022 में, कुल छात्र आत्महत्याओं में पुरुष छात्रों की संख्या 53 प्रतिशत थी। 2021 और 2022 के बीच, पुरुष छात्रों की आत्महत्या में 6 प्रतिशत की कमी आई, जबकि महिला छात्रों की आत्महत्या में 7 प्रतिशत की वृद्धि हुई।"

जनसंख्या वृद्धि की दर से अधिक है छात्र आत्महत्या की दर

रिपोर्ट में बताया गया है कि पिछले दशक में 0-24 वर्ष की आयु के बच्चों की जनसंख्या 582 मिलियन से घटकर 581 मिलियन हो गई, जबकि छात्र आत्महत्याओं की संख्या 6,654 से बढ़कर 13,044 हो गई।

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इन राज्यों में अधिक मामले

रिपोर्ट के अनुसार, महाराष्ट्र, तमिलनाडु और मध्य प्रदेश वो राज्य हैं, जहां छात्र सबसे ज्यादा आत्महत्या करते हैं। यहां जितने छात्र आत्महत्या करते हैं वह देश में होने वाली कुल आत्महत्याओं का एक तिहाई हिस्सा है। दक्षिणी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में सामूहिक रूप से इन मामलों में 29 प्रतिशत का योगदान है, जबकि राजस्थान 10वें स्थान पर है।

लिंग वार हुई इतनी वृद्धि

रिपोर्ट में छात्र आत्महत्याओं में चिंताजनक वृद्धि देखी गई। पिछले दशक में पुरुष आत्महत्याओं में 50 प्रतिशत और महिला आत्महत्याओं में 61 प्रतिशत की वृद्धि हुई। पिछले पांच वर्षों में दोनों लिंगों में औसतन 5 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि हुई है।

अधिक हो सकती है वास्तविक संख्या

"एनसीआरबी द्वारा संकलित डेटा पुलिस द्वारा दर्ज की गई प्राथमिकी रिपोर्ट (एफआईआर) पर आधारित है। हालांकि, यह स्वीकार करना महत्वपूर्ण है कि छात्रों की आत्महत्या की वास्तविक संख्या संभवतः कम रिपोर्ट की गई है। इस कम रिपोर्टिंग के लिए कई कारक जिम्मेदार हो सकते हैं, जिसमें आत्महत्या से जुड़ा सामाजिक कलंक और भारतीय दंड संहिता की धारा 309 के तहत आत्महत्या के प्रयास और सहायता प्राप्त आत्महत्या का अपराधीकरण शामिल है।

इसके अलावा, एक मजबूत डेटा संग्रह प्रणाली न होने के कारण भी इस डेटा में कई विसंगतियां हैं। विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में, जहां रिपोर्टिंग शहरी क्षेत्रों की तुलना में कम  है।

आईसी 3 के बारे में

आईसी 3 संस्थान एक स्वयंसेवी-आधारित संगठन है जो अपने प्रशासकों, शिक्षकों और परामर्शदाताओं के लिए मार्गदर्शन और प्रशिक्षण संसाधनों के माध्यम से दुनिया भर के हाई स्कूलों को सहायता प्रदान करता है, ताकि मजबूत करियर और कॉलेज परामर्श विभाग स्थापित करने और बनाए रखने में मदद मिल सके।

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