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Samwad 2026: डॉ. पेरिवाल बोलीं- 'एआई नहीं अपनाया तो पीछे रह जाएंगे, डायनासोर की तरह विलुप्त होने का खतरा'

Tue, 19 May 2026 12:23 PM IST
Shahin Praveen एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: Shahin Praveen Updated Tue, 19 May 2026 12:23 PM IST
सार

Amar Ujala Samwad 2026: अमर उजाला ‘संवाद’ में स्मार्ट शिक्षा और एआई कैंपस पर मंथन किया गया। इस अवसर पर डॉ. पेरीवाल ने कहा कि यदि AI को नहीं अपनाया गया तो हम पीछे रह जाएंगे।

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amar ujala Samwad 2026: Dr. Periwal Says- Adopt AI or Risk Falling Behind Like Dinosaurs Facing Extinction
Amar Ujala Samwad 2026 - फोटो : अमर उजाला, ग्राफिक

विस्तार

Amar Ujala Samwad: अमर उजाला ‘संवाद उत्तर प्रदेश 2026’ में स्मार्ट शिक्षा और एआई कैंपस जैसे विषयों पर मंथन किया गया। इस अवसर पर डॉ. पेरीवाल ने शिक्षा में एआई की भूमिका पर अपने विचार रखते हुए कहा कि AI बहुत जरूरी है और यदि इसे समय पर नहीं अपनाया गया तो हम पीछे रह जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि चाहे स्कूल हों या कॉलेज, डॉक्टर हों या शिक्षक एआई को अपनाना जरूरी है, वरना हम डायनासोर की तरह हो जाएंगे और धीरे-धीरे विलुप्त हो जाएंगे , लेकिन इसे कैसे अपनाना है यह विवेक का विषय है।

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मेरा मानना है कि हमें बच्चों को एआई से सशक्त बनाना चाहिए, लेकिन यह एक दोधारी तलवार है। हालांकि इसे कैसे अपनाना और उपयोग करना है, यह विवेक और समझ का विषय है।

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शिक्षा में एआई की भूमिका और सहभागिता

चर्चा के दौरान उन्होंने आगे कहा कि एक शिक्षक, अभिभावक और स्कूल-कॉलेज के प्रबंधन को इस तकनीक को सही तरीके से अपनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि हर कोई एआई का हिस्सा है और यह शिक्षकों को प्रतिस्थापित (replace) नहीं कर रहा है, बल्कि उनकी सहायता कर रहा है। यह तकनीक इसलिए बनाई गई है ताकि शिक्षा को और बेहतर बनाया जा सके और शिक्षकों का काम आसान हो सके।

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उन्होंने आगे कहा कि एआई शिक्षकों को बेहतर तरीके से पढ़ाने में मदद करता है। उदाहरण के लिए, जो कार्य पहले करने में लगभग 3 घंटे लगते थे, जैसे वर्कशीट बनाना, अब एआई की मदद से कम समय में किया जा सकता है। इससे शिक्षक अलग-अलग स्तर के बच्चों (differentiated learning) के लिए अधिक प्रभावी सामग्री तैयार कर सकते हैं।

एआई का सही उपयोग ही है असली ताकत

कक्षा में हर बच्चा अलग होता है। कोई बच्चा जल्दी समझ लेता है, किसी को बार-बार समझाना पड़ता है, और कुछ बच्चे डर के कारण यह भी नहीं कह पाते कि उन्हें समझ नहीं आया।

ऐसे में शिक्षक को हर बच्चे के हिसाब से पढ़ाना पड़ता है। एआई इसमें मदद कर सकता है, जिससे हर बच्चा अपनी गति से पढ़ सके और समझ सके।

एआई से हम जल्दी सीख सकते हैं, रिसर्च कर सकते हैं और सोचने की क्षमता (critical thinking) बढ़ा सकते हैं। एआई का मकसद है कि हम तेजी से सीखें, लेकिन आज की जरूरत यह है कि एआई सिर्फ स्कूल तक सीमित नहीं होना चाहिए।

अगर एआई सभी के पास हो जाए तो कोई भी कहीं से भी सीख सकता है। एआई को केवल स्कूल में ही सीमित नहीं रखा जा सकता।

एआई का सही उपयोग बहुत जरूरी है। अगर इसका गलत इस्तेमाल किया जाए तो यह हमें आलसी बना सकता है और हमारी रचनात्मकता कम कर सकता है, लेकिन सही तरीके से इस्तेमाल करने पर यह हमें जल्दी और बेहतर सीखने में मदद करता है।

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