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चिंतन : केएससीएफ ने की बाल विवाह के खिलाफ मजबूत कानून की मांग, 18 साल तक मुफ्त शिक्षा की पैरवी भी

Thu, 20 Apr 2023 05:40 PM IST
देवेश शर्मा एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: देवेश शर्मा Updated Thu, 20 Apr 2023 05:40 PM IST
सार

कैलाश सत्यार्त्थी चिल्ड्रेन फाउंडेशन (KSCF) द्वारा अक्षय तृतीया (22 अप्रैल) एवं ईद के अवसर को ध्यान में रखते हुए “बाल विवाह मुक्त भारत” पर राष्ट्रीय परिचर्चा एवं विमर्श का आयोजन किया गया है।

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Ahead of Akshya Tritiya and Eid, KSCF Urged Strictly Implementation of Law to Eliminate Child Marriage
बच्चों के बीच कैलाश सत्यार्थी। - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

KSCF Urged Strictly Implementation of Law to Eliminate Child Marriage: कैलाश सत्यार्त्थी चिल्ड्रेन फाउंडेशन (KSCF) द्वारा अक्षय तृतीया (22 अप्रैल) एवं ईद के अवसर को ध्यान में रखते हुए “बाल विवाह मुक्त भारत” पर राष्ट्रीय परिचर्चा एवं विमर्श का आयोजन किया गया है। इस अवसर पर देशभर से जुटे गैर-सरकारी संगठनों ने सरकार से एक सुर में बाल विवाह के खिलाफ मजबूत कानून बनाने और मौजूदा कानून का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने की अपील की।

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साथ ही सरकार से बाल विवाह निषेध कोष बनाने और 18 साल तक के बच्चों के लिए मुफ्त शिक्षा का प्रावधान करने की मांग भी की गई। यह राष्ट्रीय परिचर्चा इसलिए भी महत्वपूर्ण हो जाती है क्योंकि भारत में बाल विवाह का आयोजन ज्यादातर अक्षय तृतीया तथा ईद के अवसरों पर ही होता है। दरअसल, कैलाश सत्यार्थी चिल्ड्रेन्स फाउंडेशन बाल विवाह उन्मूलन को लेकर अभियान चला रहा है। फाउंडेशन ने पिछले साल 16 अक्तूबर को बाल विवाह के खिलाफ दुनिया के सबसे बड़े जमानी आंदोलन की शुरुआत की थी। यह परिचर्चा इसी अभियान का एक कदम है। 

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मौजूदा कानून में बदलाव की जरूरत है

कैलाश सत्यार्थी चिल्ड्रेन्स फाउडेशन के बैनर तले जुटे गैर-सरकारी संगठन इस बात पर सहमत हैं कि देश में भले ही बाल विवाह कराने वाले लोगों को दंडित करने के लिए विशेष कानून अर्थात बाल विवाह निषेध अधिनियम 2006 (प्रोहिबिशन ऑफ चाइल्ड मैरिज एक्ट, 2006, [पीसीएमए]) है, फिर भी बाल विवाह को समूल नष्ट करने के लिए वर्तमान कानून को संशोधित कर मजबूत बनाने की जरूरत है। साथ ही मौजूदा कानून का कड़ाई से पालन सुनिश्चत करने की जरूरत है। 2030 तक बाल विवाह मुक्त भारत बनाने के लिए गैरसरकारी संस्थाओं ने कई प्रकार के उपायों पर बात की। कानून के संबंध में कई अनुशंसाओं पर बात की गई, जिनमें वर्तमान कानूनों का कड़ाई से क्रियान्वयन, कड़े दंड के साथ कानून में संशोधन, आवश्यक रिपोर्टिंग और अधिकारियों के उत्तरदायित्व आदि हैं।
 

18 की उम्र तक मुहैया कराएं मुफ्त शिक्षा

यह इस परिचर्चा में निर्णय लिया गया कि सरकार एवं राजनीतिक दलों से यह अपील की जाए कि वह मुफ्त शिक्षा की आयु सीमा को 18 वर्ष तक कर दें। इससे बाल विवाह रोकने में बहुत मदद होगी। सुझाव में यह भी निकलकर आया कि बाल विवाह को रोकने वाले संस्थानों को मजबूत किया जाए एवं अधिकारियों के ज्ञान एवं क्षमता निर्माण पर कार्य किया जाए। साथ ही बालविवाह के विषय पर धार्मिक नेताओं को अभियान से जोड़ने पर सहमति बनी। वह अपने समुदाय के लोगों को यह समझा सकेंगे कि वे बच्चों का कम उम्र में विवाह न करें। 

 

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विशेष बाल विवाह निषेध कोष बनाने की भी मांग

साथ ही सरकार से एक विशेष बाल विवाह निषेध कोष बनाने की भी मांग की गई। सरकारी स्कूलों में पढ़ रही बच्चियों को प्रतिमाह 500 रुपये की छात्रवृत्ति दी जा सकती है, जिससे वह अपनी शिक्षा जारी रख सकें। सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाली उन लड़कियों के लिए प्रधानमंत्री शगुन कोष का भी गठन किया जा सकता है, जिनका विवाह कानूनी उम्र में होने पर उन्हें सरकार द्वारा 11,000 रुपये का उपहार दिया सकता है। बाल विवाह के विषय को बच्चों की उम्र के अनुसार पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए, जिससे स्कूल जाने वाले बच्चे इसके दुष्प्रभावों एवं इसके कानूनी प्रावधानों के बारे में परिचित हो सकें। जो लड़कियां 18 वर्ष से कम उम्र की हैं, उन्हें इस विषय में अवगत कराया जाना चाहिए कि कैसे वह विवाह में यौन उत्पीड़न को लेकर शिकायत कर सकती हैं।
 

आवासीय एवं आर्थिक व्यवस्था के प्रावधान की मांग

कानून के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए बाल विवाह निषेध अधिकारियों (सीएमपीओ) के माध्यम से संस्थानों मसलन आंगनवाड़ी, बाल कल्याण समितियां, पंचायती राज संस्थान, स्कूल आदि को मजबूत किया जाना चाहिए। उन लड़कियों के लिए आवासीय एवं आर्थिक व्यवस्था होनी चाहिए, जो अभिभावकों या समाज के दबाव के चलते विवाह नहीं करना चाहती हैं और पढ़ाई या नौकरी करना चाहती हैं। साथ ही बाल विवाह रोकने के लिए संबंधित अधिकारियों को समय-समय पर कानूनों की जानकारी और उसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए।  

 

लड़कियों की शिक्षा को प्रोत्साहित करें : रियर एडमिरल आरके श्रावत

बाल विवाह पर चिंता व्यक्त करते हुए फाउंडेशन के मैनेजिंग डायरेक्टर रियर एडमिरल राहुल कुमार श्रावत, एवीएसएम (सेवानिवृत्त) ने कहा कि कैलाश सत्यार्थी चिल्ड्रेन्स फाउंडेशन पूरे देश में अन्य एनजीओ एवं कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर इस सामाजिक बुराई को रोकने के लिए जागरूकता अभियान के साथ-साथ हर संभव कदम उठा रहा है। हम सरकार एवं अन्य राजनीतिक दलों से अनुरोध करते हैं कि वह अनिवार्य निशुल्क शिक्षा के लिए उम्र सीमा को 18 वर्ष करके बच्चों और विशेषकर लड़कियों की शिक्षा को प्रोत्साहित करें। हम यह मानते हैं कि बाल विवाह एक बड़ी सामाजिक बुराई तथा कानूनी अपराध है। हमारा लक्ष्य है कि हम वर्ष 2025 तक बाल विवाह की बुराई को 23% से घटाकर 10% तक कर दें तथा वर्ष 2030 तक इसे पूर्णतया समाप्त कर दें। अर्थात भारत को बाल विवाह मुक्त देश बना दें!  
 

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