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किन्नर मामले में सरकार ने HC से मांगा समय

Sun, 20 Jul 2014 10:23 AM IST
Updated Sun, 20 Jul 2014 10:23 AM IST
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Government take the time
निजी स्कूलों द्वारा किन्नर (ट्रांस जेंडर) बच्चों को दाखिला देने से इंकार करने के मामले में एक याचिका की सुनवाई करते हुए अदालत ने सरकार को इस मामले में व्यापक कार्य योजना पेश करने का अंतिम मौका दिया है।
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चीफ जस्टिस एमएम कुमार और जस्टिस ताशी राबस्तन की खंडपीठ ने याचिका की सुनवाई करते हुए पाया कि तीन जून 2014 को खंडपीठ ने अपने फैसले में व्यापक कार्ययोजना बनाने और रियासत में उठाए जाने वाले कदम के बारे पूछा था।

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उल्लेखनीय है कि शहर के एक निजी स्कूल द्वारा दो किन्नर बच्चों को दाखिला नहीं देने पर मियां हाजी सारिया ने एक जनहित याचिका अदालत में दाखिल की थी।

किन्नरों से दुर्व्यवहार पर रोक लगाने की मांग

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खंडपीठ ने कहा कि सार्वजनिक स्थलों, बस स्टैंड, स्कूलों, कार्यालयों, हास्पिटल आदि में किन्नरों के साथ होने वाले दुर्व्यवहार पर रोक लगाने के लिए सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी थी।

जिसमें सर्वोच्च अदालत ने किन्नरों को ‘थर्ड जेंडर’ के रूप में व्यवहार करने को कहा है। अदालत में उपस्थित सीनियर एएजी गगन बसोत्रा ने बताया कि आदेश को लागू करने में कुछ समय लगेगा।


उन्होंने अदालत से चार सप्ताह का समय प्रदान करने का आग्रह किया। खंडपीठ ने सरकार को अंतिम मौका प्रदान करते हुए अगली तिथि में इस व्यापक कार्ययोजना की रिपोर्ट अदालत में पेश करने को कहा।

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