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Hindi News ›   Delhi ›   You are at AIR's Delhi station... Now 14 year old girl Lata Mangeshkar will recite Raag Khambavati

यादगार : आप एआईआर के दिल्ली स्टेशन पर हैं...अभी 14 वर्ष की बच्ची लता मंगेशकर राग खंबावती की प्रस्तुति देंगी

Mon, 07 Feb 2022 04:47 AM IST
दुष्यंत शर्मा आदित्य पाण्डेय, नई दिल्ली
आदित्य पाण्डेय, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Mon, 07 Feb 2022 04:47 AM IST
सार

स्वर कोकिला ने साल 1942 में दिल्ली से शुरू की थी सार्वजनिक प्रस्तुति, ‘लता सुर-गाथा’ में लेखक यतींद्र मिश्र ने संजोया है दीदी का जीवन।
 

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You are at AIR's Delhi station... Now 14 year old girl Lata Mangeshkar will recite Raag Khambavati
लता मंगेशकर - फोटो : सौजन्य- स्पीड कलर लैब

विस्तार

आप ऑल इंडिया रेडियो (एआईआर) के दिल्ली स्टेशन पर हैं...अभी 14 वर्ष की बच्ची लता मंगेशकर राग खंबावती की प्रस्तुति देंगी। कुछ इस तरह की उद्घोषणा साल 1942 में की गई थी। बहुत कम लोगों को पता है कि स्वर कोकिला ने सार्वजनिक प्रस्तुति की शुरुआत एआईआर के दिल्ली स्टेशन से की थी। 27 जनवरी 1963 को लता दीदी ने तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन और प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू की मौजूदगी में मेजर ध्यानचंद नेशनल स्टेडियम में ‘ऐ मेरे वतन के लोगों’ गीत गाया। इसके बाद वह कई बार सार्वजनिक प्रस्तुतियां देने के लिए दिल्ली आती रहीं।

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आजादी के 50 वर्ष पूरे होने पर संसद भवन में गाया था वंदे मातरम
लता दीदी देश की ऐसी शख्सियत थीं, जिनसे यहां का हर बाशिंदा जुड़ा है। उनके अनगिनत गीतों में से एकाध गीत ऐसा जरूर है, जिसका इंसान के अस्तित्व से जुड़ाव है। पुरानी दिल्ली के दरियागंज में स्थित वाणी प्रकाशन द्वारा प्रकाशित यतींद्र मिश्र की पुस्तक ‘लता सुर-गाथा’ ऐसा जरिया है जो लोगों को लता मंगेशकर से और गाढ़ा जोड़ती है। लता जी से जुड़ी हर बात इस किताब में मौजूद है।
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लेखक यतींद्र मिश्र ने ऐसा कोई सवाल इस किताब में नहीं छोड़ा जो उनके जीवन, गायकी, शौक, परिवार, साल-दर-साल गायकी में आए बदलाव को तसल्ली से बयान न करता हो। किताब में कई ऐसे किस्से ऐसे हैं, जो लता जी की जिंदगी के अनछुए पहलुओं की बारीकी से जानकारी देते हैं।  रविवार को बातचीत के दौरान यतींद्र मिश्र ने बताया कि लता जी महाराष्ट्र में मराठी भाषा में प्रस्तुतियां देती रहीं, लेकिन 1942 में उन्होंने दिल्ली आकर एआईआर स्टेशन पर पहली बार सार्वजनिक प्रस्तुति दी। एआईआर में उन्होंने राग खंबावती में बंदिश ‘आली री मैं जागूं सारी रैना’ की प्रस्तुति दी। देश की आजादी के 50 वर्ष पूरे होने पर उन्होंने संसद भवन में भारत रत्न पंडित भीमसेन जोशी के साथ वंदे मातरम की प्रस्तुति दी थी।

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शोक में झुकाया तिरंगा

जीवन हो तो लता दीदी जैसा, जो तिरंगे के मान-सम्मान के लिए समर्पित हो और जब मौत आए तो शोक में तिरंगा झुक जाए। रविवार सुबह करीब 10 बजे भारत रत्न लता मंगेशकर के निधन की खबर आई तो दिल्ली मेट्रो में सफर कर रहे कुछ लोगों की आपस में बातचीत के दौरान ये लाइनें बरबस सुनाई पड़ीं।

देशप्रेम में रोंगटे खड़े कर देेने वाले गीत ‘ऐ मेरे वतन के लोगों, तुम खूब लगा लो नारा, ये शुभ दिन है हम सबका, लहरा लो तिरंगा प्यारा’ को आवाज देने वाली स्वर कोकिला के निधन पर दिल्ली के दिल कनॉट प्लेस व अन्य जगहों पर लगे गगन चुंबी राष्ट्रीय ध्वजों को राष्ट्रीय शोक के तौर पर झुकाया गया। स्वर कोकिला, सुर साम्राज्ञी, नाइटिंगल ऑफ इंडिया, जैसे नामों से लोगों ने सोशल मीडिया पर श्रद्धांजलि दी।

उधर, संगीत नाटक अकादमी, राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय जैसे बड़े संस्थानों समेत दूसरे छोटे-बड़े गीत-संगीत से जुड़े संस्थानों की तरफ से सुर साम्राज्ञी के निधन पर सार्वजनिक तौर पर शोक व्यक्त किया गया। 

याद किया...
सांसद मनोज तिवारी ने बताया कि लता मंगेशकर के निधन की खबर सुनकर उन्हें गहरा आघात पहुंचा है, जिसे बर्दाश्त करना उनके लिए मुश्किल है। उन्होंने इसे व्यक्तिगत क्षति बताते हुए कहा कि करीब पांच बार वह लता जी से मिले। एक बार उन्हें उनके साथ मंच साझा करने का भी मौका मिला।
-मनोज तिवारी

लता मंगेशकर ने हृदय की गहराइयों से गीतों को गाया। उनके गीत भारत को एकता के सूत्र में पिरोते हैं। उनकी आवाज देश के समस्त घरों में सदैव गूंजती रहेगी। ईश्वर उनके परिजनों को शोक सहन करने की शक्ति प्रदान करें।
- अनिल बैजल, उपराज्यपाल

लता मंगेशकर जी का निधन भारत में संगीत के एक युग की समाप्ति है। उनकी सुरीला आवाज हम सबके बीच और पूरी दुनिया में सदा अमर रहेगी।
- अरविंद केजरीवाल, मुख्यमंत्री  

मैं लता मंगेशकर जी को श्रद्धांजलि देता हूं और ईश्वर से प्रार्थना करता हूं कि उनके परिजनों को दुख सहन करने की शक्ति प्रदान करें।
-  मनीष सिसोदिया उपमुख्यमंत्री

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