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World Environment Day : क्लाइमेट जस्टिस पुस्तकालय युवाओं को कर रहा है जागरूक, 70 किताबों से हुई थी शुरुआत

Mon, 05 Jun 2023 06:07 AM IST
दुष्यंत शर्मा आशीष सिंह, नई दिल्ली
आशीष सिंह, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Mon, 05 Jun 2023 06:07 AM IST
सार

मौसम पर इसका विपरीत असर देखने को मिल रहा है। जलवायु परिवर्तन से पर्यावरण पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। इन सब मामलों को समझने के लिए क्लाइमेट जस्टिस पुस्तकालय युवाओं के लिए मददगार साबित हो रहा है। 

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World Environment Day: Climate Justice library is making youth aware
क्लाइमेट जस्टिस पुस्तकालय... - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दुनिया भर के देश जलवायु परिवर्तन की गंभीर समस्याओं से जूझ रहे हैं। कहीं सूखे की मार है, तो कहीं अत्यधिक वर्षा होने से बाढ़ आ रही है। मौसम पर इसका विपरीत असर देखने को मिल रहा है। जलवायु परिवर्तन से पर्यावरण पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। इन सब मामलों को समझने के लिए क्लाइमेट जस्टिस पुस्तकालय युवाओं के लिए मददगार साबित हो रहा है। 

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पर्यावरण मुद्दों से जुड़ी यहां आठ सौ से अधिक पुस्तकें, जर्नल, पत्रिकाएं व शोध पत्र समेत जरूरी दस्तावेज मौजूद हैं। यहां पर्यावरण में दिलचस्पी रखने वाले लोग, छात्र व शोधार्थी निशुल्क पढ़ रहे हैं। पुस्तकालय में 40 से अधिक लोगों के बैठने की व्यवस्था है। इसमें छात्रों के साथ शोधार्थी बड़ी संख्या में पढ़ने के लिए पहुंच रहे हैं।
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रोज 30 से 40 लोग आते हैं
जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए सरकारी व निजी स्तर पर प्रयासों के बीच दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) के हिंदू कॉलेज की सोशियोलॉजी की तृतीय वर्ष की छात्रा श्रीजनी दत्ता और डॉक्यूमेंट्री फिल्म मेकर विजय सहरावत ने जागरूकता के लिए यह नवाचार किया है। 
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पुस्तकालय की संस्थापिका दत्ता बताती हैं कि वह दोस्तों के साथ पर्यावरण के मुद्दे को लेकर पार्क में चर्चा करती थी, लेकिन उन्हें ऐसी जगह चाहिए थी, जहां इन मुद्दों को गंभीर रूप से सुना और इसका हल निकाला जाए। उन्होंने बताया कि पर्यावरण के विषय में कम ही किताबें हैं वह भी लोगों में सबकी पहुंच में नहीं है। ऐसे में उन्होंने दोस्तों के साथ मिलकर पुस्तकालय स्थापित करने का फैसला किया। वह बताती हैं कि छात्र होने से पुस्तकालय का विचार तो था लेकिन इसके लिए जगह नहीं मिल रही थी। जिसमें एक गैर सरकारी संगठने ने जगह देने के लिए मदद की है। उन्होंने बताया कि रोजाना यहां 30 से 40 लोग आते हैं जिसमें अधिकतर कॉलेज छात्र व शोधार्थी शामिल होते हैं। 

युवाओं को करना है जागरूक
वह बताते हैं कि उन्हें पर्यावरण के प्रति काफी लगाव है। पुस्तकालय में समय-समय पर पर्यावरण के गंभीर मुद्दों को लेकर विषय के विशेषज्ञों के साथ संगोष्ठी भी आयोजित की जाती है। वह कहते हैं कि युवाओं में पर्यावरण को लेकर जागरूकता होगी तो इसे बचाने की मुहिम में अधिक असर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि पुस्तकालय का उद्देश्य युवा, छात्रों व लोगों में पर्यावरण के बारे में जागरूकता लाना है। पर्यावरण को लेकर कम ही पुस्तक है जिससे इसकी कमी को दूर करने के लिए प्रयास कर रहे हैं। 


70 किताबों से शुरू किया पुस्तकालय
पुस्तकालय से जुड़े विजय सहरावत बताते हैं कि वह पर्यावरण पर आधारित डॉक्यूमेंट्री बनाते हैं। उन्हें कई बार आंकड़े लेने के लिए मुसीबत का सामना करना पड़ा। इस वजह से इसे बनाने के लिए विचार किया। वह कहते हैं कि पिछले वर्ष स्थापित किए गए पुस्तकालय की नींव 70 किताबों से की थी। अब कुल 800 से अधिक पुस्तकें व शोध पत्र मौजूद है। वह बताते हैं कि पुस्तकालय में कोई भी व्यक्ति पढ़ने के लिए आ सकता है। सप्ताह में पांच दिन सुबह 10 बजे से शाम पांच बजे तक खुलता है। 

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