दिल्ली-दर्पण : बच्चे ही नहीं, स्कूल खुलने से उद्यमियों के चेहरे पर लौटी खुशी
स्कूल बैग, जूते व यूनिफार्म की फैक्टरियां पूरी क्षमता के साथ चलना हुईं शुरू। दिल्ली में सात हजार करोड़ रुपये तक का कारोबार।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
दिल्ली के स्कूलों में सोमवार से रौनक होने जा रही है। इसकी खुशी सिर्फ बच्चों, शिक्षकों को ही नहीं उद्यमियों को भी है। अब स्कूल यूनिफार्म, शूज, स्कूल बैग की बंद पड़ी फैक्टरियों में भी रौनक लौट आई है। दिल्ली के साथ उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, गुजरात समेत दूसरे राज्यों से भी इनके उत्पादों की मांग आने लगी है। कारोबारी बताते हैं कि चमड़े के जूते के लिए दक्षिणी भारत व आगरा बेशक मशहूर है, लेकिन पीवीसी सोल वाले जूते व स्पोर्ट्स शू में दिल्ली की सानी नहीं है। एक अनुमान के अनुसार, दिल्ली में 5,000-7,000 करोड़ रुपये का कारोबार है। इसकी छोटी-बड़ी करीब 1000 फैक्ट्रियां चलती हैं।
पूरी क्षमता से चलने लगीं फैक्ट्रियां
कोविड संक्रमण की वजह से बंद पड़ी फैक्ट्री अब फिर से चलने लगी है। स्कूल खुलने की आहट मिलने के बाद ही यह फैक्ट्रियां 100 प्रतिशत क्षमता के साथ चल रही है। दरअसल स्कूल बंद होने की वजह से इस तरह के उत्पाद वाली फैक्ट्री बंद हो गई थी। मशीनों में जंग लग रहा था।
20-25 प्रतिशत तक महंगी होंगी
जूूते पर इस साल जीएसटी बढ़ा दिया गया है। 5 प्रतिशत की जगह 12 प्रतिशत जीएसटी बढ़ने की वजह से जो भी नये प्रोडक्ट मार्केट में आएगा वह महंगा होगा। दूसरी महंगाई की वजह कच्चे माल की प्रभावित होने वाली आवक से भी है। यूक्रेन विवाद की वजह से इस्तेमाल में आने वाले कच्चे माल का आयात रुका हुआ है। इस वजह से स्कूल बैग हो या शूज दोनों ही 20-25 प्रतिशत महंगा हो जाएगा।
अब खुलेगा ताला
स्कूल बंद होने की वजह से फैक्टरी पर ताला लगा हुआ था। अब जबकि स्कूल खुलने वाले है तो फैक्ट्री भी पूरी क्षमता के चलने लगी है। दिल्ली ही नहीं उत्तर प्रदेश, गुजरात व महाराष्ट्र समेत अन्य राज्यों से जूते, यूनिफार्म व स्कूल बैग की मांग बढ़ गई है। स्थिति यह है कि मांग के अनुरुप प्रोडक्शन कम पड़ रहा है। हालांकि जीएसटी की वजह से बच्चों के इस्तेमाल में आने वाले यह प्रोडक्ट 20-25 प्रतिशत बढ़े हुए रेट पर मिलेंगे।
-शशि महाजन, संयुक्त सचिव कंफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया माइक्रो एंड स्मॉल स्केल इंडस्ट्री
कारोबार की लौटी रौनक
बच्चों की वजह से एक बार फिर स्कूल बैग बनाने वाले गृह उद्योग चल पड़े है। पिछले डेढ़ साल से बंद पड़े इस व्यवसाय में रौनक लौट रही है। पेट्रोलियम प्रोडक्ट महंगे होने से इस साल बैग भी 15-20 प्रतिशत महंगे होंगे। हालांकि चीन निर्मित बैग से दिल्ली के उत्पाद जरूर सस्ते रहेंगे। दिल्ली में बने बैग की मांग सभी राज्यों में रहती है।
-पवनजीत भाटिया, उद्यमी