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Satish Kaushik Memory : बहुत याद आएंगे सतीश भाई साहब...गांव में साथ रहे अजय ने बयां की कहानी

Fri, 10 Mar 2023 03:41 AM IST
दुष्यंत शर्मा शुजात आलम, नई दिल्ली
शुजात आलम, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Fri, 10 Mar 2023 03:41 AM IST
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Will miss you a lot Satish Bhai Sahab
चुनाव प्रचार के दौरान सतीश कौशिक... - फोटो : अमर उजाला

अभिनेता-निर्देशक सतीश कौशिक ने 66 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कह दिया। हमेशा सभी को हंसाने वाले कौशिक का दिल्ली से गहरा नाता रहा है। विकासपुरी और करोल बाग में रहकर उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के किरोड़ीमल कॉलेज से स्नातक किया। इसके बाद उन्होंने नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा में दाखिला लिया। बाद में वे काम की तलाश में मुंबई चले गए। वहां जाकर भी वे कभी दिल्ली को नहीं भूले। चाहे चांदनी चौक की चाट हो या मंडी हाउस की चाय, जब भी वे दिल्ली आते तो कोशिश रहती कि मंडी हाउस या चांदनी चौक जरूर जाएं। उनके करीबी अजय शर्मा ने बताया कि बुधवार को पता चला कि भाई साहब को दिल का दौरा पड़ा है। कुछ ही देर बाद उनके दुनिया छोड़कर चले जाने की खबर मिली तो गहरा धक्का लगा। भाई साहब हमेशा बहुत याद आएंगे।

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मयूर विहार निवासी अजय शर्मा ने बताया कि भाई साहब का जन्म हरियाणा के महेंद्रगढ़ स्थित गांव धनौड़ा, तहसील कनीना में हुआ था। मेरा जन्म भी इसी गांव में हुआ है। बड़े होने की वजह से मैं सतीश को भाई साहब कहकर पुकारता था। भाई साहब की शुरुआती पढ़ाई गांव में ही हुई, बाद में पिता के साथ गुरुग्राम में आ गए। उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए गुरुग्राम से कुछ समय के लिए विकासपुरी में रहे। बाद में वह करोल बाग शिफ्ट हो गए। किरोड़ीमल कॉलेज से वे चाट खाने के लिए दोस्तों के साथ अक्सर चांदनी चौक जाते थे। स्नातक के बाद नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा में दाखिला लेने के बाद उनकी बैठक मंडी हाउस पर चाय-समोसे की दुकान पर लगती थी। भाई साहब 1978 में काम की तलाश में मुंबई चले गए, लेकिन उनका दिल यहीं रहा। जब भी वे दिल्ली आते तो अक्सर मुझे कॉल कर मंडी हाउस बुला लेते थे। गाड़ी में बैठे-बैठे ही चाय पीते, बाद में किसी को भी चाय के पैसे नहीं देने देते थे।
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गांव के विकास के लिए प्रशासन को लिखते थे पत्र
इतनी व्यस्तता होने के बाद भी सतीश गांव के लिए समय जरूर निकलते थे। गांव के विकास के लिए वह प्रशासन को चिट्ठियां लिखते रहते थे। गांव में खेलों को बढ़ावा देने के लिए उन्होंने अपने गांव में प्रशासन की मदद से एक स्टेडियम भी बनवाया था। अजय ने बताया कि अक्सर गरीब लड़कियों की शादियां करवाने में भी सतीश बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते थे। भाई साहब को गांव में ठाकुर जी के मंदिर से भी बहुत लगाव था। गांव जाने पर वे मंदिर में दर्शन के लिए जरूर जाते थे।
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तीन अपाहिज नाटक से मजबूत हुई दोस्ती
‘छोटे कद के दुबले-पतले सतीश कौशिक जब किरोड़ीमल कॉलेज में पढ़ने आए थे तो हमारे साथ नाटक करना चाहते थे। वो कहते थे कि मुझे भी नाटक में शामिल कर लो, लेकिन हम हंसते थे। उन्हें देखकर कोई विश्वास नहीं कर सकता था कि वे फिल्म जगत की ऊंचाइयों को छूएंगे।’ यह कहना है सतीश कौशिक के कॉलेज के दोस्त पूर्व विधायक सुरेंद्र पाल रातावाल का। 

कौशिक के निधन के बाद बृहस्पतिवार को करोल बाग स्थित घर में उन्हें याद करते हुए रातावाल ने बताया कि 1972-73 में कॉलेज के अंतिम वर्ष में पढ़ रहे थे, उस समय सतीश कॉलेज में आए थे। वे प्रथम वर्ष से ही नाटक करना चाहते थे। हमने मना किया तो चुनौती दे दी। 

कॉलेज स्तर पर हुई नाटक प्रतियोगिता में कौशिक ने भाग लिया और तीन अपाहिज नाटक का मंचन किया जो दूसरे नंबर पर रहा। उनके उस नाटक ने हमारी दोस्ती गहरी कर दी और वे हमारे साथ जुड़ गए। यह दोस्ती इतनी गहरी हुई कि कॉलेज खत्म होने के बाद हमारी नाटक कंपनी का हिस्सा बन गए। कौशिक हमेशा आगे बढ़ने वाले लड़के थे, हमेशा हंसते व दूसरों को भी हंसाते। हमेशा परिवार से जुड़े रहते थे। फिल्म जगत में जब वे आगे बढ़ रहे थे तो भी दोस्ती कम नहीं हुई। हमेशा घर आते थे। वे फिल्म से जुड़े दोस्तों से मिलवाते थे। मुझे आज भी याद है। 1977 में जब मेरी शादी हुई तो कौशिक एक दिन पहले से मेरे साथ रहे। वे सुख-दुख के साथी रहे। जब मैं भाजपा से जुड़कर राजनीति में आगे बढ़ा तो उन्होंने मेरा सहयोग किया।   


कौशिक के दोस्त करोल बाग निवासी पूर्व विधायक ने साझा की यादें
रातावाल ने बताया कि मेरी एक चुनावी सभा में कौशिक ने प्रचार भी किया। इस दौरान भाजपा नेता विजय दत्त शर्मा भी मौजूद थे। 1995 में करोल बाग से विधायक बनने के बाद उसका आना जाना बढ़ गया।  बंगाली मार्केट में उनका फ्लैट है। वह हमेशा वहीं आते और घंटों हमारी गप्पे चलती थीं। वे मुझे लेकर एक फिल्म भी बनाना चाहते थे। इसमें उन्होंने मुझे विधायक का रोल दिया था। हालांकि, कुछ कारणों से फिल्म बन नहीं पाई। वे अक्सर मुझे मुंबई बुलाकर शूटिंग दिखाते थे।

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