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दिल्ली: कुरान में जिसका वर्णन, वह मजहब का अनिवार्य हिस्सा, जामिया के पूर्व प्रोफेसर बोले- जो फैसले से संतुष्ट नहीं, सुप्रीम कोर्ट में दें चुनौती 

Wed, 16 Mar 2022 04:17 AM IST
सुशील कुमार अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: सुशील कुमार Updated Wed, 16 Mar 2022 04:17 AM IST
सार

कुरान की सूराह (अध्याय) में महिलाओं को सिर ढकने को कहा गया है। वह एक शिक्षक के तौर पर वर्दी (यूनिफॉर्म) लागू करने के हिमायती हैं, लेकिन छात्राओं को वर्दी के रंग के कपड़े से सिर ढकने की इजाजत दी जा सकती है।

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Whatever described in Quran essential part of religion former Jamia professor said Those who are not satisfied with decision challenge in Supreme Court
सांकेतिक फोटो - फोटो : Social Media

विस्तार

कर्नाटक उच्च न्यायालय के हिजाब पहनने को इस्लाम का जरूरी हिस्सा नहीं मानने के फैसले से इस्लामी विद्वान असहमत हैं। जामिया मिल्लिया इस्लामिया के इस्लामी अध्ययन विभाग के पूर्व प्रमुख प्रोफेसर एमेरिट्स अख्तर उल वासे का कहना है कि कुरान में जिस बात का हुक्म (आदेश) दिया गया है, वह मजहब का अनिवार्य हिस्सा है।  

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कुरान की सूराह (अध्याय) में महिलाओं को सिर ढकने को कहा गया है। वह एक शिक्षक के तौर पर वर्दी (यूनिफॉर्म) लागू करने के हिमायती हैं, लेकिन छात्राओं को वर्दी के रंग के कपड़े से सिर ढकने की इजाजत दी जा सकती है। हम इस फैसले से संतुष्ट नहीं है। जो लोग इस फैसले से सहमत नहीं हैं, वे विरोध के बजाय इसे शीर्ष अदालत में चुनौती दें।
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बताते चलें कि कर्नाटक उच्च न्यायालय ने मंगलवार को कहा था कि हिजाब पहनना इस्लाम धर्म में आवश्यक धार्मिक प्रथा का हिस्सा नहीं है और उसने कक्षाओं में हिजाब पहनने की अनुमति देने के लिए मुस्लिम छात्राओं की याचिकाएं खारिज कर दी। अदालत ने इसके साथ ही राज्य में शैक्षणिक संस्थानों में हिजाब पर प्रतिबंध बरकरार रखा। इस पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए प्रोफेसर वासे ने कहा कि कुरान-ए-करीम में किसी चीज के लिए साफ तौर पर हिदायत (निर्देश) मौजूद हैं तो वह इस्लाम का अनिवार्य हिस्सा है। उन्होंने कहा कि सिर ढकने का जिक्र सूर-ए-अहजाब और सूर-ए-नूर में मौजूद है कि महिलाएं अपना चेहरा, हाथ और पैर खुला रखेंगी, लेकिन वे सिर ढकेंगी। सूर-ए-नूर में मर्दों के लिए भी हुक्म है कि वे अपनी नजर को झुका कर रखेंगे।
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उन्होंने कहा कि हज और उमरे (हज के अलावा आम दिनों में होने वाली मक्का मदीना की यात्रा) के दौरान महिलाएं अपने सिर को ढकती हैं। वर्दी की आड़ में महिलाओं को तालीम (शिक्षा) और हिजाब में से किसी का एक चयन करने का मौका नहीं देना चाहिए। भारत में राजस्थान और बृज प्रदेश की महिलाएं घूंघट करती हैं। इसे आप क्या कहेंगे। यह भारतीय संस्कृति का हिस्सा है।

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