दिल्ली: आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के साथ बर्बरता, पुलिस ने बुजुर्ग महिला के बाल पकड़कर गाड़ी में बिठाया, एक बेहोश
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के मुताबिक करीब साढ़े पांच बजे दिल्ली पुलिस के लोगों ने उन्हें यह बताया कि यहां धारा 144 लगी है, सबको तुरंत जाना होगा। दिल्ली स्टेट आंगनबाड़ी वर्कर्स व हेल्पर्स यूनियन की मीडिया सेल प्रभारी वृशाली श्रुति ने बताया कि वह पुलिस से बातचीत कर रही थीं, तभी पुलिस ने महिला साथियों को घसीटकर अपनी गाड़ी में बैठाना शुरू कर दिया।
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सीपी सेंट्रल पार्क में अपनी बात रखने के लिए जुटीं आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के साथ दिल्ली पुलिस ने बर्बरतापूर्ण व्यवहार किया। महिलाओं को उनके बालों से पकड़कर पुलिस की गाड़ी में बैठाया गया, इस कार्रवाई में कई महिलाओं की तबीयत बिगड़ गई, एक बुजुर्ग महिला बेहोश हो गई, जिसको अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। दिल्ली पुलिस ने 16 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेकर करीब ढाई घंटे मंदिर मार्ग थाने में बिठाए रखा, इन्हें रात को करीब आठ बजे छोड़ा गया। चार अन्य कार्यकर्ताओं को दूसरे थाने में रखा गया, इन्हें भी बाद में छोड़ा गया।
दोपहर में दो बजे करीब 600 आंगनबाड़ी महिला कार्यकर्ता सीपी सेंट्रल पार्क में जुटी थीं। वह दिल्ली सरकार द्वारा अपने निलंबन के मामले में बात करने के लिए यहां इकट्ठा हुई थीं। मंगलवार को दिल्ली हाईकोर्ट में दायर उनकी याचिका की पहली पेशी थी। इस पर वह यहां बात करने वाली थीं। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के मुताबिक करीब साढ़े पांच बजे दिल्ली पुलिस के लोगों ने उन्हें यह बताया कि यहां धारा 144 लगी है, सबको तुरंत जाना होगा।
दिल्ली स्टेट आंगनबाड़ी वर्कर्स व हेल्पर्स यूनियन की मीडिया सेल प्रभारी वृशाली श्रुति ने बताया कि वह पुलिस से बातचीत कर रही थीं, तभी पुलिस ने महिला साथियों को घसीटकर अपनी गाड़ी में बैठाना शुरू कर दिया। पुलिस की इस कार्रवाई में कई महिलाओं को चोट आई है। बुजुर्ग महिला सुनीता इस बर्बरता को बर्दास्त नहीं कर पाईं और बेहोश हो गईं। उनको और तीन अन्य महिलाओं को अस्पताल में भर्ती कराया गया, जो इलाज के बाद अब ठीक हैं।
991 आंगनबाड़ी कार्यकर्ता नौकरी से बर्खास्त
पुलिस हिरासत से निकलने के बाद वृशाली श्रुति ने बताया कि हाई कोर्ट में सुनवाई से पता चला है कि दिल्ली सरकार ने हड़ताल में शामिल 991 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को अब तक नौकरी से बर्खास्त कर दिया है। अभी और कार्यकर्ताओं की बर्खास्तगी हो सकती है, जबकि दिल्ली सरकार के महिला एवं बाल बिकास मंत्री कैलाश गहलोत केवल दिखावे और दिल्ली वासियों को गुमराह करने के लिए यह कहते फिर रहे हैं कि हड़ताल में शामिल आंगनबाड़ी कार्यकर्ता नौकरी जॉइन कर लें, ताकि दिल्ली के लोगों को उनके माध्यम से मिलने वाली सेवाएं जारी रहें।
हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार से मांगा जवाब
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को बर्खास्त किए जाने के खिलाफ दाखिल याचिका पर उच्च न्यायालय ने मंगलवार को दिल्ली सरकार से जवाब मांगा है। साथ ही, सरकार के सक्षम अधिकारियों को बर्खास्तगी के ऐसे आदेश पारित नहीं करने के आदेश दिए हैं।
जस्टिस वी. कामेश्वर राव ने दिल्ली राज्य आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका संघ की ओर से दाखिल याचिका पर विचार करते हुए यह आदेश दिया है। उन्होंने सरकार को नोटिस जारी करते हुए चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने के लिए कहा है। इसके साथ ही न्यायालय ने सरकार को और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को बर्खास्त नहीं करने का आदेश दिया है। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कॉलिन गोंजाल्विस ने न्यायालय से बर्खास्त आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को अंतरिम राहत देने और काम पर आने की अनुमति देने का आग्रह किया गया।
इस पर सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने मामले में सहानुभूति दृष्टिकोण रखने का समर्थन किया और कहा कि हम (सरकार) देखेंगे कि क्या किया जा सकता है। उन्होंने न्यायालय को बताया कि 991 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को बर्खास्तगी नोटिस जारी किया गया है।
याचिकाकर्ताओं को बहाली के लिए औद्योगिक विवाद अधिनियम के तहत उनके लिए उपलब्ध वैकल्पिक उपाय का लाभ उठाना चाहिए। सरकार के वकील ने मौखिक रूप से आश्वासन दिया कि इस मामले के लंबित होने के मद्देनजर कोई और बर्खास्तगी का आदेश जारी नहीं किया जाएगा। सरकार ने यह भी कहा कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता किसी भी सरकारी पद पर आसीन नहीं थीं। उन्हें केवल मानदेय दिया गया था और पिछले महीने उनके भत्ते में वृद्धि की गई थी। 3000 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं में से अधिकांश ने नोटिस जारी होने के बाद काम पर आने का फैसला किया, लेकिन कुछ अभी भी काम पर नहीं रही हैं।
याचिकाकर्ता संघ की ओर से अधिवक्ता ने न्यायालय को बताया कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने महामारी के दौरान फ्रंटलाइन वर्कर के रूप में काम किया और बर्खास्त किए गए कर्मचारियों की संख्या लगभग 2000 है। दायर याचिका में कहा गया है कि 31 जनवरी और 9 मार्च को कई आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने अधिकारियों को हड़ताल की सूचना देने के बाद शांतिपूर्ण तरीके से विरोध प्रदर्शन किया, लेकिन जब सरकार ने निषेध आदेश जारी किया तब इसे समाप्त कर दिया गया।