उपहार त्रासदी : अंसल बंधुओं समेत अन्य से हाईकोर्ट ने मांगा जवाब, दिल्ली पुलिस ने दायर की है यह पुनरीक्षण याचिक
पुलिस ने जुलाई, 2022 के उस आदेश को चुनौती दी है जिसमें जिला और सत्र न्यायाधीश ने दोषियों को रिहा करने का आदेश दिया था, जिसमें कहा गया था कि ट्रायल कोर्ट द्वारा दी गई कारावास की सजा की मात्रा न केवल कठोर और कठिन है, बल्कि किए गए अपराध के लिए भी अनुपातहीन थी। अंसल को मजिस्ट्रेट अदालत ने नवंबर 2021 में सात साल की जेल की सजा सुनाई थी।
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दिल्ली हाईकोर्ट ने उपहार त्रासदी से जुड़े सबूतों से छेड़छाड़ मामले में ट्रायल कोर्ट के आदेश को सात साल से घटाकर आठ महीने करने के आदेश की चुनौती याचिका पर गोपाल अंसल, सुशील अंसल और अन्य आरोपियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। यह पुनरीक्षण याचिका दिल्ली पुलिस ने दायर की है। न्यायमूर्ति अनूप जयराम भंभानी ने उपहार त्रासदी के पीड़ितों के संघ (एवीयूटी) से भी इस मामले में जवाब मांगा हे। अदालत ने सभी पक्षों को चार सप्ताह में अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश देते हुए मामले की सुनवाई 13 अप्रैल तय की है।
पुलिस ने जुलाई, 2022 के उस आदेश को चुनौती दी है जिसमें जिला और सत्र न्यायाधीश ने दोषियों को रिहा करने का आदेश दिया था, जिसमें कहा गया था कि ट्रायल कोर्ट द्वारा दी गई कारावास की सजा की मात्रा न केवल कठोर और कठिन है, बल्कि किए गए अपराध के लिए भी अनुपातहीन थी। अंसल को मजिस्ट्रेट अदालत ने नवंबर 2021 में सात साल की जेल की सजा सुनाई थी।
जिला एवं सत्र न्यायाधीश के आदेश के खिलाफ एवीयूटी द्वारा पुनरीक्षण याचिका पर उच्च न्यायालय पहले ही विचार कर रहा है। अंसल बंधुओं ने भी मामले में अपनी दोषसिद्धि को चुनौती देते हुए याचिका दायर की है। न्यायमूर्ति भंभानी ने अब सभी याचिकाओं व अपीलों पर एक साथ सुनवाई का निर्णय किया है। न्यायाधीश ने यह भी टिप्पणी की कि मामले में दोषियों की अधिक उम्र को देखते हुए उस मामले की उचित समय पर सुनवाई होनी चाहिए।