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यूपीएसएसी: तंत्रिकाआवसी, आमापन, आविषालुता...का अर्थ समझें या सवालों के जवाब दें

Tue, 12 Oct 2021 02:06 AM IST
नोएडा ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: नोएडा ब्यूरो Updated Tue, 12 Oct 2021 02:06 AM IST
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UPSC - फोटो : amar ujala

जाहक, शेषमूलक, वज्रशल्क, तंत्रिकाआवसी, आमापन, आविषालुता, प्रक्षादित कार्बन, सूत्र कणिका..., यह हिंदी के कठिन शब्दों की पहेली नहीं है, बल्कि रविवार को आयोजित संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) सिविल सेवा की प्रारंभिक परीक्षा के सवालों में इस्तेमाल किए गए हिंदी के शब्द हैं। पूरे प्रश्न पत्र में इसी तरह के शब्दों की भरमार है। हिंदी माध्यम के अभ्यर्थियों का जब इनसे सामना हुआ तो सिर पकड़ लिया। दरअसल ऐसे कठिन शब्द हिंदी माध्यम के परीक्षार्थियों ने कभी भी नहीं पढ़े। परीक्षा देकर लौटे अभ्यर्थियों से जब बात की गई तो उनका सवाल था कि वह ऐसे शब्दों का अर्थ समझें या सवालों का जवाब ढूंढे़। उधर, विशेषज्ञ बताते हैं कि एनसीईआरटी समेत स्कूल-कॉलेज के पाठ्यक्रम में भी ऐसी हिंदी नहीं आती। शायद यही वजह है कि सिविल सेवा में हिंदी माध्यम के सफल होने वाले प्रतिभागियों का प्रतिशत इकाई में आ गया है।

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दरअसल, सवालों में ऐसे-ऐसे शब्दों का इस्तेमाल किया गया था, जिसका न तो आम बोल-चाल की भाषा में चलन है और न ही आमतौर पर लिखे जात हैं। एनसीईआरटी के जिसे पाठ्यक्रम को आधार बनाकर बच्चे सिविल सेवा परीक्षा की तैयार करते हैं, उसमें भी इस तरह के शब्दों का इस्तेमाल नहीं है।
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विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसा अमूमन हर साल होता है। यूपीएससी अपनी परीक्षाओं के लिए प्रश्न पत्र पहले अंग्रेजी में तैयार करवाता है। इसके बाद उनका सीधे हिंदी में अनुवाद कर दिया जाता है। इससे ज्यादा दिक्कत तकनीकी विषयों से जुड़े सवालों में आती है। विज्ञान, अर्थशास्त्र, पर्यावरण, भूगोल जैसे विषयों से जुड़े सवालों में हिंदी के ऐसे शब्द आ जाते हैं, जिनका अर्थ निकाल पाना बेहद कठिन है। इसके लिए प्रतिभागी या तो अंग्रेजी का सहारा लेते हैं या फिर आधे-अधूरे अर्थ के साथ सवालों का जवाब देते हैं। इसमें समय और ऊर्जा जाया होती है।
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हिंदी माध्यम के परिणाम में लगातार गिरावट
हिंदी माध्यम के परीक्षार्थियों के चयन में गिरावट का सिलसिला तब शुरू हुआ, जब वर्ष 2011 में प्रारंभिक परीक्षा में सीसेट को शामिल किया गया। हिंदी माध्यम के छात्र अंग्रेजी कंप्रीहेंसन के सवालों में उलझ जाते हैं क्योंकि इनके अनुवाद जटिल होते हैं। सफलता का ग्राफ देखे तो हिंदी माध्यम के चयनित उम्मीदवार 2013 में 17 प्रतिशत थे। 2014 में यह आंकड़ा 2.11 प्रतिशत था। इसी तरह 2015 में 4.28 प्रतिशत, 2016 में 3.45 प्रतिशत, 2017 में 4.06 प्रतिशत था। 2018 में 2.16 प्रतिशत है। इस साल भी 22-25 छात्र ही हिंदी माध्यम से चुने गए हैं।

क्या कहते हैं एक्सपर्ट
न कॉलेज-स्कूल के पाठ्यक्रम की भाषा है और न एनसीईआरटी की
प्रश्न ऐसे-ऐसे पूछे जा रहे है और शब्दों का चयन ऐसा किया जा रहा है, जिससे मूल विषय ही गलत हो जाता है। यूपीएससी को बेहतर अनुवाद के साथ प्रश्न पूछने की आवश्यकता है। जब तक छात्र अंग्रेजी में प्रश्न को नहीं पढ़ लेता तब तक प्रश्न को समझने में कठिनाई होगी। अंग्रेजी में प्रश्न पढ़ने के आलावा छात्रों के पास कोई रास्ता नहीं है। अनुवादित भाषा ने तो कॉलेज में पढ़ते है और न ही स्कूल के पाठ्यक्रम में पढ़ाई होती है। एनसीईआरटी की भी यह भाषा नहीं है। ग्रामीण परिवेश के बच्चों के लिए तो और भी मुश्किल है। सौ प्रतिशत परीक्षार्थियों की समस्या अनुवादित भाषा ही है। विज्ञान व पर्यावरण से पूछे गए सवालों की भाषा तो समझ से ही परे है। जबकि इन विषयों से 18-30 प्रश्न आते हैं। -सुनिल अभिव्यक्ति, डायरेक्टर, अभिव्यक्ति आईएएस कोचिंग इंस्टीट्यूट

भाषा-प्रवाह अस्वाभाविक लगता है
यूपीएससी प्रारंभिक परीक्षा में हिंदी वाले प्रश्नों में भाषा-प्रवाह अस्वाभाविक लगता है। यूपीएससी को अनुवाद कार्य पर भी विशेष ध्यान देना चाहिए ताकि अभ्यर्थी प्रश्नों को बेहतर तरीके से समझ सकें। इस तरह के शब्दों के चयन से प्रश्न समझने में परेशानी होती है साथ ही उत्तर देने में भी। क्योंकि प्रश्न नहीं समझ में आएगा तो फिर उत्तर देना भी कठिन हो जाता है। -मणिकांत सिंह, डायरेक्टर, द स्टडी एन इंस्टीट्यूट फॉर आईएएस

क्या कहते हैं परीक्षार्थी
यूपीएससी परीक्षा के दौरान हिंदी माध्यम के प्रश्नपत्र में हिंदी के कठिन शब्दों का इस्तेमाल कई सालों से होता आ रहा है। इन शब्दों का मतलब समझना हमारे लिए आसान नहीं रहता। ऐसे प्रश्नों का उत्तर देने के लिए पहले अंग्रेजी का पेपर देखकर अर्थ समझना पड़ता है। कई बार अंग्रेजी का पेपर देखने पर समझ में आता है कि हिंदी में अर्थ का अनर्थ लिखा हुआ है। यूपीएससी की ऐसी लापरवाही समझ से परे है। -अभय तिवारी, परीक्षार्थी


यूपीएससी की वर्ष 2014 की परीक्षा में हिंदी माध्यम के प्रश्नपत्र में इस तरह के कठिन शब्दों का इस्तेमाल किया गया था। छात्रों ने यह मामला उठाया, वहीं एक सांसद ने इसे संसद में भी रखा। देखा गया है कि यूपीएससी अंग्रेजी में बनाए गए प्रश्नपत्र को गूगल ट्रांसलेट करके हूबहू हिंदी माध्यम के प्रश्नपत्र में छाप देता है। इस वजह से छात्रों को बहुत परेशानी झेलनी पड़ रही है। -आयुष राय, परीक्षार्थी

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