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निराशा: दूसरे मास्टर प्लान के तहत गांव में बनाए सामुदायिक केंद्र खंडहर बने, कैग ने 2005 में जताई थी चिंता

Tue, 15 Jun 2021 01:55 AM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Vikas Kumar Updated Tue, 15 Jun 2021 01:55 AM IST
सार

दिल्ली के 365 गांवों में से 75 गांवों में आबादी के पास ग्रामसभा भूमि उपलब्ध होने पर उनमें जल्द से जल्द सामुदायिक केंद्र बनाने की कड़ी में पांच विभागों को जिम्मेदारी सौंपी गई और इन विभागों ने करीब दो साल के दौरान सभी 75 गांवों में सामुदायिक केंद्रों का निर्माण कर दिया और गांव में शहर जैसी सुविधा पाकर ग्रामीणों की खुशी का कोई ठिकाना नहीं था, मगर की खुशी कुछ ही दिन बाद निराशा में बदल गई।

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under the second master plan 2021 the community center built in the village became ruins
दूसरे मास्टर प्लान के अंतर्गत बनाया गया सामुदायिक केंद्र - फोटो : amar ujala

विस्तार

डीडीए ने हाल ही में दिल्ली के चौथे मास्टर प्लान-2041 का ड्राफ्ट जारी किया है और उसमें गांवों के विकास एवं ग्रामीणों का सुविधा उपलब्ध कराने के लिए कई प्रावधान किए गए हैं। इस तरह दिल्ली के दूसरे मास्टर प्लान-2001 में ग्रामीणों को मूलभूत सुविधा मुहैया कराने के लिए गांवों में सामुदायिक केंद्र बनाने का प्रावधान किया था। दिल्ली सरकार ने करीब ढाई दशक पहले 75 गांव में सामुदायिक केंद्र बना भी दिए, लेकिन इनका निर्माण कराने का उद्देश्य आज तक पूरा नहीं हुआ है। खास बात यह है कि इस संबंध में वर्ष 2005 में कैग ने अपनी रिपोर्ट में चिंता जताई थी। इसके बावजूद भी इन सामुदायिक केंद्रों के माध्यम से ग्रामीणों को सुविधा मुहैया कराने की दिशा में कोई पहल नहीं हुई।

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दिल्ली में महानगर परिषद के खत्म होने के बाद वर्ष 1952 के बाद एक बार फिर वर्ष 1993 में विधानसभा गठित होने के बाद सरकार ने दूसरे मास्टर प्लान को अमलीजामा पहनाने की कवायद आरंभ की। इस दौरान गांवों में सामुदायिक केंद्र बनाने का निर्णय लिया गया। दिल्ली के 365 गांवों में से 75 गांवों में आबादी के पास ग्रामसभा भूमि उपलब्ध होने पर उनमें जल्द से जल्द सामुदायिक केंद्र बनाने की कड़ी में पांच विभागों को जिम्मेदारी सौंपी गई और इन विभागों ने करीब दो साल के दौरान सभी 75 गांवों में सामुदायिक केंद्रों का निर्माण कर दिया और गांव में शहर जैसी सुविधा पाकर ग्रामीणों की खुशी का कोई ठिकाना नहीं था, मगर की खुशी कुछ ही दिन बाद निराशा में बदल गई।
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एक भी गांव के सामुदायिक केंद्र के माध्यम से ग्रामीणों को मूलभूत सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में कोई पहल नहीं की गई। इतना ही नहीं, सामुदायिक केंद्रों में शादी आदि कार्यक्रम आयोजित करने के लिए ग्रामीणों को प्रेरित नहीं किया गया। एक से दो एकड़ में बने इन सामुदायिक केंद्रों के परिसर को तो दूर उनके भवन का रखरखाव करने में रूचि नहीं ली गई। इसी तरह इन केंद्रों मे बनाई मार्केट भी आबाद करने की दिशा में कोई पहल नहीं की गई। इस कारण आज करीब-करीब समस्त गांवों में सामुदायिक केंद्र खंडहर में तब्दील हो गए है।
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सरकारी कार्यालय खोल दिया
गांव मुबारिकपुर निवासी विजेंद्र सिंह के अनुसार उनके गांव में करीब डेढ़ एकड़ भूमि पर बनाए गए सामुदायिक केंद्र के माध्यम से ग्रामीणों को एक भी सुविधा मुहैया नहीं कराई गई है। यहां पर पहचान पत्र बनाने के लिए सरकारी कार्यालय खोल रखा है, जबकि ग्रामीणों को चिकित्सा सुविधा के उपलब्ध कराने के लिए यहां डिस्पेंसरी शिफ्ट नहीं गई। भवन जर्जर होने के कारण वर्ष 2015 से गांव वाले डिस्पेंसरी की सुविधा से वंचित हैं।


सबसे बड़ा केंद्र भी उपेक्षित
गांव मदनपुर में करीब दो एकड़ में बना सामुदायिक केंद्र पूरी तरह खंडहर हो चुका है। केंद्र की खिड़कियों एवं अन्य जगह लगे शिशे वर्षों से टूटे पड़े हुए हैं। इस कारण यह खंडहर बन गया है। गांव के बलवंत सिंह बताते हैं कि दिल्ली के समस्त गांवों में बनाए गए केंद्रों में यह सबसे बड़ा केंद्र है, लेकिन इसका ग्रामीणों को सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में कभी उपयोग नहीं हुआ।

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