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खालिद ने नए सिरे से जमानत याचिका दायर की
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नई दिल्ली। दिल्ली दंगों की साजिश के मामले में अवैध गतिविधि रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के तहत गिरफ्तार जेएनयू के पूर्व छात्र नेता उमर खालिद ने नए सिरे से जमानत याचिका दायर की है। खालिद ने पुलिस द्वारा तकनीकी आधार पर पिछली अर्जी पर आपत्ति के बाद नई जमानत याचिका दायर की है। अदालत ने नई याचिका पर पुलिस को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
कड़कड़डूमा अदालत के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमिताभ रावत के समक्ष आरोपी खालिद की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता त्रिदीप पेस ने पुलिस की आपत्ति के बाद जमानत याचिका में जरूरी बदलाव कर नए सिरे से दायर कर दी। अदालत ने पुलिस को जवाब दाखिल करने का निर्देश देते हुए सुनवाई 8 सितंबर तय की है।
इससे पूर्व पुलिस की ओर से पेश विशेष लोक अभियोजक अमित प्रसाद ने उस याचिका पर आपत्ति जताई, जिसमें कथित तौर पर अभियोजन पर लंबी रणनीति अपनाने का आरोप लगाया गया था। उन्होंने कहा आरोपी ने जो अंतरिम आवेदन दायर किया है उसमें यह आरोप गलत है कि अभियोजन पक्ष द्वारा की गई आपत्तियां देरी करने वाली रणनीति हैं।
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याची के अधिवक्ता ने नई जमानत याचिका दायर करते हुए तर्क रखा कि यह अदालत यूएपीए अधिनियम के तहत नामित एक विशेष अदालत है। इसलिए सीआरपीसी की धारा 437 के तहत सभी शक्तियों का प्रयोग कर करती है। याचिका पर 3 सितंबर को हुई आखिरी सुनवाई में खालिद ने कोर्ट से कहा था कि आरोपपत्र में बढ़ा-चढ़ा कर आरोप लगाए गए हैं। खालिद ने कहा था कि आरोपपत्र का कोई तथ्यात्मक आधार नहीं है और किसी वेब सीरीज या न्यूज स्क्रिप्ट जैसा है।
खालिद सहित कई अन्य लोगों पर इस मामले में आतंकवाद विरोधी कानून के तहत मामला दर्ज किया गया है। उन पर फरवरी 2020 की हिंसा का मास्टर माइंड होने का आरोप है। दंगों में 53 लोग मारे गए थे। हाल ही में मामले में आरोपी इशरत जहां व खालिद सैफी ने भी सीआरपीसी की धारा 439 के तहत जमानत आवेदन को तकनीकी खामी मानते हुए धारा 437 के तहत अर्जी दायर की थी।
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कड़कड़डूमा अदालत के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमिताभ रावत के समक्ष आरोपी खालिद की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता त्रिदीप पेस ने पुलिस की आपत्ति के बाद जमानत याचिका में जरूरी बदलाव कर नए सिरे से दायर कर दी। अदालत ने पुलिस को जवाब दाखिल करने का निर्देश देते हुए सुनवाई 8 सितंबर तय की है।
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इससे पूर्व पुलिस की ओर से पेश विशेष लोक अभियोजक अमित प्रसाद ने उस याचिका पर आपत्ति जताई, जिसमें कथित तौर पर अभियोजन पर लंबी रणनीति अपनाने का आरोप लगाया गया था। उन्होंने कहा आरोपी ने जो अंतरिम आवेदन दायर किया है उसमें यह आरोप गलत है कि अभियोजन पक्ष द्वारा की गई आपत्तियां देरी करने वाली रणनीति हैं।
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याची के अधिवक्ता ने नई जमानत याचिका दायर करते हुए तर्क रखा कि यह अदालत यूएपीए अधिनियम के तहत नामित एक विशेष अदालत है। इसलिए सीआरपीसी की धारा 437 के तहत सभी शक्तियों का प्रयोग कर करती है। याचिका पर 3 सितंबर को हुई आखिरी सुनवाई में खालिद ने कोर्ट से कहा था कि आरोपपत्र में बढ़ा-चढ़ा कर आरोप लगाए गए हैं। खालिद ने कहा था कि आरोपपत्र का कोई तथ्यात्मक आधार नहीं है और किसी वेब सीरीज या न्यूज स्क्रिप्ट जैसा है।
खालिद सहित कई अन्य लोगों पर इस मामले में आतंकवाद विरोधी कानून के तहत मामला दर्ज किया गया है। उन पर फरवरी 2020 की हिंसा का मास्टर माइंड होने का आरोप है। दंगों में 53 लोग मारे गए थे। हाल ही में मामले में आरोपी इशरत जहां व खालिद सैफी ने भी सीआरपीसी की धारा 439 के तहत जमानत आवेदन को तकनीकी खामी मानते हुए धारा 437 के तहत अर्जी दायर की थी।