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आईएसआईएस के लिए युवाओं की भर्ती मामले में दो आरोपियों ने कबूला गुनाह
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आईएसआईएस के लिए युवाओं की भर्ती मामले में दो आरोपियों ने कबूला गुनाह
नई दिल्ली। आईएसआईएस के लिए युवाओं की भर्ती के मामले में दो आरोपियों ने पटियाला हाउस कोर्ट के समक्ष अपना गुनाह कबूल कर लिया। आरोपियों ने आतंकवादी संगठन का कार्यकर्ता बनने और देश में आतंकी गतिविधियां चलाने के लिए सोशल मीडिया के विभिन्न मंचों के जरिए युवाओं की भर्ती करने की साजिश रची थी। विशेष न्यायाधीश प्रवीण सिंह के समक्ष आरोपी अमजद खान और मोहम्मद अलीम ने आवेदन देकर गुनाह कबूला। आरोपियों की अर्जी पर अदालत 11 सितंबर को संज्ञान ले सकती है।
आरोपियों ने दोष स्वीकार करते हुए अदालत से कहा कि उन पर लगाए गए आरोपों को लेकर उन्हें पछतावा है और भविष्य में ऐसी किसी भी गतिविधि में शामिल नहीं होंगे। आरोपियों की ओर से वकील कौसर खान ने अदालत को बताया कि आरोपी मुख्यधारा में लौटना और खुद का पुनर्वास चाहते हैं। इसी मामले में 6 आरोपियों ने 6 अगस्त को अपना गुनाह कबूल किया था। अदालत ने उन्हें आईपीसी की धारा 120 बी (आपराधिक साजिश) और कड़ी गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी ठहराया था। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने मामले में कहा कि अभियुक्तों ने जुनूद-उल-खलीफा-फिल-हिंद संगठन का गठन किया था, जो भारत में खिलाफत स्थापित करने और आईएसआईएस के प्रति निष्ठा रखने वाले युवाओं की सोशल मीडिया के जरिए भर्ती को अंजाम दे रहा था। सीरिया में रहने वाले यूसुफ-अल-हिंदी के इशारे पर युवाओं की भर्ती और भारत में आतंकी कृत्यों को अंजाम दे रहा था। इस मामले में एनआईए ने 9 दिसंबर 2015 को आईपीसी की विभिन्न धाराओं और यूएपीए के तहत आरोपियों पर मुकदमा दर्ज किया था।
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नई दिल्ली। आईएसआईएस के लिए युवाओं की भर्ती के मामले में दो आरोपियों ने पटियाला हाउस कोर्ट के समक्ष अपना गुनाह कबूल कर लिया। आरोपियों ने आतंकवादी संगठन का कार्यकर्ता बनने और देश में आतंकी गतिविधियां चलाने के लिए सोशल मीडिया के विभिन्न मंचों के जरिए युवाओं की भर्ती करने की साजिश रची थी। विशेष न्यायाधीश प्रवीण सिंह के समक्ष आरोपी अमजद खान और मोहम्मद अलीम ने आवेदन देकर गुनाह कबूला। आरोपियों की अर्जी पर अदालत 11 सितंबर को संज्ञान ले सकती है।
आरोपियों ने दोष स्वीकार करते हुए अदालत से कहा कि उन पर लगाए गए आरोपों को लेकर उन्हें पछतावा है और भविष्य में ऐसी किसी भी गतिविधि में शामिल नहीं होंगे। आरोपियों की ओर से वकील कौसर खान ने अदालत को बताया कि आरोपी मुख्यधारा में लौटना और खुद का पुनर्वास चाहते हैं। इसी मामले में 6 आरोपियों ने 6 अगस्त को अपना गुनाह कबूल किया था। अदालत ने उन्हें आईपीसी की धारा 120 बी (आपराधिक साजिश) और कड़ी गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी ठहराया था। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने मामले में कहा कि अभियुक्तों ने जुनूद-उल-खलीफा-फिल-हिंद संगठन का गठन किया था, जो भारत में खिलाफत स्थापित करने और आईएसआईएस के प्रति निष्ठा रखने वाले युवाओं की सोशल मीडिया के जरिए भर्ती को अंजाम दे रहा था। सीरिया में रहने वाले यूसुफ-अल-हिंदी के इशारे पर युवाओं की भर्ती और भारत में आतंकी कृत्यों को अंजाम दे रहा था। इस मामले में एनआईए ने 9 दिसंबर 2015 को आईपीसी की विभिन्न धाराओं और यूएपीए के तहत आरोपियों पर मुकदमा दर्ज किया था।
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