सौम्या हत्याकांड : 11 साल से जेल में बंद आरोपी ने सुनवाई में देरी के आधार पर मांगी जमानत
- मुकदमे की सुनवाई में देरी का दिया हवाला, संवैधानिक अधिकार का बताया उल्लंघन
- जिगिषा घोष हत्या मामले में अदालत सुना चुकी है उम्रकैद की सजा
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करीब 12 साल पुराने टीवी पत्रकार सौम्या विश्वनाथन मामले में एक आरोपी ने सुनवाई में देरी का हवाला देते हुए अदालत से जमानत मांगी है। इस आरोपी को जिगिषा घोष हत्या मामले में अन्य आरोपियों के साथ 28 मार्च 2009 को गिरफ्तार किया गया था। यह आरोपी करीब साढ़े 11 साल से हिरासत में है। जिगिषा घोष मामले में इसे उम्रकैद की सजा मिली थी।
मामले में आरोपी बलजीत मलिक उर्फ पोपी ने साकेत अदालत में याचिका दायर जमानत देने का आग्रह किया है। अधिवक्ता अमित कुमार के जरिए दायर याचिका में आरोपी कहा है कि मुकदमे की सुनवाई काफी समय से लंबित है। सुनवाई में विलंब से उसके कानूनी अधिकारों का हनन हो रहा है।
याचिका में कहा गया है कि सौम्या विश्वनाथ हत्या मामले में 30 सितंबर 2008 को वसंत कुंज थाने में अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। पुलिस ने जिगिषा घोष हत्या मामले में पूछताछ के आधार पर पुलिस ने बलजीत मलिक तथा अन्य आरोपियों को इस मामले में आरोपी बनाया था।
दिल्ली पुलिस ने इसके बाद इस मामले में मकोका लगा दिया था। इसके बाद आरोपियों को जमानत नहीं मिली थी। याचिका में कहा गया है कि इस मामले में मकोका लगाने का कोई आधार नहीं है। पुलिस ने आरोपी को संगठित अपराध सिंडीकेट का सदस्य बताया था।
याचिका में कहा गया है कि हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई छह माह में पूरी करने का आदेश 27 फरवरी 2019 को दिया था। इसके बाद भी सुनवाई अभी तक पूरी नहीं हुई है। याचिका में अधिवक्ता अमित कुमार ने कहा है कि सुनवाई की लंबी अवधि के कारण उनका मुवक्किल जमानत पाने का अधिकारी है।
संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत अविलंब सुनवाई उसका अधिकार है। मामले की सुनवाई न होने से उसके अधिकार का उल्लंघन हो रहा है। वहीं मुकदमे की जल्द सुनवाई प्रत्येक आरोपी का मानवाधिकार है। ऐसा न होने से आरोपी का न्यायिक प्रक्रिया में विश्वास कम होता है।
याचिका में ये भी कहा गया है कि कोरोना महामारी से पूरी दुनिया प्रभावित है। सुप्रीम कोर्ट तथा हाईकोर्ट के आदेश पर कैदियों को अंतरिम जमानत पर रिहा किया गया था। इस नजरिये से भी वह जमानत पाने का अधिकार है क्योंकि आरोप साबित हुए बिना आरोपी को अनिश्चितकाल के लिए जेल में नहीं रखा जा सकता। इसके बाद भी वह साढ़े 11 साल से जेल में है। कोरोना काल में उसे जेल में रखना अमानवीय होगा।
वहीं मामले में अभियोजन के अधिकतर गवाहों के बयान दर्ज हो चुके हैं। इस नजरिये से भी वह जमानत पाने का हकदार है। अदालत ने जिगिषा घोष हत्या मामले में बलजीत को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। हालांकि मामले में अन्य आरोपी रवि कपूर को फांसी की सजा सुनाई गई थी।