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दिल्ली विधानसभा की सुरंग का होगा नवीनीकरण
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दिल्ली विधानसभा में सुरंग।
- फोटो : Ashram
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नई दिल्ली। दिल्ली विधानसभा को लाल किला से जोड़ने वाली करीब 5.6 किमी लंबी सुरंग का नवीनीकरण जल्द शुरू होने जा रहा है। इसके पूरा होते ही इसे आम लोगों के लिए खोल दिया जाएगा। हालांकि, इस दौरान कोई नई खुदाई नहीं की जाएगी। अंग्रेजों के वक्त इस सुरंग का इस्तेमाल स्वतंत्रता सेनानियों को विधानसभा से लाल किला तक ले जाने के लिए किया जाता था। इसके सार्वजनिक होने से आम दिल्लीवाले ऐतिहासिक विरासत देख सकेंगे।
विधानसभा अध्यक्ष रामनिवास गोयल ने बताया कि 1993 में जब वह विधायक बने थे तो उन्होंने विधानसभा में एक सुरंग होने की बात सुनी थी। उन्होंने इसका इतिहास खोजने की कोशिश की, लेकिन पर्याप्त जानकारी नहीं मिल सकी। 2016 में एक बार फिर उन्होंने इस दिशा में कोशिश की और यह सुरंग मिल गई है। गोयल के मुताबिक, सुरंग की आगे खुदाई नहीं होगी। इसकी वजह यह है कि मेट्रो परियोजना और सीवर निर्माण की वजह से सुरंग के रास्ते नष्ट हो गए हैं। अंग्रेजों ने इस सुरंग का इस्तेमाल स्वतंत्रता सेनानियों को अदालत में लाने के लिए किया था। दिल्ली विधानसभा और लाल किले की दूरी करीब 5.6 किलोमीटर है।
गोयल के मुताबिक, इतिहास में प्रमाण मिलते हैं कि दिल्ली विधानसभा की वर्तमान इमारत को स्वतंत्रता संग्राम के अंतिम वर्षों में अंग्रेजों ने अदालत के रूप मे इस्तेमाल किया। इसका समय 1926-27 से 1947 तक माना जा रहा है।
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फांसी घर में बनेगा स्वतंत्रता सेनानियों का तीर्थ स्थल
विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि विधानसभा परिसर में फांसी के कमरे की मौजूदगी के बारे में पता था, लेकिन इसे कभी नहीं खोला गया था। आजादी के 75वें साल के अवसर पर उन्होंने इस कमरे का निरीक्षण करने का फैसला किया था। अब इस कमरे को स्वतंत्रता सेनानियों के लिए एक श्रद्धांजलि के रूप में तीर्थ स्थल में बदला जाएगा। अगले साल तक पर्यटक भी इसे देख सकेंगे।
दिल्ली विधानसभा इमारत का इतिहास
विधानसभा की इमारत के बारे में प्रमाण मिलते हैं कि दिल्ली के देश की राजधानी बनने के बाद 1911 से इस इमारत को सेंट्रल लेजेस्लेटिव एसेंबली यानी अंग्रेजों ने इस इमारत को अपने संसद भवन के रूप में उपयोग किया। यह इमारत 1926 तक अंग्रेजों की संसद रही। 14 साल तक यह इमारत अंग्रेजों की संसद रही और 1926 से 1947 तक अंग्रेजों की अदालत।
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विधानसभा अध्यक्ष रामनिवास गोयल ने बताया कि 1993 में जब वह विधायक बने थे तो उन्होंने विधानसभा में एक सुरंग होने की बात सुनी थी। उन्होंने इसका इतिहास खोजने की कोशिश की, लेकिन पर्याप्त जानकारी नहीं मिल सकी। 2016 में एक बार फिर उन्होंने इस दिशा में कोशिश की और यह सुरंग मिल गई है। गोयल के मुताबिक, सुरंग की आगे खुदाई नहीं होगी। इसकी वजह यह है कि मेट्रो परियोजना और सीवर निर्माण की वजह से सुरंग के रास्ते नष्ट हो गए हैं। अंग्रेजों ने इस सुरंग का इस्तेमाल स्वतंत्रता सेनानियों को अदालत में लाने के लिए किया था। दिल्ली विधानसभा और लाल किले की दूरी करीब 5.6 किलोमीटर है।
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गोयल के मुताबिक, इतिहास में प्रमाण मिलते हैं कि दिल्ली विधानसभा की वर्तमान इमारत को स्वतंत्रता संग्राम के अंतिम वर्षों में अंग्रेजों ने अदालत के रूप मे इस्तेमाल किया। इसका समय 1926-27 से 1947 तक माना जा रहा है।
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फांसी घर में बनेगा स्वतंत्रता सेनानियों का तीर्थ स्थल
विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि विधानसभा परिसर में फांसी के कमरे की मौजूदगी के बारे में पता था, लेकिन इसे कभी नहीं खोला गया था। आजादी के 75वें साल के अवसर पर उन्होंने इस कमरे का निरीक्षण करने का फैसला किया था। अब इस कमरे को स्वतंत्रता सेनानियों के लिए एक श्रद्धांजलि के रूप में तीर्थ स्थल में बदला जाएगा। अगले साल तक पर्यटक भी इसे देख सकेंगे।
दिल्ली विधानसभा इमारत का इतिहास
विधानसभा की इमारत के बारे में प्रमाण मिलते हैं कि दिल्ली के देश की राजधानी बनने के बाद 1911 से इस इमारत को सेंट्रल लेजेस्लेटिव एसेंबली यानी अंग्रेजों ने इस इमारत को अपने संसद भवन के रूप में उपयोग किया। यह इमारत 1926 तक अंग्रेजों की संसद रही। 14 साल तक यह इमारत अंग्रेजों की संसद रही और 1926 से 1947 तक अंग्रेजों की अदालत।