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टूलकिट: एक और नया खुलासा, टिकरी बॉर्डर पर 20 से 27 जनवरी के बीच मौजूद था शांतनु, इन लोगों से किया था संपर्क
Tue, 16 Feb 2021 10:09 PM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: शाहरुख खान
Updated Tue, 16 Feb 2021 10:09 PM IST
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Shantanu Muluk
- फोटो : अमर उजाला
टूलकिट के जरिये गलत खबरों का प्रचार-प्रसार कर देश की छवि करने साजिश रची जा रही थी। इसलिए न सिर्फ सोशल मीडिया पर प्लानिंग हुई बल्कि ग्राउंड लेवल पर भी जाकर काम किया गया। पुलिस सूत्रों का कहना है कि इसी कड़ी में 20 से 27 जनवरी के बीच शांतनु मुलुक दिल्ली के टिकरी बॉर्डर पर किसानों के बीच मौजूद था।
यहां वह किन-किन लोगों से मिला और उसने क्या-क्या किया फिलहाल इसका पता नहीं चल पाया है। पुलिस आशंका जता रही है कि शांतनु यहां पंजाब और हरियाणा के कुछ लोकल पत्रकारों व किसान नेताओं के संपर्क था।
पुलिस इसके लिए टेक्नीकल सर्विलांस की मदद से सबूत जुटाने में जुटी हुई है। सूत्रों का कहना है कि टेक्नीकल सर्विलांस से उसकी मौजूदगी टिकरी बॉर्डर पर मिली है। पुलिस अधिकारी सभी की सीडीआर निकलवा रहे हैं। इसके बाद पता चल सकेगा कि यह लोग किन-किन लोगों के संपर्क में थे।
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वहीं दिल्ली से भी कुछ लोगों के इनके साथ जुड़ने का पता चला है। उसकी भी पड़ताल जारी है। हालांकि दिशा रवि का कहना है कि वह लोग बस किसानों के समर्थन में थे। उनका देश की छवि को खराब करने की कोई मंशा नहीं थी।
वहीं पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अब तक मिले सबूतों से यह पूरी तरह साफ है कि यह सभी एक मकसद के साथ आंदोलन के जरिये अपना एक्शन प्लान लागू कर रहे थे।
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यहां वह किन-किन लोगों से मिला और उसने क्या-क्या किया फिलहाल इसका पता नहीं चल पाया है। पुलिस आशंका जता रही है कि शांतनु यहां पंजाब और हरियाणा के कुछ लोकल पत्रकारों व किसान नेताओं के संपर्क था।
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पुलिस इसके लिए टेक्नीकल सर्विलांस की मदद से सबूत जुटाने में जुटी हुई है। सूत्रों का कहना है कि टेक्नीकल सर्विलांस से उसकी मौजूदगी टिकरी बॉर्डर पर मिली है। पुलिस अधिकारी सभी की सीडीआर निकलवा रहे हैं। इसके बाद पता चल सकेगा कि यह लोग किन-किन लोगों के संपर्क में थे।
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वहीं दिल्ली से भी कुछ लोगों के इनके साथ जुड़ने का पता चला है। उसकी भी पड़ताल जारी है। हालांकि दिशा रवि का कहना है कि वह लोग बस किसानों के समर्थन में थे। उनका देश की छवि को खराब करने की कोई मंशा नहीं थी।
वहीं पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अब तक मिले सबूतों से यह पूरी तरह साफ है कि यह सभी एक मकसद के साथ आंदोलन के जरिये अपना एक्शन प्लान लागू कर रहे थे।
खालिस्तानी संगठन पाएटिक जस्टिस फाउंडेशन की ओर से जूम कॉल मीटिंग एमओ धालीवाल की कर्मचारी व कनाडा निवासी महिला पुनीत की ओर से आयोजित की गई थी। इसमें वर्ल्ड सिख ऑर्गेनाइनजेशन की फाउंडर और पाएटिक जस्टिस फाउंडेशन की को-फाउनंडर अनिता लाल भी शामिल थी।
दिशा ने खुलासा किया है कि टूलकिट तैयार करने में उसने भी बहुत अहम भूमिका अदा की थी। अब पुलिस ने जूम को पत्र लिखकर 11 जनवरी को हुई इस मीटिंग में शामिल लोगों की जानकारी मांगी है। हालांकि जांच के दौरान पुलिस को यह भी पता चला है कि मीटिंग में कई लोग बिना आईडी और बदले हुए नाम से मीटिंग में शामिल हुए थे।
दिशा ने खुलासा किया है कि टूलकिट तैयार करने में उसने भी बहुत अहम भूमिका अदा की थी। अब पुलिस ने जूम को पत्र लिखकर 11 जनवरी को हुई इस मीटिंग में शामिल लोगों की जानकारी मांगी है। हालांकि जांच के दौरान पुलिस को यह भी पता चला है कि मीटिंग में कई लोग बिना आईडी और बदले हुए नाम से मीटिंग में शामिल हुए थे।