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पटियाला कोर्ट ने दिशा रवि को दी वकील से बात करने की इजाजत, गिरफ्तारी से जुड़े दस्तावेज भी मिलेंगे
Tue, 16 Feb 2021 05:11 PM IST
पूजा त्रिपाठी
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: पूजा त्रिपाठी
Updated Tue, 16 Feb 2021 05:11 PM IST
सार
ग्रेटा थनबर्ग टूलकिट मामले में पर्यावरण एक्टिविस्ट दिशा रवि की गिरफ्तारी को लेकर दिल्ली पुलिस लगातार सवालों के घेरे में हैं। इस मामले में आज दिल्ली पुलिस के कमिश्नर एसएन श्रीवास्तव ने अपना पक्ष रखा। वहीं पुलिस द्वारा जिस जूम मीटिंग की बात अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में कही गई थी उसमें कौन-कौन शामिल है उसे लेकर पुलिस ने जूम को पत्र लिखा है। वहीं टूलकिट मामले में खालिस्तानी एंगल के बाद पाकिस्तान के आईएसआई का नाम भी जुड़ रहा है। इस मामले में आरोपी निकिता जैकब और शांतनु की अग्रिम जमानत की याचिका पर आज सुनवाई भी होनी है। पढ़ें दिनभर के अपडेट्स...
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दिशा रवि (फाइल फोटो)
- फोटो : Facebook
विस्तार
पटियाला कोर्ट ने दिशा रवि को दी वकील से बात करने की इजाजत
पटियाला कोर्ट ने दिशा से उसकी मां और परिवार के साथ वकील से बात करने की इजाजत दे दी है। कोर्ट ने उसे टूलकिट मामले में एफआईआर की कॉपी और उसकी गिरफ्तारी से जुड़े अन्य दस्तावेजों भी उपलब्ध कराने के लिए कहा है।
दिल्ली महिला आयोग ने दिशा रवि की गिरफ्तारी को लेकर डिप्टी कमिश्नर को भेजा नोटिस
दिशा रवि की गिरफ्तारी के मामले में आज दिल्ली महिला आयोग ने दिल्ली पुलिस के साइबर क्राइम सेल के डिप्टी कमिश्नर को नोटिस भेजा है। इस नोटिस में आयोग ने पुलिस से एफआईआर की कॉपी मांगने के साथ ही दिशा को स्थानीय कोर्ट में ट्रांजिट रिमांड के लिए न पेश किए जाने का कारण और डिटेल एक्शन रिपोर्ट भी मांगी है।
दिल्ली पुलिस कमिश्नर ने दिशा रवि की गिरफ्तारी पर रखा अपना पक्ष
दिल्ली पुलिस कमिश्नर एसएन श्रीवास्तव ने कहा कि, दिशा रवि की गिरफ्तारी कानून और प्रक्रियाओं का पालन करते हुए हुई है। कानून 22 साल और 50 साल की उम्र में कोई अंतर नहीं करता। कोर्ट ने गिरफ्तारी को सही मानते हुए 5 दिन की पुलिस हिरासत में भेजा। जो लोग कहते हैं कि गिरफ्तारी में कोई कमी है ये बिल्कुल मिथ्या है।
पुलिस ने ‘जूम’ एप से 11 जनवरी को हुई ऑनलाइन बैठक में शामिल लोगों की जानकारी मांगी
दिल्ली पुलिस ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले एप ‘जूम’ को पत्र लिख कर, कथित तौर पर खालिस्तान समर्थक एक समूह द्वारा किसानों के प्रदर्शन के समर्थन में ‘टूलकिट’ तैयार करने के लिए 11 जनवरी को आयोजित ऑनलाइन बैठक में शामिल हुए लोगों के संबंध में जानकारी मांगी है। पुलिस ने आरोप लगाया है कि गणतंत्र दिवस पर ट्रैक्टर परेड के दौरान राष्ट्रीय राजधानी में हुई हिंसा से कुछ दिन पहले ‘जूम’ एप पर आयोजित बैठक में मुम्बई की वकील निकिता जैकब और पुणे के इंजीनियर शांतनु सहित 70 लोगों ने हिस्सा लिया था।
खालिस्तान के बाद पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई से भी जुड़ रहे ‘टूलकिट’ के तार
‘टूलकिट’ मामले की जांच में पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई से जुड़े भजन सिंह भिंडर उर्फ इकबाल चौधरी और पीटर फ्रेडरिक के नाम सामने आए हैं। पुलिस को टूलकिट सूची में इन दोनों के नाम मिले हैं। अब इसकी पड़ताल की जा रही है कि इसके लिए आईएसआई की ओर से फंडिंग तो नहीं हुई। पुलिस का कहना है कि निकिता जैकब और शांतनु की गिरफ्तारी के बाद ही इसका खुलासा हो पाएगा। पुलिस के मुताबिक, टूलकिट में कब क्या होना, आगे इस पर कैसे काम करना है और किस-किसको भेजना है, इस पर 11 जनवरी को जूम मीटिंग में फैसला लिया गया था। इसमें खालिस्तान समर्थक एमओ धालीवाल, दिशा रवि, निकिता और शांतनु के अलावा 70 लोग शामिल थे। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जूम से उस दिन हुई मीटिंग में शामिल लोगों की जानकारी भी जुटाई जा रही है।
शांतनु ने तैयार करवाई थी टूलकिट
दिशा से मिले डिजिटल सुबूतों से पता चला है कि पुणे निवासी सामाजिक कार्यकर्ता और इंजीनियर शांतनु ने टूलकिट तैयार करवाई थी और इसके लिए उसने एक ई-मेल एड्रेस तैयार किया था। इससे ही टूलकिट भेजी गई। निकिता और दिशा ने उसमें एडिटर की भूमिका अदा की। जूम मीटिंग में एमओ धालीवाल व अन्य ने इसका ड्राफ्ट तैयार किया था। पुलिस सूत्रों का कहना है कि आईटीओ पर ट्रैक्टर हादसे में मरे किसान रवनीत सिंह की मौत को पुलिस की गोली से मौत बताना भी इसका ही हिस्सा था।
कब क्या करना है, यह टूलकिट से तय किया गया
टूलकिट के जरिए यह तय किया गया कि आंदोलन में कब-कब और क्या-क्या करना है। इसको किसे भेजना है। इसमें एनजीओ, मीडिया हाउस व अन्य संस्थाएं भी शामिल हैं। हैशटैग का इस्तेमाल कैसे करवाना है, इसका भी जिक्र किया गया। एक हजार से ज्यादा लोगों को टूलकिट भेजी गई थी और इसमें भजन और पीटर के नाम भी शामिल थे, इसलिए माना जा रहा है कि इस पूरे मामले से आईएसआई भी जुड़ी हुई है। दिशा ने टूलकिट को अपनी एक संस्था से जुड़ी स्वीडन की पर्यावरण कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग को भेजा। ग्रेटा ने गलती से टूलकिट को ट्विटर पर साझा कर दिया और ट्रेंड होने के बाद पुलिस की इस पर नजर पड़ी।
दिशा ने ग्रेटा से ट्वीट हटाने को कहा
मामला बिगड़ते देख दिशा ने इससे जुड़े सुबूत मिटना शुरू कर दिए। उसने ग्रेटा से ट्वीट डिलीट करने के लिए कहा। ग्रेटा ने ऐसा कर भी दिया, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। पुलिस के मुताबिक खुद दिशा ने गूगल से टूलकिट से जुड़े लिंक को हटाना शुरू कर दिया, लेकिन तब तक पुलिस के पास कई स्क्रीनशॉट आ चुके थे। दूसरी ओर पुलिस ने जब दिशा को गिरफ्तार किया तो उसके फोन व दस्तावेज से अहम सुराग हाथ लगे। हालांकि मोबाइल में काफी चीजों को उसने डिलीट कर दिया, लेकिन पुलिस उनको हासिल करने का प्रयास कर रही है।
दुनियाभर में भारत की छवि खराब करने की थी साजिश
टूलकिट के जरिये खालिस्तानी समर्थक देश ही नहीं पूरे विश्व में भारत की छवि खराब करने की साजिश रच रहे थे। जांच में सामने आया है कि भारतीय संस्कृति को नुकसान पहुंचाने के अलावा विदेशों में भारतीय दूतावास को निशाना बनाने साजिश थी। षड्यंत्र था कि किसानों के समर्थन में लोग भारतीय दूतावासों का घेराव कर हंगामा करें।
26 जनवरी को फिजिकल एक्शन की बात कही गई थी
टूलकिट के जरिये 23 जनवरी को टूवीट स्टॉर्म शुरू करना था। इसके साथ ही हैशटैग के जरिये डिजिटल स्ट्राइक शुरू करनी थी। वहीं, 26 जनवरी को फिजिकल एक्शन के साथ दिल्ली में घुसने और बॉर्डर पर वापस लौटने की बात की गई थी।
परिजनों की मौजूदगी में किया दिशा रवि को गिरफ्तार
दिशा की गिरफ्तारी पर उठ रहे सवालों का जवाब देते हुए दिल्ली पुलिस ने सोमवार को सफाई दी कि बंगलूरू में दिशा की गिरफ्तारी उसकी मां और लोकल पुलिस की मौजूदगी में की गई। इसकी सूचना दिशा के वकील को भी दी गई। चूंकि पुलिस की टीम 24 घंटे से पहले दिशा को लेकर दिल्ली आ गई, इसलिए उसकी ट्रांजिट रिमांड भी नहीं ली गई। यहां दिशा के वकील जब कोर्ट में पेश नहीं हुए तो उनको अपना पक्ष रखने के लिए वकील भी उपलब्ध कराया गया।
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पटियाला कोर्ट ने दिशा से उसकी मां और परिवार के साथ वकील से बात करने की इजाजत दे दी है। कोर्ट ने उसे टूलकिट मामले में एफआईआर की कॉपी और उसकी गिरफ्तारी से जुड़े अन्य दस्तावेजों भी उपलब्ध कराने के लिए कहा है।
दिल्ली महिला आयोग ने दिशा रवि की गिरफ्तारी को लेकर डिप्टी कमिश्नर को भेजा नोटिस
दिशा रवि की गिरफ्तारी के मामले में आज दिल्ली महिला आयोग ने दिल्ली पुलिस के साइबर क्राइम सेल के डिप्टी कमिश्नर को नोटिस भेजा है। इस नोटिस में आयोग ने पुलिस से एफआईआर की कॉपी मांगने के साथ ही दिशा को स्थानीय कोर्ट में ट्रांजिट रिमांड के लिए न पेश किए जाने का कारण और डिटेल एक्शन रिपोर्ट भी मांगी है।
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Delhi Commission for Women sends notice to Dy Police Commissioner, Cyber Crime Cell, Delhi Police over Disha Ravi's arrest. Commission asks Police to provide copy of FIR, reasons for allegedly not producing her before local court for transit remand & detailed action taken report. pic.twitter.com/MEZKdcH4VR
विज्ञापन विज्ञापन— ANI (@ANI) February 16, 2021
दिल्ली पुलिस कमिश्नर ने दिशा रवि की गिरफ्तारी पर रखा अपना पक्ष
दिल्ली पुलिस कमिश्नर एसएन श्रीवास्तव ने कहा कि, दिशा रवि की गिरफ्तारी कानून और प्रक्रियाओं का पालन करते हुए हुई है। कानून 22 साल और 50 साल की उम्र में कोई अंतर नहीं करता। कोर्ट ने गिरफ्तारी को सही मानते हुए 5 दिन की पुलिस हिरासत में भेजा। जो लोग कहते हैं कि गिरफ्तारी में कोई कमी है ये बिल्कुल मिथ्या है।
पुलिस ने ‘जूम’ एप से 11 जनवरी को हुई ऑनलाइन बैठक में शामिल लोगों की जानकारी मांगी
दिल्ली पुलिस ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले एप ‘जूम’ को पत्र लिख कर, कथित तौर पर खालिस्तान समर्थक एक समूह द्वारा किसानों के प्रदर्शन के समर्थन में ‘टूलकिट’ तैयार करने के लिए 11 जनवरी को आयोजित ऑनलाइन बैठक में शामिल हुए लोगों के संबंध में जानकारी मांगी है। पुलिस ने आरोप लगाया है कि गणतंत्र दिवस पर ट्रैक्टर परेड के दौरान राष्ट्रीय राजधानी में हुई हिंसा से कुछ दिन पहले ‘जूम’ एप पर आयोजित बैठक में मुम्बई की वकील निकिता जैकब और पुणे के इंजीनियर शांतनु सहित 70 लोगों ने हिस्सा लिया था।
खालिस्तान के बाद पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई से भी जुड़ रहे ‘टूलकिट’ के तार
‘टूलकिट’ मामले की जांच में पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई से जुड़े भजन सिंह भिंडर उर्फ इकबाल चौधरी और पीटर फ्रेडरिक के नाम सामने आए हैं। पुलिस को टूलकिट सूची में इन दोनों के नाम मिले हैं। अब इसकी पड़ताल की जा रही है कि इसके लिए आईएसआई की ओर से फंडिंग तो नहीं हुई। पुलिस का कहना है कि निकिता जैकब और शांतनु की गिरफ्तारी के बाद ही इसका खुलासा हो पाएगा। पुलिस के मुताबिक, टूलकिट में कब क्या होना, आगे इस पर कैसे काम करना है और किस-किसको भेजना है, इस पर 11 जनवरी को जूम मीटिंग में फैसला लिया गया था। इसमें खालिस्तान समर्थक एमओ धालीवाल, दिशा रवि, निकिता और शांतनु के अलावा 70 लोग शामिल थे। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जूम से उस दिन हुई मीटिंग में शामिल लोगों की जानकारी भी जुटाई जा रही है।
शांतनु ने तैयार करवाई थी टूलकिट
दिशा से मिले डिजिटल सुबूतों से पता चला है कि पुणे निवासी सामाजिक कार्यकर्ता और इंजीनियर शांतनु ने टूलकिट तैयार करवाई थी और इसके लिए उसने एक ई-मेल एड्रेस तैयार किया था। इससे ही टूलकिट भेजी गई। निकिता और दिशा ने उसमें एडिटर की भूमिका अदा की। जूम मीटिंग में एमओ धालीवाल व अन्य ने इसका ड्राफ्ट तैयार किया था। पुलिस सूत्रों का कहना है कि आईटीओ पर ट्रैक्टर हादसे में मरे किसान रवनीत सिंह की मौत को पुलिस की गोली से मौत बताना भी इसका ही हिस्सा था।
कब क्या करना है, यह टूलकिट से तय किया गया
टूलकिट के जरिए यह तय किया गया कि आंदोलन में कब-कब और क्या-क्या करना है। इसको किसे भेजना है। इसमें एनजीओ, मीडिया हाउस व अन्य संस्थाएं भी शामिल हैं। हैशटैग का इस्तेमाल कैसे करवाना है, इसका भी जिक्र किया गया। एक हजार से ज्यादा लोगों को टूलकिट भेजी गई थी और इसमें भजन और पीटर के नाम भी शामिल थे, इसलिए माना जा रहा है कि इस पूरे मामले से आईएसआई भी जुड़ी हुई है। दिशा ने टूलकिट को अपनी एक संस्था से जुड़ी स्वीडन की पर्यावरण कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग को भेजा। ग्रेटा ने गलती से टूलकिट को ट्विटर पर साझा कर दिया और ट्रेंड होने के बाद पुलिस की इस पर नजर पड़ी।
दिशा ने ग्रेटा से ट्वीट हटाने को कहा
मामला बिगड़ते देख दिशा ने इससे जुड़े सुबूत मिटना शुरू कर दिए। उसने ग्रेटा से ट्वीट डिलीट करने के लिए कहा। ग्रेटा ने ऐसा कर भी दिया, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। पुलिस के मुताबिक खुद दिशा ने गूगल से टूलकिट से जुड़े लिंक को हटाना शुरू कर दिया, लेकिन तब तक पुलिस के पास कई स्क्रीनशॉट आ चुके थे। दूसरी ओर पुलिस ने जब दिशा को गिरफ्तार किया तो उसके फोन व दस्तावेज से अहम सुराग हाथ लगे। हालांकि मोबाइल में काफी चीजों को उसने डिलीट कर दिया, लेकिन पुलिस उनको हासिल करने का प्रयास कर रही है।
दुनियाभर में भारत की छवि खराब करने की थी साजिश
टूलकिट के जरिये खालिस्तानी समर्थक देश ही नहीं पूरे विश्व में भारत की छवि खराब करने की साजिश रच रहे थे। जांच में सामने आया है कि भारतीय संस्कृति को नुकसान पहुंचाने के अलावा विदेशों में भारतीय दूतावास को निशाना बनाने साजिश थी। षड्यंत्र था कि किसानों के समर्थन में लोग भारतीय दूतावासों का घेराव कर हंगामा करें।
26 जनवरी को फिजिकल एक्शन की बात कही गई थी
टूलकिट के जरिये 23 जनवरी को टूवीट स्टॉर्म शुरू करना था। इसके साथ ही हैशटैग के जरिये डिजिटल स्ट्राइक शुरू करनी थी। वहीं, 26 जनवरी को फिजिकल एक्शन के साथ दिल्ली में घुसने और बॉर्डर पर वापस लौटने की बात की गई थी।
परिजनों की मौजूदगी में किया दिशा रवि को गिरफ्तार
दिशा की गिरफ्तारी पर उठ रहे सवालों का जवाब देते हुए दिल्ली पुलिस ने सोमवार को सफाई दी कि बंगलूरू में दिशा की गिरफ्तारी उसकी मां और लोकल पुलिस की मौजूदगी में की गई। इसकी सूचना दिशा के वकील को भी दी गई। चूंकि पुलिस की टीम 24 घंटे से पहले दिशा को लेकर दिल्ली आ गई, इसलिए उसकी ट्रांजिट रिमांड भी नहीं ली गई। यहां दिशा के वकील जब कोर्ट में पेश नहीं हुए तो उनको अपना पक्ष रखने के लिए वकील भी उपलब्ध कराया गया।