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Hindi News ›   Delhi ›   Three people including owner of another nightclub convicted in assault and molestation case of a female bouncer 

दिल्ली: महिला बाउंसर से मारपीट-छेड़छाड़ मामले में नाइट क्लब के मालिक सहित तीन लोग दोषी करार, जांच अधिकारी को फटकार

Tue, 26 Oct 2021 11:33 PM IST
सुशील कुमार कुमार अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: सुशील कुमार कुमार Updated Tue, 26 Oct 2021 11:33 PM IST
सार

अदालत ने कहा कि जांच में एकमात्र गलती लाइन यह है कि जांच अधिकारी ने क्लब के मालिक का बयान दर्ज नहीं किया था और उसने घटना स्थल के सीसीटीवी फुटेज को जब्त नहीं किया था।
 

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Three people including owner of another nightclub convicted in assault and molestation case of a female bouncer 
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Social Media

विस्तार

अदालत ने 2016 में एक नाइट क्लब में विवाद के दौरान एक महिला बाउंसर से मारपीट, छेड़छाड़ व जबरन ट्रेस पास के मामले में दूसरे नाइट क्लब के मालिक सहित तीन लोगों को दोषी ठहराया है। इतना ही नहीं अदालत ने सही ढंग से जांच न करने पर जांच अधिकारी को फटकार लगाते हुए कहा कि केवल दोषपूर्ण या ढुलमुल जांच के आधार पर दोषियों को रिहा करने का आधार नहीं हो सकता।

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प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश धर्मेश शर्मा ने पुलिस की जांच प्रक्रिया की अलोचना करते हुए कहा कि आपराधिक न्याय वितरण प्रणाली का मुख्य उद्देश्य सभी हितधारकों-अभियुक्त, शिकायतकर्ता, पीड़ित, समाज के साथ-साथ अभियोजन पक्ष को न्याय प्रदान करना है। 
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पेश मामले के अनुसार 15 जुलाई 2016 को राजौरी गार्डन स्थित वेस्ट गेट मॉल हैमर क्लब में कार्यरत महिला वाउंसर ने शिकायत दर्ज करवाई कि उनके क्लब का प्ले क्लब के साथ विवाद चल रहा था। घटना वाली शाम करीब 5.30 बजे प्ले क्लब का मालिक गौतम गंभीर, उसका भाई सन्नी व अन्य वाउंसरों के साथ आया व लोहे की राड़ व अन्य हथियारों के साथ उन पर हमला कर दिया। इसी दौरान आरोपियों ने उसे भी पकड़ लिया व शारीरिक छेड़छाड़ की। पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपी गौतम गंभीर, मोहित व नीतिन नायर को गिरफ्तार कर लिया था।
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पुलिस ने सुनवाई के दौरान ऐसा कोई साक्ष्य पेश नहीं किया, जिससे आरोप साबित हो सके। इतना ही नहीं अधिकांश गवाह भी गवाही से मुकर गए। अदालत ने सभी तथ्यों, चिकित्सा रिपोर्ट को देखने के बाद जांच को दोषपूर्ण करार दिया। अदालत ने कहा कि जांच में एकमात्र गलती लाइन यह है कि जांच अधिकारी ने क्लब के मालिक का बयान दर्ज नहीं किया था और उसने घटना स्थल के सीसीटीवी फुटेज को जब्त नहीं किया था।

अदालत ने कहा कि जांच अधिकारी का यह तर्क उचित नहीं है कि सीसीटीवी कैमरे काम करने की स्थिति में नहीं थे, आत्मविश्वास को प्रेरित नहीं करते क्योंकि उनके द्वारा उस प्रभाव के लिए कोई नोटिंग या बयान दर्ज नहीं किया गया था और न ही केस डायरी में ऐसा कुछ भी है जिससे यह पता चलता है कि उन्होंने सीसीटीवी के काम करने के संबंध में पूछताछ की थी। अदालत ने पीड़ित महिला के बयानों को उचित व उसकी गवाही उत्तम दर्जे की करार देते हुए आरोपियों को दोषी करार दिया।


अदालत ने निर्देश दिया कि दोषियों की आय की रिपोर्ट जल्द से जल्द पेश की जाए ताकि पीड़िता को मिलने वाला मुआवजा तय किया जा सके। इसके अलावा दोषियों की सजा का निर्धारण हो सके। अदातल ने मामले की सुनवाई 27 नवंबर तय की है।

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