दिल्ली : अधिकार के लिए अदालत पहुंचा तीन माह का शिशु, मां को नहीं मिला था मातृत्व अवकाश
अदालत ने संबंधित पक्ष को जवाब दाखिल न करने पर 25 हजार जुर्माना लगा दिया है। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 17 मई तय की है।
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तीन महीने के बच्चे ने अपनी मां को उसके नियोक्ता उत्तरी दिल्ली नगर निगम (एनडीएमसी) द्वारा मातृत्व अवकाश देने से इनकार करने के बाद मातृ देखभाल के अपने अधिकार की मांग करते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका दायर की है। याची ने तीसरी संतान के कारण उसकी मां को अवकाश प्रदान न करने के निर्णय को चुनौती दी है। अदालत ने तय समय में जवाब दाखिल न करने पर संबंधित पक्ष पर 25 हजार रुपये जुर्माना लगाया है।
न्यायमूर्ति नजमी वजीरी और न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा की पीठ ने कहा इस मामले में तात्कालिकता है, खासकर क्योंकि अपनी कम उम्र में याचिकाकर्ता को अपूरणीय पीड़ा हुई है क्योकि वह अपनी मां की देखभाल से वंचित है। अदालत ने मामले को गंभीरता से लेते हुए अदालत की सहायता के लिए मामले में अधिवक्ता शाहरुख आलम को अदालत का मित्र नियुक्त किया है। अदालत ने मामले की सुनवाई 17 मई तय की है।
बच्चे त्रिग्यांश जैन ने अपने माता-पिता से देखभाल करने के लिए अपने वकील के माध्यम से भारत के संविधान के अनुच्छेद 14 (कानून के समक्ष समानता) और 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की सुरक्षा) का हवाला दिया है। याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में तर्क दिया कि वह अपने अस्तित्व के लिए पूरी तरह से मां के भोजन पर निर्भर है और उसके अधिकारों का उल्लंघन किया जा रहा है क्योंकि वह तीसरी संतान है।
तीसरे बच्चे को जन्म देने पर नहीं दिया मातृत्व अवकाश- एनडीएमसी
बच्चे की मां एनडीएमसी में कार्यरत्त है। एनडीएमसी ने इस तर्क पर मातृत्व अवकाश प्रदान करने से इनकार कर दिया कि केवल यह अवकाश तभी प्रदान किया जा सकता है जब कर्मचारी के दो से कम जीवित बच्चे हों। एक महिला सरकारी कर्मचारी (एक प्रशिक्षु सहित) जिसके दो से कम जीवित बच्चे हैं, को 180 दिनों की अवधि के लिए छुट्टी देने के लिए सक्षम प्राधिकारी द्वारा मातृत्व अवकाश दिया जा सकता है।
पीठ ने कहा याचिकाकर्ता तीन महीने का है। वह अपने माता-पिता की देखभाल के लिए भारत के संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 के तहत अपने अधिकारों का दावा करता है। वह अपने माता-पिता की तीसरी संतान होने के कारण अपनी मां से मातृ देखभाल से वंचित है क्योंकि मां के नियोक्ता एनडीएमसी द्वारा उसे मातृ अवकाश से वंचित कर दिया गया है।