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Delhi News: लोधी युग की गुमटी ऑफ शेख में फिर लौटेगी रौनक

Tue, 04 Nov 2025 09:36 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Tue, 04 Nov 2025 09:36 PM IST
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The glory of the Gumti of Sheikh of the Lodhi era will return again
--700 वर्ष पुराने लोधी कालीन धरोहर 69.99 लाख की लागत से होगा पुनर्जीवित
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--परियोजना में दो महीने का विकास कार्य और दो वर्षों तक नियमित रखरखाव शामिल
संवाद न्यूज एजेंसी

नई दिल्ली। दक्षिण दिल्ली के डिफेंस कॉलोनी स्थित लोधी युग का ऐतिहासिक स्मारक गुमटी ऑफ शेख अली अब नई जीवन-छटा बिखेरने को तैयार है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के पालन में दिल्ली सरकार ने प्राचीन धरोहर स्थल के चारों ओर बागवानी और सौंदर्यीकरण का कार्य प्रारंभ कर दिया है। बता दें कि करीब 700 वर्ष पुराना यह स्मारक लंबे समय से अवैध कब्जे में था। रक्षा कॉलोनी की रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (आरडब्ल्यूए) ने इसे कई दशकों तक अपने दफ्तर के रूप में इस्तेमाल किया। इसी के चलते सर्वोच्च न्यायालय ने खुद संज्ञान लेते हुए अतिक्रमण को हटाने और स्मारक को संरक्षित करने के निर्देश दिए थे।

69.99 लाख की लागत से होगा पुनर्जीवित
अब दिल्ली सरकार के पुरातत्व विभाग ने लगभग 69.99 लाख की लागत से इस स्थल को पुनर्जीवित करने की योजना बनाई है। जानकारी के मुताबिक परियोजना में दो महीने का विकास कार्य और उसके बाद दो वर्षों तक नियमित रखरखाव शामिल है। इसमें स्वीकृत प्रजातियों के पौधों का रोपण, जैविक उर्वरकों और कीटनाशकों का उपयोग, सिंचाई, छंटाई, निराई और सूखे पौधों का प्रतिस्थापन किया जाएगा। वहीं, इसके लिए बागवानी के उप निदेशक या उनके अधिकृत प्रतिनिधि की देखरेख में पौधों की प्रजातियों और सामग्री का चयन किया जाएगा। विशेष ध्यान स्मारक के ऐतिहासिक स्वरूप और सौंदर्य की रक्षा पर रहेगा ताकि स्थल की मूल पहचान और विरासत सुरक्षित बनी रहे। वहीं, बागवानी दल नियमित रूप से लॉन, पेड़ों और पौधों की छंटाई करेगा ताकि हरियाली संतुलित रहे। सूखे गोबर की खाद और जैविक कीटनाशकों के प्रयोग से पौधों की उर्वरता और स्वास्थ्य सुनिश्चित किया जाएगा।
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आरडब्ल्यूए पर 40 लाख का मुआवजा-
करीब 700 वर्ष पुराना यह स्मारक लंबे समय से रक्षा कॉलोनी की आरडब्ल्यूए के अवैध कब्जे में था। उन्होंने इसे कई दशकों तक अपने दफ्तर के रूप में इस्तेमाल किया। इसी पर संज्ञान लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में आरडब्ल्यूए को क्षेत्र खाली करने और 40 लाख का मुआवजा दिल्ली सरकार के पुरातत्व विभाग में जमा करने का निर्देश दिया है। साथ ही, अवैध संरचनाओं को हटाने और पुनर्स्थापन कार्य की निगरानी के लिए कोर्ट कमिश्नर नियुक्त किया गया है।
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