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Delhi News: बुजुर्ग की मौत पर परिवार को मिलेगा 7.85 लाख मुआवजा
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बिना लाइसेंस के बाइक चला रहे युवक की लापरवाही से हुई थी दुर्घटना
बीमा कंपनी देगी मुआवजा, फिर वसूलेगी बिना लाइसेंस वाहन चालक से रकम
सचिन कुमार
नई दिल्ली। साकेत कोर्ट ने बिना लाइसेंस के बाइक चला रहे एक युवक की लापरवाही से हुई सड़क दुर्घटना में 72 वर्षीय बुजुर्ग की मौत के मामले में उनके परिवार को 7.85 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है। अदालत ने कहा कि बीमा कंपनी पहले मुआवजे की रकम देगी। इसके बाद वह बिना लाइसेंस के वाहन चलाने वाले चालक और वाहन मालिक से यह रकम वसूल सकती है। मुआवजे की रकम पर याचिका दायर करने की तारीख से भुगतान होने तक नौ प्रतिशत सालाना ब्याज भी मिलेगा। साकेत कोर्ट की मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (एमएसीटी) की पीठासीन अधिकारी अंजनी महाजन की अदालत ने यह फैसला सुनाया।
मामला 21 मार्च 2021 का है। मदनगीर बस स्टैंड के पास डीडीए फ्लैट के सामने केदार नाथ पहाड़िया खड़े थे। इसी दौरान खानपुर की ओर से चिराग दिल्ली की तरफ जा रही तेज रफ्तार बाइक ने उन्हें टक्कर मार दी। इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। मामले में चालक सुमित कुमार ने दुर्घटना से इन्कार करते हुए दावा किया था कि किसी अन्य दोपहिया वाहन ने टक्कर मारी थी और उसने केवल मानवता के नाते उन्हें अस्पताल पहुंचाया। हालांकि, अदालत के सामने पेश हुए प्रत्यक्षदर्शी विनीत कुमार उर्फ मोनू की गवाही से यह दलील टिक नहीं सकी।
बच्चों को भी मिला मुआवजा
अदालत ने मृतक की पत्नी बदामी देवी और उनके तीन बच्चों को मुआवजे का हकदार माना। तीनों बच्चे बालिग हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल बालिग होने के कारण बच्चों को मृतक के आश्रित होने के दावे से बाहर नहीं किया जा सकता। अदालत ने पत्नी और तीनों बच्चों समेत चार आश्रितों को ध्यान में रखते हुए मृतक की व्यक्तिगत जरूरतों के लिए आय का एक-चौथाई हिस्सा घटाया।
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बीमा कंपनी देगी मुआवजा, फिर वसूलेगी बिना लाइसेंस वाहन चालक से रकम
सचिन कुमार
नई दिल्ली। साकेत कोर्ट ने बिना लाइसेंस के बाइक चला रहे एक युवक की लापरवाही से हुई सड़क दुर्घटना में 72 वर्षीय बुजुर्ग की मौत के मामले में उनके परिवार को 7.85 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है। अदालत ने कहा कि बीमा कंपनी पहले मुआवजे की रकम देगी। इसके बाद वह बिना लाइसेंस के वाहन चलाने वाले चालक और वाहन मालिक से यह रकम वसूल सकती है। मुआवजे की रकम पर याचिका दायर करने की तारीख से भुगतान होने तक नौ प्रतिशत सालाना ब्याज भी मिलेगा। साकेत कोर्ट की मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (एमएसीटी) की पीठासीन अधिकारी अंजनी महाजन की अदालत ने यह फैसला सुनाया।
मामला 21 मार्च 2021 का है। मदनगीर बस स्टैंड के पास डीडीए फ्लैट के सामने केदार नाथ पहाड़िया खड़े थे। इसी दौरान खानपुर की ओर से चिराग दिल्ली की तरफ जा रही तेज रफ्तार बाइक ने उन्हें टक्कर मार दी। इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। मामले में चालक सुमित कुमार ने दुर्घटना से इन्कार करते हुए दावा किया था कि किसी अन्य दोपहिया वाहन ने टक्कर मारी थी और उसने केवल मानवता के नाते उन्हें अस्पताल पहुंचाया। हालांकि, अदालत के सामने पेश हुए प्रत्यक्षदर्शी विनीत कुमार उर्फ मोनू की गवाही से यह दलील टिक नहीं सकी।
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बच्चों को भी मिला मुआवजा
अदालत ने मृतक की पत्नी बदामी देवी और उनके तीन बच्चों को मुआवजे का हकदार माना। तीनों बच्चे बालिग हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल बालिग होने के कारण बच्चों को मृतक के आश्रित होने के दावे से बाहर नहीं किया जा सकता। अदालत ने पत्नी और तीनों बच्चों समेत चार आश्रितों को ध्यान में रखते हुए मृतक की व्यक्तिगत जरूरतों के लिए आय का एक-चौथाई हिस्सा घटाया।
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