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राजधानी के अस्पतालों का हाल : रेफरल के चक्कर में मरीज बन रहे घनचक्कर

Mon, 18 Oct 2021 07:24 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Mon, 18 Oct 2021 07:24 PM IST
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The condition of the capital's hospitals: patients are becoming dilapidated due to referral
परीक्षित निर्भय
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नई दिल्ली। इलाज के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में अक्सर दूर-दराज मरीजों के भटकने के मामले सामने आते हैं लेकिन देश की राजधानी में भी ऐसे हालात हो सकते हैं इसके बारे में शायद ही आपने सोचा होगा। इन दिनों राष्ट्रीय राजधानी के अस्पतालों में एक्सरे-सीबीसी जैसी जांच के लिए भी मरीज को नौ किलोमीटर दूर के अस्पताल में रेफर किया जा रहा है।
यहां गौर करने वाली बात है कि अस्पताल में जांच सुविधा होने के बाद भी मरीज रेफर हो रहे हैं और अस्पताल भी एक दूसरे को जिम्मेदार मान रहे हैं।
सोमवार को ‘अमर उजाला’ की पड़ताल में ऐसे एक या दो नहीं, बल्कि काफी संख्या में मामले सामने आए हैं जो महज एक्सरे या सीबीसी जांच कराने के लिए आरएमएल से सफदरजंग अस्पताल पहुंचे हैं। इन दोनों ही अस्पतालों के बीच दूरी 9.30 किलोमीटर की है जिसे तय करने में कम से कम 25 से 30 मिनट तक वक्त लगता है।
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जब सफदरजंग अस्पताल की ओपीडी और इमरजेंसी वार्ड में डॉक्टरों से पूछा गया तो डॉ. मनीष ने कहा कि हर दिन करीब 50 से 60 मामले ऐसे दर्ज किए जा रहे हैं। ज्यादातर मरीज आरएमएल अस्पताल से आ रहे हैं। वहीं लोकनायक अस्पताल सहित अन्य से भी मरीजों को रेफर किया जा रहा है।
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गंभीर बात यह है कि अस्पताल में बिस्तर न होने का हवाला देते हुए मरीज को रेफर कर दिया जाता है जबकि उसकी जरूरत कुछ और होती है। डॉक्टरों का कहना है कि रविवार ओपीडी की तरह स्वास्थ्य मंत्रालय को इस मुद्दे पर भी ध्यान देना चाहिए।
जब आरएमएल अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक से संपर्क किया गया लेकिन जानकारी नहीं मिली। इसके बाद आपातकालीन वार्ड पहुंचने पर यह पाया गया कि एक घंटे के भीतर सात मरीजों को सफदरजंग, एम्स ट्रॉमा सेंटर और एम्स इमरजेंसी सेंटर रेफर किया गया। ये मरीज रवि कुमार (23), संतोष (38), आनंद वर्मा (41), महिमा (26), बलराम सिंह (61), शिवानी (31) और धर्मा देवी (55) हैं।
एक्सरे करना जरूरी, सफदरजंग भेजा
14 अक्तूबर को आरएमएल अस्पताल में 56 वर्षीय राजू पेट दर्द की वजह से पहुंचे। उन्हें बुखार के अलावा कफ, दस्त और कमजोरी भी थी। उन्हें 10 दिन से यह परेशानी थी। डॉक्टरों ने इमरजेंसी में ही चेस्ट एक्सरे की सलाह दी लेकिन कार्ड के पीछे यह भी लिख दिया कि मेडिसिन वार्ड में कोई बेड नहीं है। इसलिए सफरदरजंग या एम्स चले जाएं। राजू के मुताबिक उनके आसपास 12 मरीज थे और सभी को एक जैसी सलाह ही दी गई।
कई मरीज की प्रिस्क्रिप्शन तक अधूरे
पड़ताल के दौरान ऐसे कई मरीज भी सामने आए जिनके पास प्रिस्क्रिप्शन आधे-अधूरे ही दिखाई दे रहे थे। किसी पर उपचार का दिनांक नहीं था तो किसी पर पंजीयन क्रमांक तक नहीं था। केवल नाम और उम्र लिखने के बाद एक ही लाइन में लिख दिया, बड़े अस्पताल रेफर।
डॉक्टरों का कहना है कि वह हर दिन इन परेशानियों का सामना कर रहे हैं। इसकी वजह से मरीजों को नए सिरे से प्रक्रिया का पालन करना पड़ता है। इसलिए मरीज या तीमारदार नाराज होकर उनसे लड़ता है।

अस्पताल में नहीं ऑक्सीजन पोर्ट, रेफर
सफदरजंग अस्पताल की इमरजेंसी में आरएमएल, जीटीबी, डीडीयू और एम्स से पांच ऐसे भी मरीज आए जिनके कार्ड पर लिखा था कि उनके यहां कोई भी ऑक्सीजन पोर्ट खाली नहीं है। इसलिए मरीज को सफदरजंग अस्पताल भर्ती करने के लिए भेजा जा रहा है। यह स्थिति तब है जब दिल्ली में कोरोना महामारी का संक्रमण सबसे निचले पायदान पर है और अस्पतालों में क्षमता से अधिक ऑक्सीजन इत्यादि के बंदोबस्त का दावा किया जा रहा है।
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