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केंद्र सरकार की पहल को दिल्ली के उद्यमियों ने सराहा, कहा- इससे फैक्ट्रियों में काम करने में मिलेगी मदद

Fri, 15 May 2020 04:48 AM IST
Jeet Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Jeet Kumar Updated Fri, 15 May 2020 04:48 AM IST
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The businessmen of delhi appreciated the initiative of the central government
लॉकडाउन में बंद पड़ी फैक्टरी - फोटो : अमर उजाला

कोरोना संकट के मद्देनजर केंद्र सरकार की पहल पर दिल्ली के उद्यमियों ने सराहना की है। उद्यमियों का कहना है सरकार ने ऐसी पहल की है जिससे पलायन कर रहे श्रमिकों को फिर से फैक्ट्रियों में काम करने मदद मिलेगी। इससे व्यापार को बढ़ावा मिलेगा।

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हालांकि दिल्ली के उद्यमियों का कहना है कि उतर प्रदेश की तरह ही दिल्ली में भी श्रम कानून को लचीला बनाने की आवश्यकता है। ताकि श्रम कानून के कानूनी बंधन में बिना बंधे फैक्ट्री से प्रोडक्शन ज्यादा से ज्यादा संभव हो सके।
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भारतीय उद्योग व्यापार मंडल दिल्ली प्रदेश के महामंत्री हेमंत गुप्ता केअनुसार श्रमिकों के प्रोविडेंट फंट में दो प्रतिशत की कमी बेहतर निर्णय है। इसके साथ ही न्यूनतम मजदूरी का दायरा बढने से ज्यादा से ज्यादा मजदूरों को फायदा मिलेगा। असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को फायदा मिलेगा। गुप्ता ने बताया कि प्रवासी लोगों व मजदूरों को कम रेट पर घर मुहैया कराने से उन्हें बेहद फायदा मिलेगा क्योंकि वह कुछ पैसा बचा कर अपने स्वास्थ्य, बच्चों की पढ़ाई और भविष्य के लिए रुपया बचा सकेंगे।
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हालांकि उन्होंने यह जरूर कहा कि उतर प्रदेश की तरह ही श्रम कानून में छूट मिलना चाहिए। फैक्ट्री तो चल नहीं रही है, ऐसे में मजदूरों को वेतन देना मुश्किल है। सरकार को उद्यमियों के लिए राहत पैकेज देने की जरूरत थी। आधा वेतन सरकार की तरफ से और आधा वेतन उद्यमियों के तरफ से दिया जाना चाहिए। दिल्ली से भी श्रम कानून को हटाने की आवश्यकता है। उद्यमियों को फ्री करे ताकि इंडस्ट्री ठीक से काम कर सके। इडस्ट्री के उपर कानून नहीं थोपा जाना चाहिए। ताकि किसी तरह के कानूनी पचड़े में उद्यमी नहीं पड़े।

लघु उद्योग भारती का राष्ट्रीय संपंत तोषनीवाल प्रधाननमंत्री ने आहवान किया है कि वैश्विक संकट पर आयात की निर्भरता कम किया जाए। विकेंद्रीत आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा। वैश्विक से स्थानीय विकाश देखने को मिलेगा।

देखना यह है कि इसका क्रियान्वयन कैसे होता है। सामान देश में ही उत्पाद किया जाए। यह बेहद ही जरूरी है। महत्वपूर्ण व दीर्घ कालीन नीति है। लघु उद्योग भारती इसके पक्ष में रही है। विकेंद्रीय आर्थिक विकास बेहद जरूरी है। गांव-गांव तक विकास पहुंचेगा। सूक्ष्म व लघु उद्योग को बढ़ावा मिलेगा।

खादी उद्योग से जुड़े व्यापारी अजय अरोड़ा का कहना है कि एक देश एक राशन कार्ड होने से समस्या कम होगी। पूर्वांचल के मजदूर अगर वहां से दिल्ली, मुंबई, सूरत या अन्य जगह जाते है और फैक्ट्री में काम करते है तो उन्हें सस्ते दर, सरकारी दर पर राशन उपलब्ध होगा। वह अपनी कमाई का ज्यादा हिस्सा किराये के मकान व राशन पर खर्च कर देते है, ऐसे में उन्हें भविष्य के लिए धन संचित करने को प्रोत्साहन मिलेगा। पलायन भी रूकेगा।  

व्यापारी मनोहर लाल व विजय प्रकाश जैन ने फेरीवालों के लिए की गई योजना का स्वागत किया। सड़क विक्रेताओं के लिए आसान ऋण मिलने से संक्रमण के दौर में भी वह अपना जीवन चला सकेंगे। इस वर्ग के बारे में सरकार का ध्यान है इसमें हमें खुशी होती है। उन्होंने आगे कहा कि सड़क विक्रेत रोज कुआं खोदते हैं और रोज पानी पीते हैं। तालाबंदी उनके जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रहा है।

दिल्ली सदरबाजार एसोसिएशन के देवराज बावेजा का कहना है कि लोकल के लिए वोकल होना होगा इससे स्पष्ट है स्वदेशी उद्योग को बढ़ावा मिलेगा। कुटीर उद्योग को इससे बढ़ावा मिलेगा। कुटीर उद्योग वाले लघु उद्योग और फिर बड़े-बड़े उद्योग-धंधा भी अपना सकेंगे। उन चिंताओं और मुद्दों से अवगत कराया है जिनके लिए व्यापारियों को राहत पैकेज का इंतजार है।

कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेसर्स के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल ने कहा कि राहत की खबर है। सरकार को बैंकों को निर्देश देना चाहिए कि व्यापारियों को एक विशेष करोना ऋूण मुहैया कराए।

इसका भुगतान 60 समान किश्तों में हो सके। भारत के खुदरा व्यापार में लगभग 7 करोड़ व्यापारी हैं जो लगभग 40 करोड़ लोगों को रोजगार प्रदान करते हैं और लगभग 50 लाख करोड़ रुपये का वार्षिक कारोबार करते हैं। इन्हें राहत की जरूरत है।

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