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सरकारी स्कूल के शिक्षकों को कोविड ड्यूटी से हटाने की मांग
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नई दिल्ली। उपमुख्यमंत्री की ओर से कोविड ड्यूटी से शिक्षकों को मुक्त करने के आदेश पर मुख्य सचिव का आदेश जारी हो चुका है। इसके बावजूद सरकारी स्कूलों के शिक्षकों की निर्माण स्थलों पर मजदूरों के पंजीकरण की कोविड ड्यूटी लगा दी गई है। गर्वनमेंट स्कूल टीचर एसोसिएशन (जीएसटीए) ने शिक्षकों को कोविड ड्यूटी से हटाकर स्कूलों में भेजने की मांग उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया से की है।
जीएसटीए ने पत्र लिखकर शिक्षकों को कोविड ड्यूटी से हटाने की मांग की है। जीएसटीए महासचिव अजयवीर यादव ने कहा कि अब स्कूल पूरी तरह से खुल गए हैं। वार्षिक व बोर्ड परीक्षाओं के लिए भी बहुत कम समय बचा है। शिक्षकों को छात्रों की परीक्षाओं की तैयारी भी करानी है। इसलिए सभी शिक्षकों का स्कूलों में रहना बहुत जरूरी है।
उन्होंने ये भी कहा कि निर्माण स्थल पर मजदूरों के पंजीकरण का कार्य श्रम विभाग का है। ऐसे में शिक्षकों की ड्यूटी लगाना किसी भी दृष्टिकोण से न्यायसंगत नहीं है। शिक्षकों के स्कूल में नहीं होने से उन बच्चों के साथ अन्याय हो रहा है जो पहले कोविड के कारण स्कूलों से दूर थे। अब उन्हें मौका मिला है तो स्कूल में शिक्षक नहीं हैं।
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जीएसटीए ने उपमुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि सभी शिक्षकों को तुरंत सभी प्रकार की कोविड ड्यूटी से हटा कर स्कूलों में भेजा जाए। जिससे छात्रों को बचे समय में अधिक से अधिक पढ़ाया जा सके। इसके साथ ही आदेश का उल्लंघन करने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए।
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जीएसटीए ने पत्र लिखकर शिक्षकों को कोविड ड्यूटी से हटाने की मांग की है। जीएसटीए महासचिव अजयवीर यादव ने कहा कि अब स्कूल पूरी तरह से खुल गए हैं। वार्षिक व बोर्ड परीक्षाओं के लिए भी बहुत कम समय बचा है। शिक्षकों को छात्रों की परीक्षाओं की तैयारी भी करानी है। इसलिए सभी शिक्षकों का स्कूलों में रहना बहुत जरूरी है।
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उन्होंने ये भी कहा कि निर्माण स्थल पर मजदूरों के पंजीकरण का कार्य श्रम विभाग का है। ऐसे में शिक्षकों की ड्यूटी लगाना किसी भी दृष्टिकोण से न्यायसंगत नहीं है। शिक्षकों के स्कूल में नहीं होने से उन बच्चों के साथ अन्याय हो रहा है जो पहले कोविड के कारण स्कूलों से दूर थे। अब उन्हें मौका मिला है तो स्कूल में शिक्षक नहीं हैं।
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जीएसटीए ने उपमुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि सभी शिक्षकों को तुरंत सभी प्रकार की कोविड ड्यूटी से हटा कर स्कूलों में भेजा जाए। जिससे छात्रों को बचे समय में अधिक से अधिक पढ़ाया जा सके। इसके साथ ही आदेश का उल्लंघन करने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए।