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डीयू के कॉलेजों में बौद्ध व अंबेडकर अध्ययन विभाग खोलने की मांग
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नई दिल्ली। दिल्ली सरकार द्वारा वित्त पोषित कॉलेजों में बौद्ध अध्ययन व डॉ. अंबेडकर अध्ययन विभाग खोलने की मांग की गई है। इसके लिए आम आदमी पार्टी के शिक्षक संगठन दिल्ली टीचर्स एसोसिएशन (डीटीए) ने दिल्ली के मुख्यमंत्री उपमुख्यमंत्री को एक पत्र भी लिखा है।
पत्र में कहा गया है कि कॉलेजों में इन दोनों विभाग के खुलने से छात्रों व शिक्षकों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। साथ ही बौद्ध अध्ययन विषय देश-विदेश में भारत का प्रतिनिधित्व करेगा जिससे भारत के साथ अन्य देशों के आध्यात्मिक और वैचारिक रिश्तों में मजबूती आएगी।
डीटीए के प्रभारी प्रोफेसर हंसराज सुमन ने बताया है कि दिल्ली यूनिवर्सिटी में बौद्ध अध्ययन विभाग की स्थापना वर्ष 1957 में हुई थी। यहां का बौद्ध अध्ययन विभाग देश के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में से एक माना जाता है। इसे यूजीसी द्वारा सेंटर फॉर एडवांस स्टडीज की मान्यता प्राप्त है। इस विभाग की स्थापना से लेकर अब तक मात्र एक ही कॉलेज में इस विषय की पढ़ाई होती है।
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उन्होंने बताया कि डीयू के विभागों में स्नातकोत्तर स्तर पर सभी विषयों की पढ़ाई होती है। उनका कहना है कि जो विषय स्नातकोत्तर स्तर पर पढ़ाए जाते हैं उन्हीं विषयों को कॉलेज स्तर पर पढ़ाया जाता है लेकिन बौद्ध अध्ययन डीयू के एक मात्र सत्यवती कॉलेज (सांध्य) में ही पढ़ाया जाता है जबकि स्नातकोत्तर स्तर पर श्रीलंका, बर्मा, थाईलैंड, जापान, चीन, वियतनाम, लाओस, कंबोडिया के छात्र हर साल दिल्ली विश्वविद्यालय में स्नातकोत्तर, एमफिल/पीएचडी, डिग्री, डिप्लोमा कोर्स के लिए डीयू में दाखिला लेते हैं।
सुमन ने यह भी कहा है कि दिल्ली सरकार के वित्त पोषित सभी कॉलेजों में स्नातक स्तर पर बौद्ध अध्ययन को पढ़ाया जाना चाहिए। डीयू प्रशासन इस पूरे मामले में कोई कदम नहीं उठा रहा है। लिहाजा दिल्ली सरकार इस मामले में दखल दें।
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पत्र में कहा गया है कि कॉलेजों में इन दोनों विभाग के खुलने से छात्रों व शिक्षकों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। साथ ही बौद्ध अध्ययन विषय देश-विदेश में भारत का प्रतिनिधित्व करेगा जिससे भारत के साथ अन्य देशों के आध्यात्मिक और वैचारिक रिश्तों में मजबूती आएगी।
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डीटीए के प्रभारी प्रोफेसर हंसराज सुमन ने बताया है कि दिल्ली यूनिवर्सिटी में बौद्ध अध्ययन विभाग की स्थापना वर्ष 1957 में हुई थी। यहां का बौद्ध अध्ययन विभाग देश के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में से एक माना जाता है। इसे यूजीसी द्वारा सेंटर फॉर एडवांस स्टडीज की मान्यता प्राप्त है। इस विभाग की स्थापना से लेकर अब तक मात्र एक ही कॉलेज में इस विषय की पढ़ाई होती है।
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उन्होंने बताया कि डीयू के विभागों में स्नातकोत्तर स्तर पर सभी विषयों की पढ़ाई होती है। उनका कहना है कि जो विषय स्नातकोत्तर स्तर पर पढ़ाए जाते हैं उन्हीं विषयों को कॉलेज स्तर पर पढ़ाया जाता है लेकिन बौद्ध अध्ययन डीयू के एक मात्र सत्यवती कॉलेज (सांध्य) में ही पढ़ाया जाता है जबकि स्नातकोत्तर स्तर पर श्रीलंका, बर्मा, थाईलैंड, जापान, चीन, वियतनाम, लाओस, कंबोडिया के छात्र हर साल दिल्ली विश्वविद्यालय में स्नातकोत्तर, एमफिल/पीएचडी, डिग्री, डिप्लोमा कोर्स के लिए डीयू में दाखिला लेते हैं।
सुमन ने यह भी कहा है कि दिल्ली सरकार के वित्त पोषित सभी कॉलेजों में स्नातक स्तर पर बौद्ध अध्ययन को पढ़ाया जाना चाहिए। डीयू प्रशासन इस पूरे मामले में कोई कदम नहीं उठा रहा है। लिहाजा दिल्ली सरकार इस मामले में दखल दें।