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छात्रावास खाली कराने के नोटिस पर छात्र संगठन ने जताया विरोध
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नई दिल्ली। डीयू के राजीव गांधी महिला छात्रावास की ओर से छात्राओं को नोटिस जारी कर हॉस्टल खाली करने के अलावा अप्रैल से अगस्त तक सामान रखने के किराए के रूप में प्रतिमाह एक हजार रुपये देने के आदेश पर छात्र संगठन एनएसयूआई ने विरोध जताया है।
एनएसयूआई के राष्ट्रीय मीडिया उप प्रभारी मोहम्मद अली ने कहा कि वर्तमान समय में लोग कोरोना वायरस से जूझ रहे हैं। ऐसे में हॉस्टल खाली करने के लिए छात्राओं का अन्य प्रदेशों से आना खतरे से खाली नहीं होगा। बिहार और महाराष्ट्र में अभी भी लॉकडाउन लगा हुआ है। ऐसे में वहां की छात्राओं का आना नामुमकिन है।
उन्होंने कहा कि हॉस्टल द्वारा प्रत्येक छात्रा से प्रत्येक महीने एक हजार रुपये किराए की मांग साफ तौर पर मनमानी है क्योंकि छात्राओं ने सामान खुद नहीं छोड़ा था बल्कि ऐसा अचानक लगे लॉकडाउन के कारण हुआ था। ऐसे में पांच महीने के हिसाब से पांच हजार रुपये वसूलना तानाशाही है। उन्होंने मांग की कि विवि द्वारा इस फरमान को तुरंत वापस लिया जाए और जब तक हालात सामान्य न हो तब तक किसी भी छात्रों को हॉस्टल खाली करने के लिए तथा जबरन किराया वसूली नहीं होनी चाहिए।
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एनएसयूआई के राष्ट्रीय मीडिया उप प्रभारी मोहम्मद अली ने कहा कि वर्तमान समय में लोग कोरोना वायरस से जूझ रहे हैं। ऐसे में हॉस्टल खाली करने के लिए छात्राओं का अन्य प्रदेशों से आना खतरे से खाली नहीं होगा। बिहार और महाराष्ट्र में अभी भी लॉकडाउन लगा हुआ है। ऐसे में वहां की छात्राओं का आना नामुमकिन है।
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उन्होंने कहा कि हॉस्टल द्वारा प्रत्येक छात्रा से प्रत्येक महीने एक हजार रुपये किराए की मांग साफ तौर पर मनमानी है क्योंकि छात्राओं ने सामान खुद नहीं छोड़ा था बल्कि ऐसा अचानक लगे लॉकडाउन के कारण हुआ था। ऐसे में पांच महीने के हिसाब से पांच हजार रुपये वसूलना तानाशाही है। उन्होंने मांग की कि विवि द्वारा इस फरमान को तुरंत वापस लिया जाए और जब तक हालात सामान्य न हो तब तक किसी भी छात्रों को हॉस्टल खाली करने के लिए तथा जबरन किराया वसूली नहीं होनी चाहिए।
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