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दूसरों के अधिकार का अतिक्रमण नहीं कर सकते स्ट्रीट वेंटर : कोर्ट
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नई दिल्ली। उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि स्ट्रीट वेंडरों के पास मौलिक अधिकार हैं, लेकिन जब वे इनका सार्वजनिक तरीके से उपयोग करते हैं या दूसरों के अधिकारों यानी चलने के अधिकार का अतिक्रमण करते हैं तो वे लागू नहीं माने जा सकते।
न्यायमूर्ति विपिन सांघी व जसमीत सिंह की खंडपीठ ने शनिवार को भी स्ट्रीट वेंडर्स एक्ट 2014 के संबंध में दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कहा कि फेरीवालों को हर बाजार में बैठने के लिए उचित स्थान और उचित कियोस्क मिलने चाहिए। उनके पास उचित लाइसेंस होना चाहिए। इसके बाद उन्हें पुलिस को ‘हफ्ता’ नहीं देना पड़ेगा। अदालत ने पूछा कि इस एक्ट को लागू करने में क्या अड़चन है? पिछले सात वर्षों से चल रही झिझक क्या है? पीठ ने कहा कि अधिकारियों को सुरक्षा, सुरक्षा, स्वच्छता, सड़क जैसे पहलुओं को ध्यान में रखते हुए स्ट्रीट वेंडिंग प्लान के साथ आना चाहिए।
पीठ ने कहा कि अधिकारियों को हर पांच साल में एक योजना की जरूरत है, लेकिन दुर्भाग्य से अब के लिए कोई योजना नहीं है। जो लोग बैठ गए हैं, उन्हें अपनी संपत्ति और आय का खुलासा करने की आवश्यकता होनी चाहिए। सड़कों पर बैठने वालों के मौलिक अधिकार हैं लेकिन कोई अधिकार निरपेक्ष नहीं है। यहां तक कि वह पुराना बैठने वाला भी है तो उसे अन्य को चलने के लिए रास्ता देना चाहिए। जब आप सार्वजनिक तरीके या सड़क का उपयोग करना चाहते हैं तो आप किसी और के चलने के अधिकार का अतिक्रमण कर रहे हैं। पीठ ने कहा कि हम चाहते हैं कि आप को कोई छू न सके, लेकिन आपको भी नियमों का पालन करना होगा। आपको क्षेत्र का घनत्व देखना होगा कि कितने वेंडर्स को अनुमति दी जा सकती है।
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कनॉट प्लेस क्षेत्र में दुकान मालिकों और ऑपरेटरों की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता संजीव रल्ली ने इस मुद्दे पर पीठ के पिछले फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि कोई भी हॉकर अन्य नागरिकों के अधिकारों का हनन नहीं कर सकता। सुनवाई के दौरान कुछ वकीलों ने मामले में हस्तक्षेप करने और निवेदन करने की कोशिश की तो अदालत ने कहा कि हम पहले यह देखना चाहते हैं कि क्या निर्णय दिए गए थे। फिर उस संदर्भ में हम देखना चाहते हैं कि स्ट्रीट वेंडर्स एक्ट कैसे आया? अदालत ने मामले की सुनवाई 18 नवंबर को तय की है।
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न्यायमूर्ति विपिन सांघी व जसमीत सिंह की खंडपीठ ने शनिवार को भी स्ट्रीट वेंडर्स एक्ट 2014 के संबंध में दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कहा कि फेरीवालों को हर बाजार में बैठने के लिए उचित स्थान और उचित कियोस्क मिलने चाहिए। उनके पास उचित लाइसेंस होना चाहिए। इसके बाद उन्हें पुलिस को ‘हफ्ता’ नहीं देना पड़ेगा। अदालत ने पूछा कि इस एक्ट को लागू करने में क्या अड़चन है? पिछले सात वर्षों से चल रही झिझक क्या है? पीठ ने कहा कि अधिकारियों को सुरक्षा, सुरक्षा, स्वच्छता, सड़क जैसे पहलुओं को ध्यान में रखते हुए स्ट्रीट वेंडिंग प्लान के साथ आना चाहिए।
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पीठ ने कहा कि अधिकारियों को हर पांच साल में एक योजना की जरूरत है, लेकिन दुर्भाग्य से अब के लिए कोई योजना नहीं है। जो लोग बैठ गए हैं, उन्हें अपनी संपत्ति और आय का खुलासा करने की आवश्यकता होनी चाहिए। सड़कों पर बैठने वालों के मौलिक अधिकार हैं लेकिन कोई अधिकार निरपेक्ष नहीं है। यहां तक कि वह पुराना बैठने वाला भी है तो उसे अन्य को चलने के लिए रास्ता देना चाहिए। जब आप सार्वजनिक तरीके या सड़क का उपयोग करना चाहते हैं तो आप किसी और के चलने के अधिकार का अतिक्रमण कर रहे हैं। पीठ ने कहा कि हम चाहते हैं कि आप को कोई छू न सके, लेकिन आपको भी नियमों का पालन करना होगा। आपको क्षेत्र का घनत्व देखना होगा कि कितने वेंडर्स को अनुमति दी जा सकती है।
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कनॉट प्लेस क्षेत्र में दुकान मालिकों और ऑपरेटरों की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता संजीव रल्ली ने इस मुद्दे पर पीठ के पिछले फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि कोई भी हॉकर अन्य नागरिकों के अधिकारों का हनन नहीं कर सकता। सुनवाई के दौरान कुछ वकीलों ने मामले में हस्तक्षेप करने और निवेदन करने की कोशिश की तो अदालत ने कहा कि हम पहले यह देखना चाहते हैं कि क्या निर्णय दिए गए थे। फिर उस संदर्भ में हम देखना चाहते हैं कि स्ट्रीट वेंडर्स एक्ट कैसे आया? अदालत ने मामले की सुनवाई 18 नवंबर को तय की है।